42 पूर्व जजों के पत्र का एनडीए नेताओं ने किया समर्थन, कहा- विपक्ष का रवैया लोकतंत्र के लिए खतरनाक
पटना, 9 अक्टूबर (आईएएनएस)। देश के 42 पूर्व न्यायाधीशों द्वारा खुला पत्र लिखकर चुनाव आयोग को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ चेतावनी को लेकर एनडीए नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है। भाजपा और जदयू ने इसे लोकतंत्र को बचाने की एक जरूरी चेतावनी बताया है। साथ ही विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, "कांग्रेस और विपक्ष जिस तरह से संवैधानिक संस्थाओं का मजाक उड़ा रहे हैं, वह एक पैटर्न बन गया है। अगर फैसला उनके पक्ष में जाता है, तो यह लोकतंत्र की जीत है। अगर यह उनके खिलाफ जाता है, तो वे संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने लगते हैं। पूरा देश विपक्ष और कांग्रेस के गलत व्यवहार को देख रहा है। इसी कारण 42 पूर्व जजों ने कांग्रेस और विपक्ष द्वारा चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के लिए चलाए जा रहे अभियान के खिलाफ चेतावनी देते हुए एक खुला पत्र लिखा है।"
सरावगी ने कहा कि यह पत्र बताता है कि देश के प्रबुद्ध लोग विपक्ष के इस रवैये से चिंतित हैं और इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक मानते हैं।
वहीं, बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ने भी पूर्व जजों के पत्र का समर्थन किया। उन्होंने कहा, "पूर्व जजों ने अपने पत्र में अच्छी भावना व्यक्त की है। चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए जा रहे सवाल संवैधानिक व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश का हिस्सा हैं। ये अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ, वकील और जानकार लोग हैं। जज जानकार लोग होते हैं और उनकी भावना बिल्कुल सही है।"
राम कृपाल यादव ने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा, "विपक्ष अराजकता की स्थिति पैदा करना चाहता है। हर कोई उनकी हरकतों से डरा हुआ है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।" उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग जैसी स्वतंत्र संस्था पर सवाल उठाना देश की संवैधानिक व्यवस्था पर हमला है।
जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने भी इस पत्र को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, "बड़ी संख्या में रिटायर्ड जजों ने इस तरह से प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी नेताओं को यह समझना चाहिए कि जनता और देश के बुद्धिजीवी संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाकर भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने की उनकी कोशिशों को देख रहे हैं।"
राजीव रंजन ने आगे कहा, "निस्संदेह, लोकतंत्र में विश्वास रखने वालों का इंडिया ब्लॉक और उसके नेताओं से भरोसा धीरे-धीरे कम हो रहा है।"
--आईएएनएस
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