आक्रांताओं ने जो अन्याय किया, भोजशाला पर हाईकोर्ट के फैसले ने उसे दूर किया: हरि शंकर जैन
गाजियाबाद, 15 मई (आईएएनएस)। भोजशाला मामले पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को लेकर वकील हरि शंकर जैन ने कहा कि कोर्ट ने साफ तौर पर कहा है कि यहां एक मंदिर था। हिंदुओं को यहां पूजा करने का अधिकार मिलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कोर्ट ने साफ कर दिया है कि एएसआई ने सर्वे किया। वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की गई। ऐतिहासिक और पुरातात्विक तथ्यों से साबित हो रहा है कि 1034 में राजा भोज ने सरस्वती मंदिर और संस्कृत पाठशाला बनवाया था। मुस्लिम आक्रांताओं ने उसे तोड़कर एक ढांचा खड़ा कर दिया और वहां पर नमाज पढ़ने लगे। नमाज पढ़ लेने मात्र से कोई ढांचा मस्जिद नहीं हो जाता।
हरि शंकर जैन ने कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि धार्मिक स्वरूप मंदिर का है। मंदिर था और मंदिर है। कोर्ट ने एएसआई के आदेश को भी निरस्त कर दिया है। वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने के लिए भी कोर्ट ने कहा है। मात्र चार साल में कोर्ट का फैसला आया है। आक्रांताओं ने जो अन्याय किया था, उसको दूर किया गया है। ये पूरे देश की जीत है। मेरा प्रण है कि जितने भी मंदिरों को तोड़कर मस्जिद बनाई गई है, सबको वापस लाना है।
समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि हाईकोर्ट के दिए गए आदेश पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। लोगों को अदालत के फैसले को स्वीकार करना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि मैंने फैसला नहीं पढ़ा है, इसलिए मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगी। हमें धर्मनिरपेक्षता के लिए काम करना होगा।
काजी सैयद निसार अली ने भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट के फैसले पर कहा कि यह एक पक्ष के फेवर में गया है। उन्होंने कहा कि आगे सुप्रीम कोर्ट है। हिंदुस्तान के अदालतों पर हमें भरोसा है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। अगर कोई पक्ष इस फैसले को अपने फेवर में समझ रहा है तो ये अंतिम फैसला नहीं है। अभी सुप्रीम कोर्ट है।
--आईएएनएस
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