अगा रुहुल्लाह पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का पलटवार, कहा- उनका भाषण मानसिक और नैतिक दिवालियेपन का प्रतीक
श्रीनगर, 3 नवंबर (आईएएनएस)। जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (जेकेएनसी) ने सांसद अगा रुहुल्लाह मेहदी पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में उनके भाषण को 'मानसिक और नैतिक दिवालियेपन' का प्रदर्शन बताते हुए उन पर आत्ममुग्धता का आरोप लगाया। पार्टी ने कहा कि पवित्र कुरान और इंसान की गरिमा एवं सम्मान की बात करने वाले रुहुल्लाह ने अपने भाषण में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व के खिलाफ अपमानजनक, अभद्र और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया।
पार्टी ने कहा कि रुहुल्लाह की ओर से इस्तेमाल की गई भाषा उनके व्यक्तित्व को दर्शाती है। विशेष दर्जे और आरक्षण के मुद्दे पर पार्टी से इस्तीफा देने के उनके फैसले को लेकर भी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कई सवाल उठाए। पार्टी के अनुसार, रुहुल्लाह ने इस्तीफा देने का फैसला तब किया, जब पार्टी अध्यक्ष ने उनसे ऐसा करने को कहा। इसी तरह उन्होंने वर्ष 2010 की घटनाओं को भी अब याद किया, जब उन्हें इसकी जरूरत महसूस हुई।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने दावा किया कि रुहुल्लाह वर्ष 2010 में मंत्री पद पर बने रहे थे और उन्हें सामान्य फेरबदल के दौरान पद से हटाया गया था। इसके बाद उन्होंने 2014 का विधानसभा चुनाव भी पार्टी के टिकट पर लड़ा था। पार्टी ने सवाल किया कि यदि वर्ष 2010 की घटनाएं इतनी महत्वपूर्ण थीं तो उन्होंने उस समय या 2014 के चुनाव के दौरान इस मुद्दे को क्यों नहीं उठाया और 2026 में 16 साल बाद ही उन्हें इसकी याद क्यों आई?
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने रुहुल्लाह से पूछा कि क्या उन्होंने 6 नवंबर को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में विशेष दर्जे की बहाली की मांग वाले प्रस्ताव का सबसे पहले स्वागत नहीं किया था? क्या उन्होंने उस समय इसे पूरा किया गया वादा नहीं बताया था?
पार्टी ने सवाल किया कि संसद में विशेष दर्जे की बहाली के लिए उन्होंने क्या प्रयास किए? उन्हें लोगों की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करने और धर्मनिरपेक्ष दलों एवं सांसदों का समर्थन जुटाने के लिए संसद भेजा गया था। पार्टी ने कहा कि रुहुल्लाह इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश शेखर कुमार यादव के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए विभिन्न दलों के 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने में सफल रहे थे। ऐसे में क्या उन्होंने विशेष दर्जे या राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए भी सांसदों के हस्ताक्षर जुटाने का प्रयास किया? क्या उन्होंने संसद में इस संबंध में कोई प्रस्ताव या विधेयक लाने की कोशिश की?
पार्टी ने यह भी सवाल किया कि क्या रुहुल्लाह ने कभी संसद में इस मुद्दे को उठाया कि केंद्र सरकार और उसके नियुक्त उपराज्यपाल ने निर्वाचित सरकार की शक्तियों और जनता के जनादेश को कमजोर किया है? क्या उन्होंने यह मुद्दा उठाया कि केंद्र शासित प्रदेश की मौजूदा व्यवस्था में भी निर्वाचित सरकार के अधीन आने वाले विभागों को स्वतंत्र रूप से काम नहीं करने दिया जा रहा है और उपराज्यपाल रिमोट कंट्रोल के जरिए उन्हें चला रहे हैं?
