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पटना चिड़ियाघर के सफेद बाघ का वीडियो वायरल, सेहत को लेकर उठे सवाल

 

दुनिया भर में बाघों के संरक्षण के लिए अभियान चलाए जाते हैं। इनका मकसद लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाना, उनके प्राकृतिक आवास की रक्षा करना और अवैध शिकार पर रोक लगाना है। लेकिन इसी बीच बिहार की राजधानी पटना स्थित संजय गांधी जैविक उद्यान से एक वीडियो सामने आया है, जिसने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

वायरल वीडियो में क्या दिखा?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में चिड़ियाघर के एक सफेद बाघ को उसके बाड़े के अंदर बेहद सुस्त और कमजोर हालत में देखा गया। वह धीरे-धीरे चलता नजर आता है, जिससे कई दर्शकों को लगा कि उसकी सेहत ठीक नहीं है।

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कई लोगों ने सवाल उठाए कि क्या बाघ को पर्याप्त भोजन मिल रहा है? क्या उसकी नियमित मेडिकल जांच हो रही है? और क्या उसे घूमने-फिरने के लिए पर्याप्त जगह दी गई है?

सफेद बाघ क्यों होते हैं खास?

सफेद बाघ कोई अलग प्रजाति नहीं होते, बल्कि यह बंगाल टाइगर का ही एक दुर्लभ रंग रूप (जेनेटिक वैरिएशन) है। इन्हें विशेष देखभाल और संतुलित आहार की जरूरत होती है। चिड़ियाघरों में इनके स्वास्थ्य की निगरानी आमतौर पर पशु चिकित्सकों की टीम करती है।

प्रशासन की जिम्मेदारी पर चर्चा

वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने प्रशासन से पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि अगर बाघ की सेहत ठीक है, तो चिड़ियाघर प्रशासन को आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं अगर कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो तुरंत उचित इलाज और देखभाल सुनिश्चित की जानी चाहिए।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी जंगली जानवर के व्यवहार को केवल कुछ सेकंड के वीडियो से पूरी तरह आंकना सही नहीं होता। कई बार गर्मी, उम्र या प्राकृतिक स्वभाव के कारण भी जानवर सुस्त दिखाई दे सकते हैं।

संरक्षण की जरूरत

भारत में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए कई परियोजनाएं चलाई जा रही हैं। ऐसे में किसी भी चिड़ियाघर या संरक्षित क्षेत्र में बाघ की हालत को लेकर उठे सवाल गंभीर माने जाते हैं।

फिलहाल यह मामला चर्चा में है। लोगों की उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी जल्द ही सफेद बाघ की सेहत को लेकर आधिकारिक जानकारी साझा करेंगे, ताकि भ्रम और चिंताओं को दूर किया जा सके।