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अभिजीत दिपके और नेहा बोरा की पुलिस हिरासत पर भड़के सीपीएम नेता, बोले- 'ये लोकतांत्रिक देश के लिए ठीक नहीं'

 

नई दिल्ली, 17 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके और आइसा की अध्यक्ष नेहा बोरा समेत अन्य लोगों को हिरासत में लिए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। सीपीएम के राज्यसभा सांसद वी. शिवदासन ने कहा कि एक लोकतांत्रिक देश के लिए ये सब बातें बिल्कुल ठीक नहीं हैं। हमारी लड़ाई जारी रहेगी।

राज्यसभा सांसद वी. शिवदासन ने शनिवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "पुलिस ने छात्रों और युवाओं को गिरफ्तार किया। यहां तक कि पुलिस अधिकारियों को भी नहीं पता कि इसकी वजह क्या है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर ही इन तमाम छात्रों और प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया और घंटों तक हिरासत में रखा गया, जिनमें छात्राएं भी शामिल थीं।"

उन्होंने कहा कि छात्राओं और अलग-अलग राजनीतिक दलों की महिला सदस्यों को पुलिस स्टेशन में घंटों तक हिरासत में रखा गया। यह पूरी तरह से मानवाधिकारों के खिलाफ है।

शिवदासन ने कहा, "यहां अभिजीत दिपके, नेहा बोरा और सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया। अलग-अलग दलों के नेताओं और उनके साथ बदसलूकी की गई। एक लोकतांत्रिक देश के लिए ये सब बातें बिल्कुल भी ठीक नहीं हैं। हमारी लड़ाई जारी रहेगी।"

इस दौरान, सीपीएम नेता ने प्रस्तावित परिसीमन योजनाओं पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से प्रधानमंत्री को लिखे गए पत्र को लेकर भी प्रतिक्रिया दी।

वी. शिवदासन ने कहा, "परिसीमन की प्रक्रिया के असर को लेकर हमारा रुख एकदम स्पष्ट है। भारत में कुछ राज्यों ने देश की जरूरत के हिसाब से अपनी जनसंख्या नीति लागू की है, जबकि कुछ राज्य अभी उस स्थिति में नहीं हैं। इसलिए, इनमें अंतर है।"

उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा महिला आरक्षण को इस परिसीमन से जोड़ने की कोशिश कर रही है। हमारा रुख साफ है कि महिला आरक्षण देश के लिए जरूरी है और यह देश की एक आवश्यकता है। लेकिन भाजपा इसे परिसीमन से जोड़कर आरक्षण में देरी करना चाहती है। इसलिए, इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

--आईएएनएस

डीसीएच/