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि रुहुल्लाह ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण के मुद्दे पर निर्वाचित सरकार का विरोध शुरू किया था। पार्टी ने माना कि उपराज्यपाल के शासन के दौरान ओपन मेरिट वर्ग के साथ गंभीर अन्याय हुआ है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इस मुद्दे को अपने चुनावी घोषणापत्र में प्रमुखता से शामिल किया था और व्यवस्था में बदलाव का वादा किया था।
पार्टी ने आरोप लगाया कि रुहुल्लाह और उनके समर्थकों ने समस्या के लिए आवाज उठाने वालों को ही जिम्मेदार ठहराया। पार्टी ने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने कभी ओपन मेरिट वर्ग के युवाओं से नौकरियां छीने जाने के लिए उपराज्यपाल या केंद्र सरकार के खिलाफ आवाज उठाई?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अनुसार, चुनावी वादे के अनुरूप राज्य सरकार ने आरक्षण व्यवस्था में बदलाव के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित की और महत्वपूर्ण संशोधन भी किए। हालांकि, संबंधित फाइल को उच्च स्तर पर रोक दिया गया है। पार्टी ने सवाल किया कि क्या रुहुल्लाह ने संसद में यह मुद्दा उठाया और केंद्र सरकार से पूछा कि जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल के आरक्षण संबंधी फैसले को क्यों रोका गया है?
पार्टी ने यह भी पूछा कि विधानसभा चुनाव और निर्वाचित सरकार के गठन से करीब छह महीने पहले सांसद चुने गए रुहुल्लाह ने क्या ओपन मेरिट वर्ग के युवाओं को न्याय दिलाने के लिए उपराज्यपाल के खिलाफ कोई प्रदर्शन आयोजित किया था? क्या उन्होंने भर्ती प्रक्रियाओं और परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तथा एक क्षेत्र के अभ्यर्थियों को व्यवस्थित तरीके से नौकरियों से बाहर किए जाने का मुद्दा उठाया?
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों और सीमाओं को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने उन मुद्दों पर अपनी रणनीति तय की है, जो जम्मू-कश्मीर की पहचान और अस्तित्व से सीधे जुड़े हैं। पार्टी ने कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने की उसकी मांग कभी भी विशेष दर्जे की बहाली की कीमत पर नहीं होगी। यदि ऐसा होता तो निर्वाचित सरकार के कामकाज की शुरुआत में ही विशेष दर्जे का प्रस्ताव प्राथमिकता नहीं बनता और मुख्यमंत्री 15 अगस्त को अपने संबोधन में इसका उल्लेख नहीं करते।
बयान में कहा गया कि जम्मू-कश्मीर की पहचान और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा नेशनल कॉन्फ्रेंस की राजनीतिक विचारधारा की बुनियाद है। पार्टी ने कहा कि 90 साल से अधिक पुरानी अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता को छोड़ना उसके लिए अपनी विचारधारा और राजनीति को छोड़ने जैसा होगा। पार्टी ने कहा कि छीने गए अधिकारों को वापस हासिल करने के लिए कुशल राजनीतिक रणनीति की जरूरत है, न कि नाटकीय गतिविधियों की। ऐसी गतिविधियों से कुछ समय के लिए सोशल मीडिया पर ध्यान और लोकप्रियता मिल सकती है, लेकिन इससे लोगों के लिए कोई ठोस उपलब्धि हासिल नहीं होगी।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अगा रुहुल्लाह के सांसद पद से इस्तीफा देने के फैसले को भी देर से उठाया गया कदम बताया। पार्टी ने आरोप लगाया कि उन्हें एक साल पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था, जब उन्होंने उन ताकतों का साथ देना शुरू किया था, जो नेशनल कॉन्फ्रेंस को मिले जनादेश से परेशान थीं। पार्टी ने दावा किया कि नेशनल कॉन्फ्रेंस में रहते हुए रुहुल्लाह बडगाम विधानसभा सीट के उपचुनाव में पार्टी की हार के लिए जिम्मेदार बने। पार्टी ने सवाल किया कि उस समय उनका जमीर कहां था, जब वह उसी पार्टी को नुकसान पहुंचा रहे थे, जिसकी वजह से उन्हें राजनीतिक पहचान मिली?
बयान के अंत में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा कि यह हैरान करने वाली बात है कि जिस व्यक्ति ने अपनी पूरी राजनीतिक यात्रा पार्टी से शुरू की, तीन बार विधायक रहे, सरकार में मंत्री बने और पार्टी के टिकट पर सांसद चुने गए, वही अब 25 साल बाद पार्टी में सभी कमियां निकाल रहे हैं और इस तरह का आत्ममुग्ध व्यवहार कर रहे हैं।
--आईएएनएस
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