30 रुपए में बिकने वाली शराब में खुलेआम मेथेनॉल मिलाया गया, तब प्रशासन क्या कर रहा था : वारिस पठान
मुंबई, 30 मई (आईएएनएस)। एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता और वरिष्ठ नेता वारिस पठान ने पुणे में जहरीली और मिलावटी शराब पीने से हुई मौतों के मामले को लेकर महाराष्ट्र सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों में भले ही 14 लोगों की मौत बताई जा रही हो, लेकिन जमीनी रिपोर्ट्स के अनुसार मृतकों की संख्या इससे कहीं अधिक है। एआईएमआईएम प्रवक्ता ने इस पूरे मामले को प्रशासनिक विफलता करार देते हुए जिम्मेदार अधिकारियों और शराब माफिया के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
वारिस पठान ने आईएएनएस से कहा कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने भी खुलासा किया है कि सस्ती मिलावटी शराब में मेथेनॉल मिलाए जाने के कारण लोगों की मौत हुई। यह बेहद दुखद है कि कुछ रुपए बचाने के लिए लोग ऐसी जहरीली शराब पीने को मजबूर हो जाते हैं और अपनी जान गंवा बैठते हैं। इस्लाम में शराब को हराम घोषित किया गया है, लेकिन इसके बावजूद इस तरह की घटनाएं समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब 30 रुपए में बिकने वाली शराब में खुलेआम मेथेनॉल मिलाया जा रहा था, तो प्रशासन क्या कर रहा था। इन मौतों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी प्रशासन की है, जिसने ऐसे खतरनाक पदार्थों की बिक्री पर प्रभावी रोक नहीं लगाई। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर मौजूद शराब माफिया, कुछ प्रभावशाली लोग और भ्रष्ट तंत्र मिलकर इस अवैध कारोबार को बढ़ावा देते हैं।
वारिस पठान ने कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों से समय-समय पर जहरीली शराब से मौतों की खबरें आती रहती हैं, लेकिन सरकारें केवल घटना के बाद दुख जताती हैं। उन्होंने सवाल किया कि सरकार पहले से रोकथाम के उपाय क्यों नहीं करती। महाराष्ट्र के कई इलाकों में इस तरह की अवैध शराब बिक रही है और सरकार को पहले से निगरानी बढ़ाकर कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि इस मामले में 6,000 किलोग्राम मेथेनॉल जब्त किया गया है, संबंधित कंपनी को सील कर दिया गया है और कंपनी के मालिक को नोटिस जारी करने के साथ उसका लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया है, लेकिन उन्होंने पूछा कि ऐसी और कितनी कंपनियां होंगी जो इसी तरह का काम कर रही हैं। हादसा होने के बाद कार्रवाई करने के बजाय सरकार को पहले ही ऐसे नेटवर्क पर शिकंजा कसना चाहिए।
वारिस पठान ने कहा कि कुछ भ्रष्ट अधिकारी अवैध कारोबारियों से वसूली करते हैं और इसी वजह से जहरीले उत्पाद खुलेआम बाजार में पहुंच जाते हैं। उन्होंने मांग की कि ऐसी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर जिम्मेदार लोगों को जेल भेजा जाए।
इस दौरान वारिस पठान ने केरल में 'वंदे मातरम' को लेकर उठे विवाद पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि 'वंदे मातरम' का सम्मान सभी करते हैं और जिसे पढ़ना है वह अवश्य पढ़े, लेकिन किसी को इसे पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को धर्म का पालन करने और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है।
वारिस पठान ने कहा कि 'वंदे मातरम' में कुछ ऐसे शब्द हैं, जिन्हें इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार एक मुसलमान नहीं बोल सकता, इसलिए इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान 'जन गण मन' को मुसलमान पूरे सम्मान और गर्व के साथ गाते हैं। 'वंदे मातरम' बोलने के लिए किसी के ऊपर दबाव नहीं डालना चाहिए।
एआईएमआईएम प्रवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के बिजॉय इमैन्युअल बनाम केरल राज्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालत भी स्पष्ट कर चुकी है कि किसी को 'वंदे मातरम' गाने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि लोगों को राष्ट्रवाद के प्रमाणपत्र बांटने के बजाय संविधान की भावना का सम्मान करना चाहिए।
इसके अलावा वारिस पठान ने हलाल सर्टिफिकेशन और उत्पादों के बहिष्कार की मांगों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हर मुद्दे पर बहिष्कार की राजनीति उचित नहीं है। यदि किसी उत्पाद को हलाल प्रमाणन मिला है तो उससे किसी को नुकसान नहीं होता।
--आईएएनएस
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