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Gulzar Shayari: गुलज़ार साहब की लिखी आज तक की कुछ सबसे मशहूर शायरियां 

 

गुलज़ार साहब को भला कौन नहीं जानता। गुलज़ार साहब ने अपने काम से पूरी दुनिया में अपनी अलग छाप छोड़ी है। गुलज़ार ने जिस गाने को छूआ उसको उन्होंने हमेशा के अमर कर दिया। गुलजार हिंदी शायरी के बहुमूल्य हीरा हैं। Hindi Shayari by Gulzar के इस ब्लॉग में आप जानेंगे इनकी सदाबहार शायरियों के बारे में। यह लोकप्रिय Hindi Shayari by Gulzar आपका मन मोह लेंगी। इस ब्लॉग में विस्तार से जानते हैं इनकी शायरियों के बारे में.....

गुलों को सुनना ज़रा तुम सदाएं भेजीं हैं
गुलों के हाथ बहुत सी दुआएं भेजीं हैं
जो आफ़ताब भी ग़ुरूब होता नहीं
जो सिर्फ दिल है उसी की शोआए भेजीं हैं

-गुलज़ार

आज अगर भर आयी हैं बूंदें बरस जाएंगी
कल क्या पता इनके लिए आँखें तरस जाएंगी
जाने कब गुम हुआ कहाँ खोया
एक आंसू छुपा के रखा था

​​​​​​​-गुलज़ार

सारे परिंदे उसके हो गए
पैरों में मेरे ज़मीन भी नहीं
उसका सितारों में घर है एक
मेरा तो पिंजरे का नसीब भी नहीं

​​​​​​​-गुलज़ार

पतझड़ में कुछ पत्तों के गिरने की आहाट
कानो में एक बार पहन के लौटाई थी
पतझड़ की वो शाख अभी तक काँप रही
वो शाख गिरा दो मेरा वो सामान लौटा दो

​​​​​​​-गुलज़ार

लौटने का ख्याल भी आए
तो बस चले आना
इन्तजार आज भी बड़ी
बेसबरी से है तुम्हारा

​​​​​​​-गुलज़ार

116 चाँद की रातें 1 तुम्हारे काँधें क़ातिल
गीली मेहँदी की खुशबु झूठमूठ के शिकवे कुछ
झूठमूठ के वादे भी सब याद करा दो
सब भिजवा दो मेरा वो सामान लौटा दो

​​​​​​​-गुलज़ार

वो जो है वो बहुत खूब है
मैं जो हूँ मैं तो कुछ भी नहीं
उसकी बेरुखी में भी क्या अदा है
मेरी तो मोहब्बत भी मोहब्बत नहीं

​​​​​​​-गुलज़ार

लिखा नहीं जो क़िस्मत में
उसकी चाहत क्या करना
ये तो एक दिन होना था
हिज्र पे हैरत क्या करना

​​​​​​​-गुलज़ार

आज भी ना आए आंसूं आज भी भीगी नैना
आज भी ये कोरी रैना कोरी लौट जाएगी
खाली हाथ शाम आयी है खाली हाथ जाएगी

​​​​​​​-गुलज़ार

रात की स्याही कोई आए तो मिटाये ना
आज ना मिटाये तो ये कल भी लौट आएगी
खाली हाथ शाम आयी है खाली हाथ जाएगी

​​​​​​​-गुलज़ार

दिल खाली खाली बर्तन है
और रात है जैसा अँधा कुआँ
इन सूनी अँधेरी आँखों में
आंसू की जगह आता है धुआं

​​​​​​​-गुलज़ार

इन उम्र से लम्बी सड़कों को
मंज़िल पे पहुँचते देखा नहीं
बस दौड़ती फिरती रहती है
हमने तो ठहरते देखा नहीं

​​​​​​​-गुलज़ार