जब 100 प्रतिशत कानून का क्रियान्वयन और जागरूकता होगी तभी नशे के खिलाफ लड़ सकते हैं: समीर वानखेड़े
मुंबई, 25 अप्रैल (आईएएनएस)। मुंबई में आयोजित एक हिंदू सम्मेलन कार्यक्रम में पहुंचे आईआरएस अधिकारी समीर वानखेड़े ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह एक बहुत ही अच्छा कार्यक्रम है। मेरा मुख्य फोकस नशामुक्ति की पहलों पर रहा है। जब समाज ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर एकजुट होता है तो सामूहिक प्रयासों के साथ-साथ कानून का प्रभावी क्रियान्वयन भी सार्थक बदलाव ला सकता है।
समीर वानखेड़े ने कहा कि मैंने भी हिंदू समाज से निवेदन किया है। जो लोग और धर्म गुरु आए थे, उन सबसे निवेदन किया है कि धार्मिक ग्रंथों के माध्यम से लोगों को समझाएं, क्योंकि नशामुक्ति बौद्ध धर्म और हिंदू धर्म में भी है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज के पक्ष में आया हूं। अगर लोग साथ में आ गए तो हम इसे रोक सकते हैं। 100 प्रतिशत कानून का क्रियान्वयन और जागरूकता, ये दोनों साथ में आ जाएं तो हम नशे के खिलाफ लड़ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारे राष्ट्र में हिंदू समाज बहुत बड़ा है। अगर ड्रग्स के खिलाफ जागरूकता आ जाए तो ये जो ड्रग पेडलर हैं वो समाज में पनप नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि मैंने एनसीबी में अपने कार्यकाल के दौरान भी ऐसे मामले देखे हैं। जो लोग बच्चों को नशीले पदार्थ की आपूर्ति करते हैं, उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
बता दें कि बॉम्बे हाई कोर्ट में पिछले दिनों नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के अधिकारी समीर वानखेड़े से जुड़े एफआईआर कैंसिल (रद्द करने) के मामले पर सुनवाई हुई थी। यह मामला उस आरोप से जुड़ा है, जिसमें वानखेड़े पर सुपरस्टार शाहरुख खान से रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है।
सुनवाई के दौरान समीर वानखेड़े ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि उन्होंने कॉर्डेलिया क्रूज ड्रग केस में शाहरुख खान या किसी से भी कोई रिश्वत नहीं मांगी। इसी केस में शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को गिरफ्तार किया गया था।
वानखेड़े की तरफ से वरिष्ठ वकील आबाद पोंडा ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस सुमन श्याम की डिवीजन बेंच के सामने संक्षिप्त दलीलें पेश कीं।
पोंडा ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल ने न तो कभी किसी से पैसे की मांग की और न ही कोई रकम ली, जैसा कि सीबीआई ने अपनी एफआईआर में आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत दर्ज इस मामले में अब तक कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया है।
--आईएएनएस
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