☰
×

आगा रूहुल्लाह मेहदी के एनसी छोड़ने पर भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर बोले, डूब चुका नेशनल कॉन्फ्रेंस का जहाज

 

श्रीनगर, 3 नवंबर (आईएएनएस)। आगा रूहुल्लाह मेहदी के नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस्तीफे पर सियासी घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने इसे नेशनल कॉन्फ्रेंस के पतन और डूबते जहाज का संकेत बताया, वहीं शोपियां के निर्दलीय विधायक शब्बीर अहमद कुल्ले ने कहा कि विचारों में मतभेद होने पर नेता पार्टी की सीमाओं से निकलकर खुलकर अपनी बात रखता है।

आगा रूहुल्लाह मेहदी के नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ने पर भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा, "उनका इस्तीफा नेशनल कॉन्फ्रेंस के के डूबते जहाज का संकेत है। यह दिखाता है कि वह जहाज अब डूब चुका है। आगा रुहुल्लाह लंबे समय से नेशनल कॉन्फ्रेंस की नीतियों, उसके झूठ, फरेब और तानाशाही रवैये से नाराज थे।"

उन्होंने कहा कि आपने इसका नतीजा भी देखा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस बडगाम के उपचुनाव में बेहद पिछड़ गई, क्योंकि पिछले चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने आगा रुहुल्लाह के चेहरे को सामने रखकर बड़ी जीत हासिल की थी। इतना बड़ा जनादेश नेशनल कॉन्फ्रेंस को मिला था। अब इतने कदावर नेता और धार्मिक नेता का नेशनल कॉन्फ्रेंस से अलग होना केवल पार्टी को झटका नहीं देगा, बल्कि नेशनल कॉन्फ्रेंस को डुबोने का काम करेगा।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि आज हमने देखा कि लोगों की कितनी बड़ी भीड़ थी। यह जो नाराजगी है, वह केवल आगा रुहुल्लाह की नहीं है। विधायक अलग से नाराज हैं, लोग और कार्यकर्ता अलग से नाराज हैं। उनकी सुनवाई नहीं हो रही है और पार्टी में तानाशाही चल रही है। इन सारी चीजों को मिलाकर अगर आप देखेंगे तो नेशनल कॉन्फ्रेंस का पतन शुरू हो चुका है। आने वाले दिनों में नेशनल कॉन्फ्रेंस दो फाड़ हो जाएगी, टूट जाएगी और बिखर जाएगी। न नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार बचेगी और न ही उसका संगठन बचेगा।

उन्होंने कहा कि लोग फैसला करते और लोग चुनते हैं। अब उन्हीं लोगों के साथ अगर आप धोखा करेंगे और जिन लोगों ने अपने नुमाइंदे चुने हैं, उन नुमाइंदों पर आप तानाशाही करेंगे, उन्हें झूठा कहेंगे और उनकी सुनवाई नहीं करेंगे, तो उसका परिणाम सामने आएगा। इसलिए आगा रुहुल्लाह साहब का आज का फैसला केवल उनका व्यक्तिगत फैसला नहीं है, बल्कि उन लोगों की भावना का प्रतिनिधित्व करता है जिन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस को जिताया था। यही वजह है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस बचेगी नहीं और नेशनल कॉन्फ्रेंस का पतन तय है।

शोपियां के निर्दलीय विधायक शब्बीर अहमद कुल्ले ने कहा कि कि राजनीति में हर किसी का ना तो स्थायी दोस्त होता है औन ना ही स्थायी दुश्मन होता है। जो कल तक आगा रूहुल्लाह मेहदी नेशनल कॉन्फ्रेंस के खास चेहरे माने जाते थे, जिन्होंने उनके लिए प्रचार अभियान चलाए और सभाओं में हिस्सा लिया, वह उनका खास हिस्सा थे, लेकिन आज वह उसमें नहीं रहे और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। यह सोच का मामला है। जब विचारों में मतभेद होता है तो इंसान यह नहीं देखता कि वह किस पार्टी में था, बल्कि यह देखता है कि अपनी सोच को वह कैसे आगे बढ़ाए।

उन्होंने कहा कि शायद उन्हें यह महसूस हुआ कि जो वादे उन्होंने लोगों से किए थे, उन्हें वह पूरा नहीं कर पाए। इसलिए उनकी सोच रही होगी कि पार्टी की सीमाओं में रहते हुए वह अपनी बात खुलकर नहीं रख पा रहे हैं। अब वह उन बंधनों को तोड़कर खुली आवाज और खुले विचारों के साथ आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे। अब आगे उनका क्या रोल होगा, यह आने वाले दिनों में पता चलेगा।

शब्बीर अहमद कुल्ले ने कहा कि अगर किसी को किसी मुद्दे पर मतभेद है या असहमति है तो पार्टी में यह होना चाहिए। यह लोकतंत्र का हिस्सा है। अगर कोई व्यक्ति पार्टी के भीतर रहकर हक की बात करता है तो उसे गलत नहीं माना जाना चाहिए। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह पार्टी छोड़कर चला गया है। पीडीपी, भाजपा और अन्य पार्टियां इसे एक तमाशे की तरह पेश कर रही हैं। अगर 25 लोगों को किसी बात पर नाराजगी है और वे उसे सुधारने के लिए अपनी बात रखते हैं तो यह उनका अधिकार है। इसका यह मतलब नहीं कि वे पार्टी से अलग हो जाएंगे।

--आईएएनएस

केके/वीसी