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रोज 5 मिनट करें अर्ध तितली आसन, कूल्हे-पेल्विक में बढ़ेगा ब्लड फ्लो, मिलेंगे ये फायदे

 

नई दिल्ली, 5 नवंबर (आईएएनएस)। योग में ऐसे कई आसन हैं, जो शरीर को अंदर से मजबूत और मन को शांत करते हैं। इन्हीं में से एक है- 'अर्ध तितली आसन'। यह आसन खासतौर पर कूल्हों, जांघों और पीठ के निचले हिस्से को खोलने और लचीला बनाने के लिए किया जाता है।

अर्ध तितली आसन एक आसान और शुरुआती स्तर का योगासन है, जिसे अंग्रेजी में 'हाफ बटरफ्लाई पोज' कहा जाता है। इसमें एक पैर सीधा रखा जाता है जबकि दूसरे पैर को मोड़कर तितली के पंख की तरह चलाया जाता है। यह शरीर की जकड़न को दूर करता है, पाचन को बेहतर बनाता है और मन को शांति देता है।

आयुष मंत्रालय के अनुसार, अर्ध तितली आसन एक सरल और प्रभावी बैठने वाला योगासन है। यह पेट के अंगों को उत्तेजित कर पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है।

जो लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, उनके लिए यह आसन किसी वरदान से कम नहीं है। यह शरीर की जकड़न को दूर करता है, पाचन को बेहतर बनाता है और मन को शांति देता है।

अर्ध तितली आसन का अभ्यास करने से कूल्हों और पेल्विक क्षेत्र में रक्त का प्रवाह तेज होता है। दरअसल, जब हम 'अर्ध तितली आसन' में बैठते हैं, तो एक पैर मुड़ा हुआ और दूसरा पैर सामने फैला हुआ होता है। इस स्थिति में कूल्हों के जोड़ पर हल्का खिंचाव पड़ता है। यह खिंचाव वहां जमा हुई जकड़न को खोलता है।

लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने से कूल्हों और पेल्विक एरिया की मांसपेशियां टाइट हो जाती हैं, जिससे वहां खून का प्रवाह धीमा पड़ जाता है। अर्ध तितली आसन इस टाइटनेस को धीरे-धीरे दूर करता है। आसन में बैठने से पेल्विक क्षेत्र की नसों और मांसपेशियों पर हल्का दबाव पड़ता है और छोड़ने पर वहां ताजा ऑक्सीजन युक्त खून तेजी से पहुंचता है।

किसी भी व्यक्ति के घुटनों, टखनों या कूल्हों में गंभीर चोट या दर्द है, तो इस आसन को करने से बचें। अभ्यास के दौरान शरीर पर ज्यादा जबरदस्ती या झटका न दें।

--आईएएनएस

एनएस/पीएम