‘आप’ सांसद राघव चड्ढा ने की केंद्र की तारीफ, कहा- सरकार ने गिग वर्करों की समस्या को सुलझाया
नई दिल्ली, 14 जनवरी (आईएएनएस)। आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने केंद्र सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि सरकार ने गिग वर्करों को बड़ी राहत देते हुए 10 मिनट की डिलीवरी पर रोक लगा दी है। इससे देशभर में अलग-अलग कंपनियों के लिए काम करने वाले गिग वर्करों को राहत मिली है।
राघव चड्ढा ने बुधवार को दिल्ली के ओल्ड राजेंद्र नगर में गिग वर्करों से मुलाकात की और चाय पर चर्चा की।
राघव ने एक्स पोस्ट में लिखा कि कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता? एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों। आज डिलीवरी राइडर्स से मिलकर उन्हें 10 मिनट में डिलीवरी से निजात की बधाई दी। ये सिर्फ एक सांसद के दिए गए भाषण की गूंज नहीं बल्कि इस देश के लाखों-करोड़ों मेहनतकश और ईमानदार गिग वर्करों के संघर्ष की जीत है। केंद्र सरकार का दिल से धन्यवाद, जिन्होंने इन मजबूर गिग वर्कर्स के दर्द को समझा। आज मुझे इस बात का संतोष है कि अब देश में इस मुद्दे पर सकारात्मक चर्चा की शुरुआत हो चुकी है।
आप सांसद ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि 10 मिनट में डिलीवरी वाली ब्रांडिंग हटाने का निर्देश सभी गिग वर्कर्स के लिए एक जीत है। आज मेरे साथ बैठे गिग वर्कर्स, और देश भर में उनके जैसे लाखों लोगों ने यह अपनी लड़ाई से हासिल किया है। यह मेरी पर्सनल जीत नहीं है-कोई भी अकेला सांसद भाषण देकर इतना बड़ा बदलाव नहीं ला सकता है। यह जीत गिग वर्कर्स के उस विश्वास की जीत है जो उन्होंने सरकार से लगाई थी।
राघव चड्ढा से मुलाकात के बाद गिग वर्कर काफी खुश दिखाई दिए। कुछ गिग वर्कर से आईएएनएस ने बातचीत की।
एक गिग वर्कर ने बताया कि हमारी सबसे बड़ी समस्या कमाई है। हमें बहुत कम पैसे मिल रहे हैं। हमें उम्मीद है कि वे जो कर रहे हैं वह बहुत अच्छा है और इसके अच्छे नतीजे आएंगे।
एक अन्य गिग वर्कर ने बताया कि हम सभी राइडर्स के लिए एक फिक्स्ड रेट कार्ड चाहते हैं क्योंकि कंपनी अक्सर दूरी के साथ छेड़छाड़ करती है। उदाहरण के लिए, 5 किमी के ऑर्डर के लिए, वे सिर्फ 30 या 40 देते हैं। हमें एक फिक्स्ड रेट कार्ड चाहिए। जैसे, 5 किमी के ऑर्डर के लिए लगातार 50 रुपए मिलने चाहिए।
एक अन्य गिग वर्कर ने कहा कि जब ऑर्डर लेकर ग्राहक के पास पहुंचते हैं तो कई बार कैंसल कर दिया जाता है, या फिर ऑर्डर नहीं लिया जाता है। हमारी सारी मेहनत बेकार चली जाती है। ऑर्डर करने वालों को भी हमारी समस्या को समझना चाहिए।
--आईएएनएस
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