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झारखंड में जेन-जी समर्थन की सरकार, उनकी सारी मांगे मान ली जाएंगी: इमरान मसूद

 

सहारनपुर, 9 अगस्त (आईएएनएस)। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने शनिवार को जेपीएससी और जेएसएससी छात्रों के विरोध-प्रदर्शन से लेकर परिसीमन, बेरोजगारी और पेपर लीक तक कई मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों को घेरा। उन्होंने कहा कि झारखंड में युवा समर्थक सरकार है और वहां छात्रों की मांगें जरूर मानी जाएंगी।

इमरान मसूद ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "जेपीएससी और जेएसएससी छात्रों का आंदोलन जायज है। झारखंड में जेन-जी के समर्थन की सरकार है, वहां उनकी सभी मांगें मान ली जाएंगी। छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' कार्यक्रम पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, "पीएम मोदी मन की बात पढ़ते नहीं, बल्कि सुनाते हैं।"

तमिलनाडु में परिसीमन को लेकर सीएम एमके स्टालिन द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में 57 में से 37 सांसदों के बहिष्कार पर इमरान मसूद ने चिंता जताई। उन्होंने कहा, "यह विषय तमिलनाडु के लिए बहुत गंभीर है। अगर परिसीमन होता है, तो निश्चित रूप से वहां का प्रतिनिधित्व घटेगा। दक्षिण के राज्यों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। केंद्र सरकार को इस पर सभी दलों से बात करके सर्वसम्मति बनानी चाहिए।"

राहुल गांधी के शिक्षा और बेरोजगारी वाले बयान का समर्थन करते हुए कांग्रेस सांसद ने कहा, "आज के समय में डिग्री का क्या मतलब रह गया है। नौकरियां मिलती नहीं हैं। 1000 में से 12 लोगों को नौकरी मिल पाती है। इस अनुपात पर ध्यान दीजिए कि कितना है। देश का उत्पादन लगातार घट रहा है और उत्पादन घटने के कारण नौकरियां घट रही हैं। सरकार नौकरी देने के झूठे दावे और आंकड़े पेश करती है। पेपर लीक की घटनाएं लगातार हो रही हैं। इतनी पेपर लीक होने के बाद इतनी बेशर्मी की हम गुमराह कर रहे हैं। सरकार को पेपरलीक की गंभीरता का अंदाजा नहीं है।"

शिरोमणि अकाली दल की महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग पर इमरान मसूद ने कहा, "हम भी चाहते हैं कि महिला आरक्षण लागू हो। यह बिल पास हो चुका है और कानून बन चुका है। ऐसे में इसे जल्द से जल्द लागू करना चाहिए। महिलाओं को राजनीति और समाज में बराबर का हक मिलना चाहिए।"

पश्चिम बंगाल में भाजपा के कई पदाधिकारियों को निष्कासित करने और कारण बताओ नोटिस देने पर उन्होंने कहा, "बंगाल के अंदर अब जंगलराज है।"

महाराष्ट्र में दूध के दाम में 2 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी पर भी उन्होंने सवाल उठाए और कहा, "यह हमारा दुर्भाग्य है। एक आंकड़ा मैं देख रहा था कि हमारे यहां 67 करोड़ लीटर दूध की खपत है और प्रोडक्शन 14 करोड़ लीटर है। ऐसे में यह गैप कहां से पूरा होगा। जब उत्पादन ही नहीं है, तो क्या हम जहर पी रहे हैं? यह बहुत ही चिंता का विषय है। सरकार को डेयरी किसानों को बढ़ावा देना चाहिए, न कि उपभोक्ताओं पर बोझ डालना चाहिए।"

--आईएएनएस

एससीएच/पीएम