28 जून का पंचांग: पितृ कार्य और मोक्ष प्राप्ति के लिए उत्तम मानी जाती है चतुर्दशी तिथि, दोपहर 3:15 से 5:02 बजे तक अमृत काल
नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में पंचांग का काफी महत्व होता है। कोई शुभ काम, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ करने से पहले पंचांग जरूर देखा जाता है। पंचांग हिंदू काल-गणना पद्धति है; यह सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित होता है।
28 जून 2026 (रविवार) को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष चतुर्दशी तिथि है, जो रात 3:06 बजे तक रहेगी। चतुर्दशी तिथि पर पितृ कार्य और मोक्ष प्राप्ति के लिए उत्तम माना जाता है। इसके बाद पूर्णिमा लग जाएगा। शाम 05:34 बजे से शाम 07:10 बजे तक अमृत काल रहेगा और सुबह 4:11 से 4:59 बजे तक ब्रह्म मुहूर्त रहेगा।
इस दिन सुबह 5:47 बजे सूर्योदय और शाम 7:12 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, शाम 6:11 बजे चन्द्रोदय और सुबह 4:47 बजे चन्द्रास्त होगा। पंचांग के अनुसार 27 जून 2026 को सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में स्थित रहेगा, जिसके स्वामी राहु हैं। चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में गोचर करेगा, जो दोपहर तक इसी नक्षत्र में रहेगा और उसके बाद मूल नक्षत्र में प्रवेश करेगा।
वहीं, 27 जून 2026 (शनिवार) को हर्षण योग नहीं, बल्कि साध्य योग प्रभावी रहेगा। इस दिन 'शुभ' योग प्रभावी रहेगा, जो रात 12:59 बजे तक चलेगा और इसके बाद 'शुक्ल' योग शुरू हो जाएगा। वैदिक पंचांग के अनुसार 27 जून 2026 को कोई वज्र योग नहीं है।
कोई भी महत्वपूर्ण कार्य अभिजित मुहूर्त में दोपहर 11:56 से 12:52 बजे तक करने से काफी शुभ रहेगा। यह दिन के मध्य का सबसे शुभ और शक्तिशाली समय माना जाता है, जिसमें किसी भी नए कार्य की शुरुआत, पूजा-पाठ या महत्वपूर्ण निर्णय लेना अत्यंत फलदायी होता है।
वहीं, राहुकाल शाम 5:38 बजे से शाम 7:22 बजे तक रहेगा, गुलिक काल दोपहर 3:53 से 05:38 बजे तक और यमघण्टकाल दोपहर 12:30 से 2:10 तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन समयों में नए कार्य शुरू करने से बचना चाहिए क्योंकि इनको अशुभ समय माना जाता है।
वहीं, इस दिन सूर्य मिथुन राशि में और चंद्रमा वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे। साथ ही, 28 जून 2026 (रविवार) को पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिष और वास्तु के मुताबिक इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। अगर यात्रा करना आवश्यक भी है तो कुछ अचूक ज्योतिषीय उपायों का पालन करना चाहिए।
--आईएएनएस
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