12 सालों में रक्षा क्षेत्र में निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ा भारत : राजनाथ सिंह
नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को दिल्ली में आयोजित 'फोर्सेस फर्स्ट कॉन्क्लेव' में कहा कि सीमाओं पर तैनात हमारे जवान, समुद्र की अथाह गहराइयों में राष्ट्र की सुरक्षा में जुटे हमारे नौसैनिक और आकाश की ऊंचाइयों पर देश की रक्षा करने वाले हमारे वायु योद्धा, ये सभी हमारे राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि जो देश अपने सैनिकों का सम्मान करना नहीं जानता, उसका भविष्य कभी सुरक्षित नहीं हो सकता।
राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार पिछले बारह वर्षों से काम कर रही है। भारत में जब से प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार आई है, उसके बाद से ही हमने 'राष्ट्र सर्वोपरि' और 'सेना सर्वोपरि' के भाव के साथ डिफेंस सेक्टर के पुनरुद्धार और उसकी मजबूती को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक बनाया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबसे पहले हमने डिफेंस से जुड़े पुराने माइंडसेट को बदला। हमारी सरकार ने तय किया कि भारत अपनी रक्षा तैयारी को न सिर्फ मजबूत करेगा बल्कि डिफेंस की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत आयात पर अपनी निर्भरता कम करेगा।
रक्षा मंत्री ने कहा कि देश में एक ऐसा रक्षा औद्योगिक परिसर भी तैयार करेगा, जो केवल भारत की जरूरतों को नहीं बल्कि दुनिया में भारत से रक्षा निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूत करेगा। इस नजरिए से हमने डिफेंस सेक्टर पर काम किया है। उन्होंने कहा, "रक्षा क्षेत्र में भारत को मजबूत बनाने की दिशा में हमने जो सबसे बड़ा काम किया है, वह डिफेंस इंडस्ट्रियल सेक्टर में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का है।"
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में भारत को सशक्त बनाने का जो हमारा नजरिया है, वह भारत की क्षमता पर विश्वास करने का है। लेकिन पुरानी सरकारों का जो नजरिया था, वह कहीं न कहीं भारत की क्षमता और काबिलियत को लेकर संदेहास्पद था। वह भारत की क्षमता पर शायद उतना विश्वास नहीं करते थे, जितना हमारी सरकार करती है।
उन्होंने कहा कि अगर किसी देश की सुरक्षा के लिए आवश्यक हथियार, गोला-बारूद, नेवीगेशन सिस्टम, मिसाइलें, रडार, ड्रोन और युद्ध से जुड़ी अन्य आवश्यकताओं के लिए दूसरे देशों पर निर्भर हों, तो उसकी रणनीतिक और सैन्य स्वायत्तता भी सीमित हो जाती है। हम इसको पूरी तरह बदलने की नीयत से काम कर रहे हैं। यही कारण है कि पिछले बारह वर्षों में भारत ने रक्षा क्षेत्र में केवल आधुनिकीकरण नहीं किया, बल्कि एक बड़े परिवर्तन की शुरुआत की है। यह परिवर्तन निर्भरता से आत्मनिर्भरता की ओर, और उपभोक्ता से उत्पादक बनने की यात्रा से जुड़ा हुआ है।
--आईएएनएस
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