Majaz Lakhnawi Birth Anniversary: मजाज़ लखनवी के जन्मदिन पर पढ़ें इनकी ग़ज़लों से चुनिंदा शेर
मजाज़ लखवनी एक प्रगतिशील शायर हैं जिन्होंने रोमांटिक ग़ज़लें व नज़्में कही हैं पेश हैं उर्दू ग़ज़लों के मक़बूल शायर मजाज़ लखनवी के कुछ चुनिंदा शेर...
ये तो क्या कहिए चला था मैं कहाँ से हमदम
मुझ को ये भी न था मालूम किधर जाना था
रोएँ न अभी अहल-ए-नज़र हाल पे मेरे
होना है अभी मुझ को ख़राब और ज़ियादा
ग़म-ए-दौराँ में गुज़री जिस क़दर गुज़री जहाँ गुज़री
और इस पर लुत्फ़ ये है ज़िंदगी को मुख़्तसर जाना
सीना-ए-शौक़ में वो ज़ख़्म कि लौ दे उठ्ठे
और भी तेज़ ज़माने की हवा हो साक़ी
धुआँ सा इक सम्त उठ रहा है शरारे उड़ उड़ के आ रहे हैं
ये किस की आहें ये किस के नाले तमाम आलम पे छा
इश्क़ क्या क्या न आफ़तें ढाए
हुस्न गर मेहरबाँ न हो जाए
मोहब्बत का हर भेद पाना भी है
मगर अपना दामन बचाना भी है
ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई
हाँ लुत्फ़ जब है पा के भी ढूँढ़ा करे कोई
वो नक़ाब आप से उठ जाए तो कुछ दूर नहीं
वर्ना मेरी निगह-ए-शौक़ भी मजबूर नहीं
तेरे गुनाहगार गुनाहगार ही सही
तेरे करम की आस लगाए हुए तो हैं