एक आशिक और 6 मददगार! जानिए कैसे एक इंस्पेक्टर ने गर्लफ्रेंड के लिए दांव पर लगा दिया MPSC का एग्जाम
महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) की ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। जांच में इस मामले में एक कथित प्रेम कहानी का एंगल भी सामने आया है। आरोप है कि एक पुलिस इंस्पेक्टर ने अपनी गर्लफ्रेंड को परीक्षा में पास कराने के लिए पेपर हासिल किया और उसे उपलब्ध कराया।
मामले में पुलिस ने तीन अधिकारियों समेत कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया है। पेपर लीक की शिकायतों और जांच के बाद MPSC ने ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-B) भर्ती परीक्षा को रद्द कर दिया है। आयोग ने कहा है कि परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी और इसकी नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी।
परीक्षा से पहले ही आरोपियों तक पहुंचा पेपर
यह मामला महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के तहत ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-B) पदों के लिए 22 मार्च 2026 को आयोजित ऑफलाइन स्क्रीनिंग परीक्षा से जुड़ा है।
पुलिस के मुताबिक, परीक्षा का प्रश्नपत्र बेहद गोपनीय प्रक्रिया के तहत तैयार किया गया था। आरोप है कि इसी दौरान कुछ लोगों ने गोपनीय प्रक्रिया का फायदा उठाकर परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र हासिल कर लिया। इसके बाद उसका एक अलग या डुप्लीकेट सेट तैयार कर कुछ उम्मीदवारों तक पहुंचाया गया।
जांच में परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता से जुड़े नियमों के उल्लंघन की भी बात सामने आई है। मामले में क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की और शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई।
22 मार्च को हुई थी परीक्षा
MPSC ने 22 मार्च 2026 को ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-B) पदों के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित की थी। इसके नतीजे 12 जून को जारी किए गए थे।
परीक्षा में कुल 506 उम्मीदवार शामिल हुए थे। इनमें से 488 उम्मीदवारों का 1 जुलाई से 22 जुलाई के बीच इंटरव्यू हुआ। इंटरव्यू के बाद 485 उम्मीदवारों को पात्र माना गया, जबकि तीन उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित किया गया।
हालांकि, बाद में कुछ उम्मीदवारों तक परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र या उसके सवाल पहुंचने की शिकायतें सामने आईं। इसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू हुई।
जांच में सामने आया प्रेम कहानी का एंगल
मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच में कथित पेपर लीक के पीछे प्रेम संबंध का एंगल सामने आया। पुलिस के अनुसार, मामले में गिरफ्तार गौरव पाटिल का ऋतुजा पाटिल के साथ प्रेम संबंध था।
आरोप है कि गौरव अपनी गर्लफ्रेंड को परीक्षा में सफल कराने के लिए प्रश्नपत्र हासिल करने की कोशिश में शामिल हुआ। कथित तौर पर ऋतुजा के अलावा कुछ अन्य उम्मीदवारों तक भी प्रश्नपत्र पहुंचाया गया।
जांच के मुताबिक, बाद में गौरव और ऋतुजा के रिश्ते में विवाद हुआ और दोनों का ब्रेकअप हो गया। इसके बाद गौरव ने कथित तौर पर MPSC को पेपर लीक होने की जानकारी दी। इसी जानकारी के आधार पर पुलिस और आयोग ने मामले की जांच आगे बढ़ाई।
पूछताछ के बाद सामने आया पूरा नेटवर्क
क्राइम ब्रांच ने गौरव पाटिल से पूछताछ की। उसके बयानों और जांच में मिले अन्य सबूतों के आधार पर पुलिस ने पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क की पड़ताल शुरू की।
इस मामले में ऋतुजा के पिता अमृत नामदेव पाटिल समेत अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा का पेपर आखिर किस स्तर से बाहर आया और इसे कितने उम्मीदवारों तक पहुंचाया गया।
साथ ही जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस पूरे मामले में और कितने लोग शामिल थे और पेपर लीक के बदले किसी तरह का आर्थिक लेन-देन हुआ था या नहीं।
तीन अधिकारियों समेत छह गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में MPSC से जुड़े तीन अधिकारियों समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में MPSC के असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर विश्वेश्वर दत्तात्रेय नकाते, गोपाल भट्टू मराठे और अंडर सेक्रेटरी अभिजीत गणपतराव लेंदवे शामिल हैं।
इसके अलावा नंदुरबार स्थित एक अकादमी के निदेशक प्रवीण दिलीप पाटिल और कथित साजिशकर्ताओं अमृत नामदेव पाटिल तथा लोकेश उर्फ गौरव राजेंद्र पाटिल को भी गिरफ्तार किया गया है।
सभी आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 2 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
MPSC ने रद्द की परीक्षा
पेपर लीक की शिकायतों और जांच में सामने आए तथ्यों के बाद MPSC ने ड्रग इंस्पेक्टर (ग्रुप-B) भर्ती परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया है।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी। जिन उम्मीदवारों ने पहले इस परीक्षा के लिए आवेदन किया था, उन्हें दोबारा आवेदन करने के लिए अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा।
नई परीक्षा की तारीख जल्द घोषित की जाएगी।
पारदर्शिता और सुरक्षा पर उठे सवाल
इस मामले ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर तब, जब आरोप है कि एक उम्मीदवार को फायदा पहुंचाने के लिए परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी बाहर पहुंचाई गई।
अब पुलिस की जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाने पर है कि प्रश्नपत्र सबसे पहले किसके पास पहुंचा, उसे किस तरह बाहर निकाला गया और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे।