50 से ज्यादा आर्मी सेंटर्स में होगी 'ओम का हरि' की स्पेशल स्क्रीनिंग, 15 शहरों का दौरा करेंगे अंशुमान झा
मुंबई, 28 सितंबर (आईएएनएस)। निर्देशक हरीश व्यास की पारिवारिक ड्रामा फिल्म 'ओम का हरि' की 50 से ज्यादा आर्मी सेंटर में स्पेशल स्क्रीनिंग होने वाली है। फिल्म के प्रोड्यूसर अंशुमन झा ने फिल्म को दर्शकों से जुड़ने का एक सरल तरीका बताया है।
अंशुमान सोमवार से 15 शहरों का दौरा करेंगे, जिनमें दिल्ली, कोलकाता, लखनऊ, आगरा, जयपुर, बेंगलुरु और पटना शामिल हैं, जहां वह फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग करेंगे। अंशुमान झा ने कहा, "यह ऑडियंस से जुड़ने का पुराना तरीका है, न कि सिर्फ उन्हें फिल्म बेचना। मैं कनेक्ट करने के लिए फिल्में बनाता हूं और मेरी कोशिश कभी भी ट्रांजैक्शनल नहीं रही है; यह हमेशा इमोशनल रही है।"
अंशुमान झा ने कहा, "यह दर्शकों से जुड़ने का पुराना तरीका है। मैं फिल्में जुड़ने के लिए बनाता हूं, मेरा मकसद कभी भी सिर्फ पैसा कमाना नहीं रहा बल्कि एक इमोशनल कनेक्शन बनाना रहा है। इसलिए मैं अपने दर्शकों तक पहुंचने के लिए और ज्यादा मेहनत करना चाहता हूं और दूर तक जाने के लिए भी तैयार हूं। चार्ली चैपलिन अपनी फिल्मों को लेकर एक शहर से दूसरे शहर जाया करते थे। मैं 'ओम का हरि' के साथ वही करना चाहता हूं। मैं दर्शकों के साथ बैठकर फिल्म देखना चाहता हूं, सुनना चाहता हूं कि वो क्या महसूस करते हैं और उनके साथ बातचीत करना चाहता हूं।"
अंशुमान झा का मानना है कि फिल्म को लेकर दर्शकों का प्यार सच्चा है और वो इसे और ज्यादा से ज्यादा लोगों तक ले जाने के लिए एक कदम और आगे बढ़ाना चाहता हैं और उम्मीद करते हैं कि फिल्म से जुड़े संदेश को लोगों तक पहुंचा सकें।
देशभर में 50 से ज्यादा आर्मी सेंटर्स में स्क्रीनिंग के साथ, 'ओम का हरि' को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने में दूसरा हफ्ता हो गया है और लोगों के बीच इसकी चर्चा लगातार बढ़ रही है। आर्मी सेंटर्स में होने वाली स्क्रीनिंग से देशभर में हजारों दर्शकों तक फिल्म पहुंचेगी, 50 से ज्यादा सेंटर्स में इसके शो दिखाए जाएंगे।
'ओम का हरि' पिता-बेटे के रिश्ते की उलझनों को कॉमेडी और ड्रामा के जरिए दिखाती है, उन बातों के साथ जो परिवार अक्सर एक-दूसरे से कह नहीं पाते। हरीश व्यास के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अंशुमान झा और रघुबीर यादव ने ओम और हरि के मुख्य किरदार निभाए हैं।
यह फिल्म एक जिद्दी पिता और उसके आजाद ख्यालों वाले बेटे की कहानी है, जिनका रिश्ता पीढ़ियों के फर्क, असहमति और गहरी उम्मीदों से बनता है। जब हरि को लगता है कि उसके पास जीने के लिए बस कुछ ही दिन बचे हैं, तो वह ओम के साथ वाराणसी जाने का फैसला करता है।
--आईएएनएस
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