'आप दोनों ने बड़ा कमाल किया है'; मन की बात में पीएम मोदी ने गुरिंदरवीर और अनिमेष को दी बधाई
नई दिल्ली, 31 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात के 134वें संस्करण में रांची में आयोजित हुए फेडरेशन कप 2026 में 100 मीटर फ्रीस्टाइल रेस में नेशनल रिकॉर्ड बनाने वाले गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर की जमकर प्रशंसा की। प्रधानमंत्री ने भारत के दोनों एथलीटों से फोन पर बात भी की और उनकी संघर्ष की कहानी भी सुनी।
पीएम मोदी ने गुरिंदरवीर-अनिमेष को दो दिन के भीतर तीन बार नेशनल रिकॉर्ड तोड़ने पर बधाई दी। उन्होंने कहा, "आप दोनों ने बहुत बड़ा कमाल किया है और सिर्फ दो दिनों के भीतर तीन बार नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा है। आपकी जोड़ी ने कमाल किया है। हमने संगीत में तो जुगलबंदी देखी थी, लेकिन चुनौती में जुगलबंदी होती है कि एक बार एक चुनौती दे फिर दूसरा उस चुनौती को उठा ले। फिर तीसरी बार कर ले।"
प्रधानमंत्री ने दोनों एथलीटों से फोन पर बात करते हुए उनके संघर्ष की कहानी भी जानी। अनिमेष ने बताया कि उन्होंने एथलीट की दुनिया में कदम साल 2021 में रखा और वह इससे पहले फुटबॉल खेला करते थे। इसके बाद वह नेशनल लेवल के ट्रायल के लिए गए और उन्हें सिलेक्ट कर लिया गया। वहीं, गुरिंदरवीर ने बताया कि वह अपने पिता का सपना पूरा करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि एथलेटिक्स में आने की प्रेरणा उन्हें उनके पिता से मिली।
हालांकि, उन्होंने बताया कि 100 मीटर रेस को चुनने पर लोगों ने कई तरह के सवाल उठाए थे, लेकिन गुरिंदरवीर के पिता ने उन्हें पूरा सपोर्ट किया। उन्होंने कहा कि लोगों का कहना था कि भारत के एथलीटों का शरीर 100 मीटर रेस के लिए नहीं बना है, पर उनके पिता ने उन पर हमेशा भरोसा जताया, जिसकी वजह से वह नया नेशनल रिकॉर्ड कायम कर सके।
अनिमेष ने बताया कि जब उन्होंने एथलेटिक्स में करियर बनाने का फैसला किया, तो उनके इस निर्णय पर लोगों ने कई तरह के सवाल उठाए। हालांकि, अनिमेष के पिता ने उन पर हमेशा भरोसा किया और उन्हें इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में भी वह और गुरिंदरवीर दमदार प्रदर्शन करने की पूरी कोशिश करेंगे। गुरिंदरवीर और अनिमेष ने बताया कि वह दोनों अच्छे दोस्त भी हैं। प्रधानमंत्री ने इन दोनों एथलीटों की खेल भावना की भी तारीफ की। उन्होंने कहा कि चुनौती देने के साथ-साथ जिस तरह से आपने एक-दूसरे की मदद भी की, वो अद्भुत है। उन्होंने गुरिंदरवीर और अनिमेष को भविष्य के लिए ढेरों शुभकामनाएं देते हुए उम्मीद जताई कि यह दोनों एथलीट आगे भी देश का नाम रोशन करेंगे।
गुरिंदरवीर ने 100 मीटर रेस को 10.09 सेकंड में पूरा करके नया नेशनल रिकॉर्ड कायम किया। वहीं, अनिमेष 10.20 के साथ दूसरे नंबर पर रहे। सेमीफाइनल में गुरिंदरवीर ने अनिमेष का रिकॉर्ड तोड़ते हुए रेस को 10.17 सेकंड में पूरा किया था। हालांकि, ठीक 10 मिनट बाद ही अनिमेष ने 100 मीटर रेस को 10.15 सेकंड में पूरा करके नया नेशनल रिकॉर्ड बना दिया था, जिसको फाइनल में गुरिंदरवीर तोड़ने में सफल रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरिंदरवीर और अनिमेष से फोन पर बातचीत की।
प्रधानमंत्री ने अनिमेष और गुरिंदरवीर से उनका हाल पूछा और उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने दोनों से कहा कि आपने तो बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आपकी जोड़ी ने भी बड़ा कमाल किया है। हमने संगीत में तो जुगलबंदी देखी थी लेकिन चुनौती में अब जुगलबंदी होती है कि एक बार एक चुनौती दे फिर दूसरा उस चुनौती को उठा ले। फिर तीसरी बार कर ले। बड़ा दिलचस्प विषय रहा है आपका। मैं चाहता हूं कि ‘मन की बात’ के दर्शकों को पता चले कि आप लोग के विषय में उनको जानकारी हो। आपने जो पराक्रम किया है उसका पता चले।
