'हर घर तिरंगा' अभियान से जीविका दीदी लाभान्वित, समस्तीपुर में तैयार होंगे 80 हजार से अधिक तिरंगे
समस्तीपुर, 11 अगस्त (आईएएनएस)। 'वंदे मातरम' गीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में चलाए जा रहे 'हर घर तिरंगा' अभियान ने बिहार के समस्तीपुर जिले की जीविका दीदियों के लिए रोजगार का बड़ा अवसर पैदा किया है। अभियान के तहत समस्तीपुर में सरकारी विभागों, औद्योगिक संस्थानों, सामुदायिक संगठनों और आम नागरिकों की ओर से जीविका दीदियों को 80 हजार से अधिक तिरंगे झंडों के ऑर्डर मिले हैं। इन ऑर्डरों को समय पर पूरा करने के लिए जिले के सभी प्रखंडों में संचालित सिलाई केंद्रों के साथ-साथ बड़ी संख्या में जीविका दीदियां अपने घरों से भी तिरंगे तैयार करने में जुटी हैं।
आम लोगों के लिए इसकी सुलभ कीमत को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक झंडे की कीमत 25 रुपए निर्धारित की गई है। बड़ी संख्या में मिले ऑर्डर को पूरा करने के लिए जिले में 1600 से अधिक जीविका दीदियां दिन-रात सिलाई का काम कर रही हैं। जिले के सभी प्रखंडों में जीविका समूहों को करीब चार-चार हजार तिरंगे तैयार करने का ऑर्डर दिया गया है, ताकि अधिक से अधिक घरों तक राष्ट्रीय ध्वज पहुंचाया जा सके और अभियान को व्यापक बनाया जा सके।
समस्तीपुर के परियोजना प्रबंधक जीविका धनंजय कुमार ने बताया कि हर घर तिरंगा अभियान के लिए भारत सरकार की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं। जिला पदाधिकारी के निर्देश के अनुसार जिले के प्रत्येक प्रखंड को तिरंगा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है। अब तक 10 हजार से अधिक तिरंगे जिला कार्यालय और विभिन्न प्रखंडों में भेजे जा चुके हैं, जबकि कई हजार झंडे तैयार अवस्था में हैं। एक केंद्र पर करीब चार हजार तिरंगे तैयार हैं, जिन्हें उजियारपुर प्रखंड के लिए भेजा जाएगा। जरूरत के अनुसार अन्य प्रखंडों में भी यहां से तिरंगे भेजे जाएंगे। यह अभियान जीविका दीदियों के लिए रोजगार का एक बड़ा माध्यम बनकर सामने आया है।
उन्होंने आगे कहा कि जीविका यानी बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति का मूल उद्देश्य ही ग्रामीण महिलाओं को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। उनका प्रयास है कि हर जीविका दीदी किसी न किसी रोजगार से जुड़े और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में योगदान दे।
जीविका महिला संकुल संघ की इंचार्ज नीतू कुमारी ने बताया कि उनके केंद्र पर करीब 50 दीदियां तिरंगा बनाने के काम में लगी हैं। ब्लॉक स्तर से करीब 20 से 25 हजार रुपए के ऑर्डर मिले हैं, जिनमें से करीब 10 हजार रुपए तक का काम पूरा किया जा चुका है। आगे जितने भी ऑर्डर प्राप्त होंगे, उन्हें भी पूरा किया जाएगा। कुछ महिलाएं सिलाई केंद्र पर आकर काम कर रही हैं, जबकि जिनके पास अपनी सिलाई मशीन है, वे तिरंगा बनाने का काम अपने घर से कर रही हैं। महिलाओं को इसके लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रशिक्षण के बाद उन्हें तिरंगा तैयार करने का काम सौंपा गया है।
तिरंगा बनाने में जुटीं जीविका दीदी बबीता कुमारी ने बताया कि उनके केंद्र पर नाइटी, आंगनबाड़ी ड्रेस, मास्क, पेटीकोट, सूट-सलवार समेत कई तरह के कपड़े तैयार किए जाते हैं। फिलहाल, तिरंगा बनाने का काम प्राथमिकता से किया जा रहा है। कोरोना काल के दौरान भी जीविका दीदियों ने मास्क तैयार किए थे। अब तिरंगा बनाने का अवसर मिला है। केंद्र पर करीब 20 महिलाएं काम करती हैं, जबकि अन्य महिलाएं अपने घर से सिलाई का काम पूरा करती हैं। घर पर तैयार किए गए तिरंगे बाद में केंद्र पर जमा किए जाते हैं।
--आईएएनएस
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