डूंगरपुर के कोकापुर में अनोखी परंपरा: जलते अंगारों पर चले ग्रामीण, देखने वालों की थम गईं सांसें
प्रदेशभर में सोमवार रात होलिका दहन के साथ होली पर्व की शुरुआत हो गई। जगह-जगह परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ होलिका दहन किया गया और लोगों ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दीं। जहां एक ओर लोग रंगों के त्योहार की तैयारियों में जुट गए हैं, वहीं डूंगरपुर जिले के कोकापुर गांव में होलिका दहन के दूसरे दिन एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने हर किसी को हैरान कर दिया।
कोकापुर गांव में ग्रामीण जली हुई लकड़ियों के धधकते अंगारों पर नंगे पांव चलते नजर आए। यह नजारा इतना रोमांचक था कि मौके पर मौजूद लोगों की सांसें थम गईं। अंगारों की तपिश साफ महसूस की जा सकती थी, लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण पूरे आत्मविश्वास और आस्था के साथ उन पर चलते दिखाई दिए।
आस्था और परंपरा का संगम
ग्रामीणों के अनुसार यह कोई सामान्य प्रदर्शन नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि होलिका दहन के बाद अग्नि की राख और अंगारों पर चलने से बुरी शक्तियों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है और हर साल होलिका दहन के दूसरे दिन इसका आयोजन किया जाता है।
इस दौरान गांव में विशेष पूजा-अर्चना भी की जाती है। लोग पहले विधिवत पूजा करते हैं और फिर सामूहिक रूप से अंगारों पर चलते हैं। ग्रामीणों का विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ अग्नि पर चलने से किसी प्रकार की हानि नहीं होती।
सुरक्षा के बीच आयोजन
हालांकि यह परंपरा जोखिम भरी नजर आती है, लेकिन ग्रामीणों का दावा है कि आयोजन के दौरान पूरी सावधानी बरती जाती है। अंगारों को एक निश्चित आकार में फैलाया जाता है और आसपास पानी व अन्य जरूरी इंतजाम रखे जाते हैं। स्थानीय लोग बताते हैं कि इस आयोजन के दौरान अब तक कोई गंभीर हादसा सामने नहीं आया है।
देखने उमड़ी भीड़
इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे। कई लोगों ने इस दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया। सोशल मीडिया पर भी अंगारों पर चलते ग्रामीणों के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजनों में सावधानी बेहद जरूरी है, क्योंकि जरा सी चूक गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि ग्रामीण इसे अपनी आस्था और साहस का प्रतीक मानते हैं।
होली के उल्लास के बीच कोकापुर गांव की यह अनोखी परंपरा चर्चा का विषय बनी हुई है। जहां एक ओर लोग रंगों की मस्ती में डूबने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं यह दृश्य आस्था, परंपरा और साहस का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रहा है।