इसके जवाब में अनिमेष ने अभिवादन करते हुए कहा कि मैं 200 मीटर और 400 मीटर का नेशनल रिकॉर्ड धारक हूं और मैं छत्तीसगढ़ से हूं। अभी मैं ओडिशा से खेलता हूं। मैंंने पिछले साल एशियन मेडल और वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स मेडल जीता था। मैंने एथलेटिक्स 2021 से चालू किया जब मैं स्कूल से पास आउट हुआ। मैं सैनिक स्कूल अम्बिकापुर से पास आउट हूं और मैं पहले फुटबॉल खेला करता था। मेरे माता-पिता मुझे कोविड के समय मुझे थोड़ी बहुत छूट देते थे कि तू जाके बाहर दौड़ ले या खेल ले तो जब कोविड खत्म होने लगा तो मेरे फुटबॉल के जो दोस्त थे उन्होंने मुझे बोला कि राज्यस्तर पर ट्रायल होने वाला है, तो भी जाकर हिस्सा ले और मैंने हिस्सा लियै। मैं वहां से नेशनल में सिलेक्ट हुआ और आज इंटरनेशनल लेवल पर देश का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं।
प्रधानमंत्री मोदी का अभिवादन करते हुए गुरिंदरवीर ने कहा कि मैं इंडियन नेवी में नौसेना अधिकारी हूं और मैं भारत का सबसे तेज धावक हूं। अभी मैंने 100 मीटर में 10.09 का नेशनल रिकॉर्ड बनाया है। मैं पहला भारतीय हूं जो 10.1 के बैरियर के नीचे भागा है और मैं कोशिश कर रहा हूं कि मैं ट्रैक और वर्दी में भी अपने देश की सेवा करूं। मेरे पिता और दादा भी खिलाड़ी रहे हैं और भारत में जब भी कोई त्योहार होता है जैसे दिवाली, जैसे नया साल तो हम अपने घर की सफाई करते हैं। तो मैं अपने पिता की ट्रॉफी और मेडल की सफाई करता था तो मुझे वो बहुत अच्छा लगता था, मैं बहुत खुश होता था। तब जब मैं कोई ट्रॉफी साफ करता था तो मैं पूछता था कि भई ये ट्रॉफी कहां जीती, ये मेडल कहां जीता, ये फोटो कब की है, तो फिर मेरे को वो अपनी कहानी सुनाते थे ,कि मैं यहां खेलने गया, मैंने ये नेशनल मेडलl जीता, मैंने अपनी टीम को इसमें जिताया। फिर मैं भी उनको बोलता था कि मैं भी स्पोर्ट्स में जाऊंगा। इसकी वजह से मेरी भी दिलचस्पी बनने लगी और मैंने उसैन बोल्ट का वर्ल्ड रिकॉर्ड टूटते हुए देखा। एक माजाकिया कहानी है। मैं टीवी देख रहा था तो मम्मी ने मेरा टीवी बंद कर दिया कि अभी बेटा पढ़ने का समय हो गया, आप पढ़ो। तो मैंने कहा ठीक है आप मेरे को टीवी नहीं देखने देते, एक दिन ऐसा आएगा आप मेरे को टीवी में खोजोगे कि देखो वो गुरिंदरवीर दौड़ रहा है। अब मुझे खुशी होती जब मेरी मां मुझे टीवी पर दौड़ते हुए देखती है।
प्रधानमंत्री की सराहना पर गुरिंदरवीर ने कहा कि मेरे पिता भी वॉलीबॉल खेलते थे। घर की समस्याओं की वजह से उन्होंने अपना खेल छोड़ दिया। उन्होंने मेरे अंदर वो सपना देखा कि मेरा बेटा वो सपना पूरा करेगा तो मैं उनसे बातें करता था, फिर सुनता था मिल्खा सिंह इतनी मेहनत करते थे। मैंने भी उनसे वादा किया कि मैं भी एक दिन आपका सपना पूरा करूंगा। वह बोलते थे कि सपना ऐसे पूरा नहीं होता, उसके लिए बहुत कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। मेहनत करनी पड़ती है। उनकी बातें मुझे प्रेरणा देती थीं। मेरे पिता मुझे प्रेरणा देते थे कि मैं भागूंगा तो अपने देश के लिए, देश के लिए मेडल लेकर आऊं। उन्होंने कहा कि मैंने जब 100 मीटर का इवेंट चुना तो सभी बोलते थे कि 100 मीटर मत करो, 100 मीटर भारतीयों का इवेंट नहीं है। भाततीयों का शरीर 100 मीटर के लिए नहीं बना है। मैं और मेरे पिता हमेशा बोलते थे कि अभी गुरिंदरवीर हमने ये चुना है, हम इससे पीछे नहीं हटेंगे। जो हमें बोलते हैं कि हम नहीं कर सकते, अब हम उनको कर के दिखाएंगे। वो भरोसा जब मेरे पिता ने मेरे पर किया तो मैं उस भरोसे को अपनी हिम्मत बनाकर मैं चला और मैं आज हर भारतीय को बोलता हूं कि जो चाहो वो कर सकते हो।
