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200 चांदी की ईंटों के दान विवाद पर अयोध्या के सिंधी समाज ने रखी बात, बोले-'समुदाय को बदनाम करने की कोशिश न हो'

 

अयोध्या, 12 जुलाई (आईएएनएस)। राम मंदिर निर्माण से जुड़े 200 चांदी की ईंटों के दान मामले को लेकर अयोध्या के सिंधी समुदाय के लोगों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी प्रतिक्रिया दी। समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि यह दान श्रद्धा और आस्था से जुड़ा विषय था और इसे लेकर पूरे सिंधी समाज को बदनाम नहीं किया जाना चाहिए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम नगर सिंधी समाज के नरेश क्षेत्रपाल, समाजसेवी संदीप मंध्यान और सुमित मखीजा ने इस मामले पर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि विश्व सिंधी सेवा संगम नामक संगठन, जिसके प्रमुख राजू मनवानी हैं, ने सिंधी समुदाय के लोगों से 200 चांदी की ईंटें एकत्रित की थीं और उन्हें राम मंदिर निर्माण के दौरान दान किया गया था।

सुमित मखीजा ने कहा कि संगठन द्वारा एकत्रित की गई चांदी की ईंटें श्रद्धा भाव से मंदिर निर्माण के लिए दी गई थीं। उन्होंने कहा कि बाद में मंदिर से जुड़े कुछ घटनाक्रमों को लेकर संगठन के एक व्यक्ति ने अपनी निजी राय रखी, लेकिन उसे पूरे सिंधी समुदाय की भावना से जोड़ना उचित नहीं है।

राम नगर सिंधी समाज के सदस्य नरेश क्षेत्रपाल ने कहा कि कुछ तथाकथित सदस्यों द्वारा दान को लेकर सवाल उठाए जाने से समाज की छवि प्रभावित हुई है। भारतीय परंपरा में दान को गुप्त और निस्वार्थ भावना से किया जाता है। किसी धार्मिक कार्य में श्रद्धा से दिए गए दान को विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।

नरेश क्षेत्रपाल ने आरोप लगाया कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट से दान का हिसाब मांगने के नाम पर कुछ लोगों ने सिंधी समाज को बदनाम करने का प्रयास किया। समाज हमेशा धार्मिक और सामाजिक कार्यों में योगदान देता रहा है और इस तरह के मामलों को राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए।

समाजसेवी संदीप मंध्यान ने कहा कि 200 चांदी की ईंटों का दान आस्था और समर्पण का प्रतीक था। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की, जबकि यह पूरी तरह धार्मिक भावना से जुड़ा कार्य था। दान देने के बाद उसका हिसाब मांगना सिंधी समाज की परंपराओं और संस्कारों का हिस्सा नहीं है।

संदीप मंध्यान ने कहा कि कुछ लोगों ने अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण इस विषय पर आरोप लगाए, लेकिन वे आरोप सफल नहीं हुए। उन्होंने अपील की कि धार्मिक और सामाजिक कार्यों को विवादों से दूर रखा जाए और समाज की एकता बनाए रखी जाए।

--आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी