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दिल्ली की सड़कों पर छात्राओं का अनोखा प्रदर्शन! 'समोसा और कचौड़ी' वाले नारों से गूंजा राजधानी का माहौल, जानें क्या है पूरा मामला

 

दिल्ली के एक पार्क में 17 साल की नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म और बिहार के जमुई व समस्तीपुर में बच्चियों से छेड़छाड़ की घटनाओं के बाद महिला सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। इन घटनाओं के विरोध में दिल्ली विश्वविद्यालय (DU), जामिया मिल्लिया इस्लामिया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की छात्राओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में ABVP और NSUI समेत अलग-अलग छात्र संगठनों की भागीदारी देखने को मिली।

नए अंदाज में छात्राओं ने दर्ज कराया विरोध

इस प्रदर्शन में छात्राओं के नारों ने भी लोगों का ध्यान खींचा। पारंपरिक विरोध नारों से अलग इस बार Gen Z के अंदाज में व्यंग्य, तंज और सामाजिक सवालों को नारों के जरिए सामने रखा गया।प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने “रेपिस्ट को अंदर करो, लड़कियों को नहीं”, “फूल नहीं, चिंगारी है, ये भारत की नारी है”, “नारी अपने आप की, नहीं किसी के बाप की” और “शर्म नहीं है मर्दों में, औरत क्यों है पर्दों में” जैसे नारे लगाए।कुछ नारों में हास्य और तंज का भी इस्तेमाल किया गया, जैसे “एक कचौड़ी दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा” और “ठंडे समोसे गर्म करो, मर्द जात शर्म करो”। इन नारों के वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में हैं।

हालांकि, प्रदर्शन का मूल मुद्दा महिला सुरक्षा, सम्मान और समानता को लेकर है। छात्राओं का कहना है कि महिलाओं को सुरक्षित माहौल मिलना जरूरी है और अपराधों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।

कैंपस की सुरक्षा से लेकर सड़कों की रोशनी तक उठे सवाल

प्रदर्शन के दौरान DU की छात्राओं ने कैंपस में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट, हॉस्टल की सीमित उपलब्धता और सुरक्षित रहने की व्यवस्था जैसे मुद्दे भी उठाए। छात्राओं का कहना है कि बुनियादी सुविधाओं की कमी उनकी रोजमर्रा की सुरक्षा को प्रभावित करती है।

JNU की छात्राओं ने भी महिला सुरक्षा और समानता को लेकर अपनी बात रखी। वहीं, जामिया की छात्राओं ने दिल्ली की कई जगहों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं होने की समस्या का जिक्र किया। उनका कहना है कि रात के समय महिलाओं को अंधेरे और असुरक्षित माहौल के कारण अतिरिक्त सतर्क रहना पड़ता है।

पोस्टरों के जरिए भी जताया विरोध

प्रदर्शन में छात्राएं हाथों में अलग-अलग संदेश लिखे पोस्टर लेकर पहुंचीं। इन पोस्टरों में महिला की पहचान और स्वतंत्रता से जुड़े संदेशों के साथ समाज की सोच पर सवाल उठाए गए।

प्रदर्शन के वीडियो और नारों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी शेयर किया गया। इसके बाद Gen Z के विरोध के इस नए अंदाज को लेकर ऑनलाइन चर्चा शुरू हो गई।

सोशल मीडिया पर भी दिखा असर

प्रदर्शन से जुड़े कुछ वीडियो और पोस्ट को सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में व्यूज मिले। एक इंस्टाग्राम अकाउंट की ओर से आंदोलन के नारों पर शेयर किया गया एडिटेड वीडियो भी वायरल हुआ, जिसे रिपोर्ट के मुताबिक लाखों बार देखा गया।

इससे यह भी सामने आया कि आज छात्र आंदोलनों और सामाजिक मुद्दों की आवाज केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए तेजी से बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचती है।

आंकड़े बताते हैं कि महिला सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले लगातार गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2022 में देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 4,44,256 मामले दर्ज हुए। 2023 में यह संख्या बढ़कर 4,48,211 हो गई, जबकि 2024 में 4,41,534 मामले दर्ज किए गए।

2024 में देशभर में दुष्कर्म के 29,536 मामले दर्ज किए गए। महिलाओं के खिलाफ अपराध के कुल मामलों में एक बड़ा हिस्सा पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता से जुड़े मामलों का था।

ये आंकड़े बताते हैं कि महिला सुरक्षा का मुद्दा केवल किसी एक शहर या घटना तक सीमित नहीं है। सार्वजनिक स्थानों, परिवहन, कैंपस और घर के भीतर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

नारों से आगे सुरक्षा की मांग

दिल्ली की सड़कों पर छात्राओं के नए अंदाज वाले नारे भले ही चर्चा का विषय बन गए हों, लेकिन प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा महिला सुरक्षा और सम्मान है।छात्राओं की मांग है कि महिलाएं बिना डर के घर से बाहर निकल सकें, सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित महसूस करें और उन्हें अपनी सुरक्षा या स्वतंत्रता के लिए लगातार संघर्ष न करना पड़े।महिला सशक्तिकरण केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित नहीं है। इसका एक अहम हिस्सा ऐसा सुरक्षित माहौल तैयार करना भी है, जहां महिलाओं को अपनी सुरक्षा को लेकर हर कदम पर चिंता न करनी पड़े।