प्रधानमंत्री ने दोनों को बधाई देते हुए कहा कि आप दोनों ने बहुत बड़ा कमाल किया है और सिर्फ दो दिनों के भीतर आप दोनों ने तीन बार नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा है। 100 मीटर रेस में दौड़ना, जैसा गुरिंदरवीर ने कहा कि लोग कहते हैं कि भारत के लोगों का तो बदन इस काम के लिए है ही नहीं। इतना मुश्किल होते हुए भी आपने काम किया तो ये दोनों से मैं जानना चाहूंगा और ‘मन की बात’ के श्रोता भी सुनना चाहेंगे कि कौन सा जज्बा था, क्या जिद थी, क्या सोचा था, और कैसे कर रहे थे ? ये कितना मुश्किल होता है।
इसके जवाब में गुरिंदरवीर ने कहा कि शुरुआत में बहुत संघर्ष था, बहुत बार लगा कि मैं सही कर रहा हूं, मैंने सही करियर चुना है, क्योंकि हर बार आप नहीं जीतते, कभी- कभी आप सीखते हैं। जब मैं हारता था या अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता था। कोई इंजरी हो जाती थी, तो मेरे घरवाले मुझे सपोर्ट करते थे कि कोई नहीं एक दिन बुरा चला गया, एक साल बुरा चला गया तो इससे जिंदगी खराब नहीं होती। सपने देखना नहीं छोड़ते। मेरे कोच ने भी मुझे ये सिखाया कि अगर तू नहीं करेगा तो कोई और नहीं कर पाएगा। तो ऐसे में जब हमारे आसपास के लोग हमें उत्साहित करते हैं तो हमारा मोटिवेशन कभी नहीं टूटता।
प्रधानमंत्री मोदी से अनिमेष ने कहा कि सर, मुझे तो सारे लोग बोलते थे कि ये नया फील्ड है, तू कर पाएगा या नहीं, तो मैं बोला कि अब मैं इस फील्ड में घुसा हूं तो करूंगा ही। मेरे पापा भी हमेशा मुझे बोलते थे कि तू इस फील्ड में घुसा है तो कभी पीछे मुड़के मत देखना। तू इस फील्ड में घुसा है तो इसपे अडिग रहना, इस पर आगे बढ़ना है। तेरे को सारी सुविधाएं, सभी चीजों को हम सपोर्ट करेंगे। बस तुम मेहनत करों और भारत को दिखाओ कि भारतीय भी भाग सकते हैं, क्योंकि ये मुझे भी लोग बोलते थे कि भारतीयों के जीन्स ऐसे नहीं है कि वो 10 या 10.1 के अंदर भाग सकते है या कोई वो स्प्रिंट कर सकते हैं, लेकिन अभी हम दोनों ने ऐसा साबित किया कि भारतीय भी कर सकते हैं। ऐसा कोई मुश्किल नहीं है हमारे लिए, हम भी सब कुछ कर सकते हैं। तो सर ये सारी चीजें मुझे बहुत मोटिवेट करती हैं और जैसे-जैसे हम ट्रेनिंग कर रहे हैं हम और टाइमिंग तोड़ रहे हैं। हम और करेंगे सर अभी। अभी हम दोनों का सिलेक्शन कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए भी हुआ है तो वहां आगामी प्रतियोगिता में हम और अच्छा प्रदर्शन करेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि आप लोगों ने देश का मान बढ़ाया है और देश को भविष्य में इस जगह पर पहुंचाने के लिए और बेहतर करेंगे। मैं मानता हूं कि आपकी ये जो खेल भावना है, एक-दूसरे को चुनौती भी देना है और फिर आगे निकलने के लिए प्रयास करना है और फिर आगे जाने के लिए एक-दूसरे की मदद करना है, ये अद्भुत है। आप लोगो को मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई, मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं और आप दोनों देश का नाम रोशन करेंगे। मुझे पूरा विश्वास है आप ऐसे ही मेहनत करते रहिए और प्रगति की राह पर आगे बढ़िए। मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं।
गुरिंदरवीर और अनिमेष ने शुभकामनाओं और प्रोत्साहन के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया।
--आईएएनएस
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