'आप' का दिल्ली सरकार पर आरोप, करोड़ों रुपए के दवा घोटाले में भी हुआ घोटाला
नई दिल्ली, 8 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली में कथित 650 करोड़ रुपए के दवा घोटाले को लेकर आम आदमी पार्टी ने एक बार फिर दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दवा घोटाले के अंदर भी एक और बड़ा घोटाला हुआ है। उनका दावा है कि दिल्ली सरकार की ओर से खरीदी गई दवाइयों का एक बड़ा हिस्सा अस्पतालों तक पहुंचा ही नहीं और दवाइयों की सप्लाई केवल सरकारी फाइलों और दस्तावेजों में दिखाई गई।
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि करीब 100 करोड़ रुपए की दवाइयों को कथित तौर पर 400 करोड़ रुपए में खरीदा गया, जिससे लगभग 300 करोड़ रुपए की कमीशनखोरी का आरोप सामने आया है। उन्होंने कहा कि अब इस मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। उनके मुताबिक, जिन दवाइयों को अस्पतालों तक पहुंचना था, उनमें से भी बड़ी मात्रा अस्पतालों में वास्तविक रूप से उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार के सरदार वल्लभ भाई पटेल अस्पताल से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद इस मामले पर और सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरोप है कि अस्पताल की फाइलों में लाखों रुपए की दवाइयां मंगाए जाने और पहुंचाए जाने का रिकॉर्ड दर्ज है, लेकिन जब इन दवाइयों की वास्तविक उपलब्धता की जांच की गई तो वह अस्पताल में मौजूद नहीं मिलीं। सौरभ भारद्वाज ने इसे भ्रष्टाचार का एक और गंभीर स्तर बताया। उन्होंने दवाइयों पर छपी एमआरपी को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली की पिछली आम आदमी पार्टी सरकार के दौरान अस्पतालों के लिए केंद्रीय खरीद एजेंसी यानी सीपीए के माध्यम से ऐसी दवाइयां खरीदी जाती थीं, जिन पर एमआरपी दर्ज नहीं होती थी। इन दवाइयों पर स्पष्ट रूप से ‘दिल्ली सरकार की सप्लाई, बिक्री के लिए नहीं’ लिखा होता था।
उनका कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी दवाइयों को खुले बाजार में बेचने की किसी भी संभावना को रोकना था। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार द्वारा एमआरपी वाली दवाइयां खरीदी जा रही हैं। सौरभ भारद्वाज के मुताबिक, एमआरपी वाली दवाइयों को निजी केमिस्टों के माध्यम से खुले बाजार में बेचने की संभावना बढ़ जाती है। उन्होंने दावा किया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 70 से 80 फीसदी दवाइयां अस्पतालों तक पहुंचने के बजाय कथित तौर पर खुले बाजार में बेच दी गईं, जबकि केवल 20 से 30 फीसदी दवाइयां ही अस्पतालों तक पहुंचीं।
सौरभ भारद्वाज ने बताया कि कुछ दिन पहले आम आदमी पार्टी के विधायक कुलदीप कुमार ने दिल्ली सरकार के अस्पतालों का दौरा कर वहां दवाइयों की कमी का मुद्दा उठाया था। उनके मुताबिक, अस्पतालों में मरीजों को जरूरी दवाइयां उपलब्ध नहीं हो रही थीं और कई जगह बेहद सीमित मात्रा में दवाइयां दी जा रही थीं। उन्होंने दावा किया कि इस दौरान जिन दवाइयों को देखा गया, उन पर एमआरपी छपी हुई थी। आप नेता ने कहा कि उस समय दवाइयों की एमआरपी को लेकर जो आशंका जताई गई थी, अब उससे जुड़ी कई और कड़ियां सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि यदि सरकारी रिकॉर्ड में दवाइयों की सप्लाई दिखाई जा रही है, लेकिन अस्पतालों में वह दवाइयां मौजूद नहीं हैं तो यह पूरे खरीद और वितरण तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि कथित भ्रष्टाचार कई स्तरों पर हुआ है। उन्होंने कहा कि एक तरफ दवाइयों की खरीद में भारी कीमत बढ़ाए जाने का आरोप है, वहीं दूसरी तरफ खरीदी गई दवाइयों के अस्पतालों तक नहीं पहुंचने का मामला सामने आया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर और वर्क ऑर्डर से जुड़ी फाइलों के गायब होने की बातें सामने आ रही हैं और अस्पतालों में रिकॉर्ड के मुताबिक मंगाए गए सामान की वास्तविक मौजूदगी भी नहीं मिल रही है।
उन्होंने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों पर पड़ सकता है। आप नेता ने पूरे मामले की गहन जांच की मांग करते हुए कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सरकारी खजाने से खरीदी गई दवाइयां आखिर कहां गईं और अस्पतालों तक उनकी वास्तविक सप्लाई क्यों नहीं हुई।
--आईएएनएस
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