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दौसा में एसीबी की बड़ी कार्रवाई, रोडवेज डिपो मैनेजर 20 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार

 

दौसा में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए रोडवेज डिपो मैनेजर विश्राम मीणा को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई उस समय की गई जब आरोपी ने मेडिकल लीव पास करने के बदले रिश्वत की मांग की थी।

जानकारी के अनुसार, पीड़ित कर्मचारी ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो राजस्थान में शिकायत दर्ज कराई थी कि डिपो मैनेजर द्वारा उसकी मेडिकल लीव स्वीकृत करने के लिए 20 हजार रुपये की अवैध मांग की जा रही है। शिकायत में बताया गया कि बिना रिश्वत दिए अवकाश स्वीकृत नहीं किया जा रहा था, जिससे कर्मचारी को लगातार मानसिक और प्रशासनिक दबाव का सामना करना पड़ रहा था।

शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की प्रारंभिक जांच की और आरोप सही पाए जाने पर ट्रैप की योजना तैयार की। इसके तहत टीम ने जाल बिछाया और निर्धारित स्थान पर आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। जैसे ही डिपो मैनेजर ने रकम स्वीकार की, एसीबी की टीम ने तुरंत उसे गिरफ्तार कर लिया।

अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई बेहद सुनियोजित तरीके से की गई थी ताकि आरोपी को किसी प्रकार का शक न हो। गिरफ्तारी के दौरान सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया और मौके से रिश्वत की राशि भी बरामद कर ली गई।

इस कार्रवाई के बाद राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज विभाग) में हड़कंप मच गया है। विभागीय स्तर पर भी मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे दी गई है और आगे की विभागीय कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

एसीबी अधिकारियों ने बताया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और किसी भी सरकारी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत मिलने पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आम जनता से भी अपील की है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी अवैध रूप से पैसे की मांग करता है तो उसकी शिकायत तुरंत एसीबी को दें।

स्थानीय स्तर पर इस गिरफ्तारी को लेकर लोगों ने राहत की भावना जताई है। लोगों का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में छोटे-छोटे कामों के लिए रिश्वत की मांग आम समस्या बनती जा रही है, जिससे आम नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में एसीबी की यह कार्रवाई एक सख्त संदेश के रूप में देखी जा रही है।

फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है और यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस मामले में अन्य कर्मचारी भी शामिल थे या यह अकेले स्तर पर किया गया भ्रष्टाचार का मामला है। एसीबी टीम पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कर रही है ताकि सभी पहलुओं का खुलासा हो सके।

इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी स्तर पर रिश्वतखोरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।