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हरा-भरा रहेगा आपका बगीचा: पत्ता मरोड़ रोग से पौधे को कैसे बचाएं? जानें तुरंत राहत देने वाला आसान नुस्खा

 

अगर आपके खेत या घर के किचन गार्डन में लगे टमाटर, मिर्च, बैंगन या दूसरी सब्जियों के पौधों की पत्तियां मुड़ने लगी हैं, पौधे की ग्रोथ रुक गई है या फूल-फल गिरने लगे हैं, तो इसे नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। कई फसलों में लीफ कर्ल यानी पत्ता मरोड़ रोग उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।इस समस्या में पत्तियां सिकुड़ने और मुड़ने लगती हैं, पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और गंभीर स्थिति में पैदावार भी कम हो सकती है। कई लीफ कर्ल वायरस सफेद मक्खी जैसे कीटों के जरिए फैलते हैं।ऐसे में किसान कम लागत वाले उपायों के साथ-साथ रोग फैलाने वाले कीटों की निगरानी और संक्रमित पौधों को हटाने जैसे कदम उठा सकते हैं।

पत्ता मरोड़ रोग में क्या होता है?

पत्ता मरोड़ की समस्या होने पर पौधे की पत्तियां सामान्य आकार में विकसित नहीं हो पातीं। पत्तियों में सिकुड़न, मुड़ना और मोटापन दिखाई दे सकता है। इसका असर पौधे की बढ़वार पर पड़ता है और फल का विकास भी प्रभावित हो सकता है।कई मामलों में इसका संबंध वायरस से होता है और सफेद मक्खी वायरस को संक्रमित पौधे से स्वस्थ पौधों तक पहुंचा सकती है। इसलिए सिर्फ पत्तियों पर स्प्रे करने के बजाय सफेद मक्खी की रोकथाम और संक्रमित पौधों की पहचान भी जरूरी है।

दूध और हल्दी वाला घरेलू घोल कैसे तैयार करें?

सोशल मीडिया पर पत्ता मरोड़ की समस्या के लिए दूध और हल्दी के घोल का घरेलू नुस्खा बताया जाता है। बताए गए तरीके के अनुसार, करीब 250 मिलीलीटर दूध में 5 से 10 ग्राम हल्दी मिलाकर घोल तैयार किया जाता है और इसे स्प्रे पंप की मदद से पौधों पर छिड़कने की बात कही जाती है।हालांकि, इस घरेलू घोल को लीफ कर्ल वायरस का प्रमाणित इलाज नहीं माना जाना चाहिए। अगर पौधे में वायरस की पुष्टि है तो केवल घरेलू स्प्रे पर निर्भर रहने के बजाय कृषि विशेषज्ञ की सलाह और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाना ज्यादा जरूरी है।

सफेद मक्खी पर रखें खास नजर

पत्ता मरोड़ की समस्या में सफेद मक्खी की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। ये छोटे कीट पत्तियों की निचली सतह पर पाए जा सकते हैं और संक्रमित पौधे से वायरस को स्वस्थ पौधों तक पहुंचा सकते हैं।इसलिए खेत में नियमित रूप से पौधों की जांच करें। पत्तियों की नीचे वाली सतह भी देखें और जरूरत पड़ने पर येलो स्टिकी ट्रैप जैसे उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है। ICAR के अनुसार, सफेद मक्खी की निगरानी और नियंत्रण के लिए येलो स्टिकी ट्रैप उपयोगी प्रबंधन उपायों में शामिल हैं।

संक्रमित पौधों को तुरंत हटाना भी जरूरी

अगर किसी पौधे में संक्रमण ज्यादा दिखाई दे रहा है तो उसे खेत में छोड़कर दूसरे स्वस्थ पौधों के बीच रखना सही नहीं है। संक्रमित पौधों को हटाने और आसपास के खरपतवारों को नियंत्रित करने से रोग फैलाने वाले कीटों के लिए संभावित स्रोत कम किए जा सकते हैं। ICAR भी लीफ कर्ल प्रभावित पौधों को हटाने और वैकल्पिक खरपतवार मेजबानों को नष्ट करने की सलाह देता है।

अगली फसल में इन बातों का रखें ध्यान

पत्ता मरोड़ से बचाव के लिए शुरुआत से ही स्वस्थ और रोगरोधी किस्मों का चुनाव करना मददगार हो सकता है। ICAR की कृषि सलाह में टमाटर और मिर्च जैसी फसलों में लीफ कर्ल के प्रबंधन के लिए स्वस्थ/प्रतिरोधी किस्मों, फसल चक्र और खेत की उचित तैयारी पर जोर दिया गया है।

साथ ही खेत में नियमित निगरानी रखें और किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल फसल, कीट और अनुशंसित मात्रा के अनुसार ही करें। ICAR के मुताबिक एकीकृत कीट प्रबंधन में पहले निगरानी और गैर-रासायनिक उपायों को प्राथमिकता दी जाती है तथा जरूरत पड़ने पर ही अनुशंसित मात्रा में रसायनों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

यानी दूध और हल्दी जैसे घरेलू नुस्खे सोशल मीडिया पर बताए जाते हैं, लेकिन अगर पौधों में लीफ कर्ल वायरस की समस्या गंभीर है तो सिर्फ घरेलू उपाय पर निर्भर रहने के बजाय वायरस फैलाने वाले कीटों की रोकथाम, संक्रमित पौधों को हटाने और कृषि विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देना बेहतर है।