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8 अक्टूबर का पंचांग: प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व, जानें पूजा मुहूर्त

 

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित है।

8 अक्टूबर 2026, गुरुवार का दिन धार्मिक दृष्टि से खास रहने वाला है। इस दिन आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है और प्रदोष व्रत भी रखा जाएगा। भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल को बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस समय श्रद्धा से भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पंचांग के अनुसार, इस दिन कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि रात 10:16 बजे तक रहेगी। गुरुवार होने की वजह से यह दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति की पूजा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। नक्षत्र की बात करें तो पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र 9 अक्टूबर की सुबह 6:32 बजे तक रहेगा। वहीं वरियान योग रात 3:41 बजे तक रहेगा और कौलव करण सुबह 8:46 बजे तक रहेगा।

प्रदोष व्रत में शाम के समय भगवान शिव की पूजा करने का विशेष महत्व है। इस दिन प्रदोष काल शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक रहेगा। इस दौरान भगवान शिव का अभिषेक, पूजन और दीप प्रज्वलित करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और फूल अर्पित कर सकते हैं।

8 अक्टूबर को अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। वहीं राहुकाल दोपहर 1:29 बजे से 2:55 बजे तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 9:03 बजे से 10:29 बजे तक और यमगंड काल सुबह 6:17 बजे से 7:43 बजे तक रहेगा।

दिन की शुरुआत सुबह 6:19 बजे सूर्योदय से होगी, जबकि सूर्यास्त शाम 5:47 बजे होगा। चंद्रोदय 9 अक्टूबर की सुबह 2:48 बजे और चंद्रास्त शाम 4:28 बजे होगा।

पंचांग के अनुसार, गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। इसलिए मान्यता के अनुसार इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए। अगर यात्रा करना जरूरी हो, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उचित उपाय करके यात्रा शुरू की जा सकती है।

--आईएएनएस

पीआईएम/एएस