भारत की अर्थव्यवस्था में क्रांति लाने वाली मोदी सरकार की 6 बड़ी योजनाएं, जिन्होंने बदली आम जनता की तस्वीर
बुधवार, 10 जून 2026, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। आज उन्होंने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है: लगातार 4,399 दिनों तक पद पर बने रहकर, वे भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले चुने हुए प्रधानमंत्री बन गए हैं। इससे पहले, यह रिकॉर्ड देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नाम था, जिन्होंने लगातार 4,398 दिनों तक सेवा की थी। यह उपलब्धि ऐसे समय में मिली है जब नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) सरकार सत्ता में 12 साल पूरे कर रही है। इन 12 वर्षों के दौरान, BJP के नेतृत्व वाली सरकार ने कई दूरगामी आर्थिक योजनाएं शुरू कीं, जिन्होंने देश की अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन को एक नई दिशा दी है। आइए, इनमें से कुछ प्रमुख योजनाओं पर एक नज़र डालते हैं।
प्रधानमंत्री जन धन योजना
प्रधानमंत्री मोदी ने 15 अगस्त 2014 को लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री जन धन योजना की घोषणा की थी और यह योजना 28 अगस्त 2014 को शुरू की गई थी। यह एक राष्ट्रीय मिशन है जिसका उद्देश्य देश के हर घर तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाना है। इस योजना के तहत, बुनियादी बचत खाते, ज़रूरत-आधारित क्रेडिट, फंड ट्रांसफर की सुविधा, बीमा और पेंशन जैसी वित्तीय सेवाओं तक पहुंच सुनिश्चित की गई। निवेश, इनोवेशन और कौशल विकास को बढ़ावा देने और विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए 'मेक इन इंडिया' पहल शुरू की गई, जिससे कंपनियों को भारत में उत्पादों के निर्माण के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। यह योजना चार स्तंभों पर आधारित है: नई प्रक्रियाएं, नया इंफ्रास्ट्रक्चर, नए सेक्टर और नई सोच। 'नई प्रक्रियाओं' के तहत, बिजनेस लाइफसाइकिल को आसान बनाने के लिए लाइसेंसिंग और नियमों में ढील दी गई। 'नए इंफ्रास्ट्रक्चर' में अत्याधुनिक तकनीक से लैस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और स्मार्ट सिटी विकसित करने की योजनाएं शामिल थीं। 'नए सेक्टर' के तहत मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्विस सेक्टर के 25 सेक्टर की पहचान की गई। वहीं, 'नई सोच' के माध्यम से सरकार ने इंडस्ट्रियल सेक्टर के सहयोग से आर्थिक विकास में तेज़ी लाने का वादा किया।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना 8 अप्रैल 2015 को शुरू की गई थी। इस योजना के तहत, गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि गतिविधियों में लगे छोटे व्यवसायों को बिना किसी गारंटी (कोलेटरल) के ₹20 लाख तक का लोन दिया जाता है। कमर्शियल बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, MFI और NBFC इस स्कीम के तहत लोन देते हैं। अब तक इस स्कीम के तहत लगभग 3.97 करोड़ लोन मंज़ूर किए जा चुके हैं, जिनकी कुल राशि ₹1.80 लाख करोड़ से ज़्यादा है। भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मज़बूत करने के लिए 2020 में प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम शुरू की गई थी। इस स्कीम के तहत, योग्य कंपनियों को उनकी बढ़ी हुई बिक्री के आधार पर इंसेंटिव मिलते हैं। शुरू में यह स्कीम तीन सेक्टर के लिए बनाई गई थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर 14 सेक्टर कर दिया गया है। ₹1.97 लाख करोड़ के इंसेंटिव पैकेज के साथ, यह सिर्फ़ एक फाइनेंशियल पैकेज नहीं, बल्कि औद्योगिक आत्मनिर्भरता के लिए एक व्यापक रणनीति है। अब तक 14 रणनीतिक सेक्टर में 806 आवेदन मंज़ूर किए जा चुके हैं, जो इंडस्ट्री के भरोसे और स्कीम की सफलता को दिखाते हैं। इनमें मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, व्हाइट गुड्स और स्पेशलिटी स्टील जैसे अहम सेक्टर शामिल हैं।
इंडिया AI मिशन
इंडिया AI मिशन का मकसद कंप्यूटिंग पावर तक पहुँच बढ़ाना, रिसर्च को सपोर्ट करना और स्टार्टअप्स व संस्थानों को जनहित के लिए समाधान विकसित करने में मदद करना है। यह मिशन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को सभी के लिए ओपन, किफायती और सुलभ बनाने के विज़न पर काम करता है।
AI के बढ़ते इस्तेमाल से पानी की कमी बढ़ सकती है
शुरुआत से ही, इस मिशन ने देश के कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में ज़बरदस्त प्रगति की है। जहाँ शुरुआती लक्ष्य 10,000 ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) का था, वहीं भारत ने अब 38,000 GPU हासिल कर लिए हैं, जिससे विश्व-स्तरीय AI संसाधनों तक किफायती पहुँच संभव हो गई है।
उज्ज्वला योजना
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना मई 2016 में शुरू की गई थी, जिसके तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को बिना किसी सिक्योरिटी डिपॉज़िट के LPG कनेक्शन दिए गए। शुरू में लाभार्थियों को हर साल 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर मिलते थे; बाद में यह संख्या घटाकर नौ और फिर चार कर दी गई, लेकिन प्रति सिलेंडर ₹300 तक की सब्सिडी जारी रही।