भीड़ में रहते हैं शांत, खास इंसान के सामने बन जाते हैं बातूनी! कहीं आप ‘ऑट्रोवर्ट’ तो नहीं?
क्या आप किसी पार्टी या भीड़ में पहुंचते ही शांत हो जाते हैं? अनजान लोगों के बीच आपको ज्यादा बातचीत करना पसंद नहीं, लेकिन जैसे ही आपका कोई खास दोस्त या करीबी इंसान सामने आता है, आप घंटों बातें करने लगते हैं? अगर आपका जवाब हां है, तो सोशल मीडिया पर ऐसी पर्सनालिटी को इन दिनों ‘ऑट्रोवर्ट’ (Otrovert) नाम से बताया जा रहा है।फोटोग्राफर और ट्रैवलर तुषार ने भी अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस तरह के व्यवहार का जिक्र किया है। उनके मुताबिक, कुछ लोगों की सोशल एनर्जी इस बात से ज्यादा प्रभावित होती है कि वे किसके साथ हैं, न कि वे किस जगह पर मौजूद हैं।
माहौल से ज्यादा मायने रखता है सामने वाला इंसान
आमतौर पर लोगों को इंट्रोवर्ट, एक्सट्रोवर्ट या एंबिवर्ट जैसे शब्दों से समझने की कोशिश की जाती है। लेकिन ‘ऑट्रोवर्ट’ शब्द का इस्तेमाल ऐसे लोगों के लिए किया जा रहा है जो इन पारंपरिक कैटेगरी में खुद को पूरी तरह फिट नहीं मानते।
ऐसे लोग किसी पार्टी में जाकर बिल्कुल शांत रह सकते हैं। अनजान लोगों के बीच उन्हें ज्यादा बातचीत करने की इच्छा नहीं होती। लेकिन अगर उसी जगह उनका कोई करीबी दोस्त या पसंदीदा इंसान मिल जाए, तो उनका व्यवहार पूरी तरह बदल सकता है।
वे अचानक ज्यादा खुलकर बात करने लगते हैं, मजाक करते हैं और काफी एनर्जेटिक नजर आ सकते हैं।
क्या ये घमंड या एटीट्यूड है?
कई बार शांत रहने वाले लोगों को देखकर दूसरे लोग उन्हें घमंडी, रूखा या एटीट्यूड वाला समझ लेते हैं। लेकिन हर बार कम बोलने की वजह घमंड हो, यह जरूरी नहीं है।
‘ऑट्रोवर्ट’ शब्द का इस्तेमाल करने वाले लोग इसे इस तरह समझाते हैं कि ऐसे व्यक्ति हर किसी के साथ एक जैसी सोशल एनर्जी महसूस नहीं करते। उन्हें बनावटी बातचीत, जबरदस्ती की दोस्ती या सिर्फ औपचारिक बातचीत में ज्यादा दिलचस्पी नहीं होती।
इसलिए वे अपनी सोशल एनर्जी उन लोगों के साथ खर्च करना पसंद करते हैं जिनके साथ उन्हें सहजता और अपनापन महसूस होता है।
आज की जेनरेशन में क्यों हो रही है इसकी चर्चा?
सोशल मीडिया के दौर में लोगों के लगातार एक्टिव रहने और ज्यादा से ज्यादा लोगों से जुड़ने का दबाव दिखाई देता है। इंस्टाग्राम से लेकर प्रोफेशनल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म तक हर जगह नेटवर्क बढ़ाने की बात होती है।
लेकिन इसके साथ ही कई लोग अब कम लेकिन भरोसेमंद रिश्तों को ज्यादा महत्व देने लगे हैं। उनके लिए बड़ी सोशल सर्कल से ज्यादा जरूरी कुछ ऐसे लोग हो सकते हैं, जिनके सामने उन्हें खुद को बदलने या कोई दिखावा करने की जरूरत न पड़े।
इसी वजह से ‘ऑट्रोवर्ट’ जैसे शब्द सोशल मीडिया पर लोगों को अपने व्यवहार को समझाने के एक अनौपचारिक तरीके के रूप में आकर्षित कर रहे हैं।
कैसे पहचानें कि आप भी ऐसे हैं?
अगर आप इन बातों से खुद को जोड़ पाते हैं, तो सोशल मीडिया वाले ‘ऑट्रोवर्ट’ डिस्क्रिप्शन में आपको अपना व्यवहार नजर आ सकता है—
- अनजान लोगों के बीच आप ज्यादा बातचीत नहीं करते।
- फॉर्मल मीटिंग या बड़े ग्रुप में आप शांत रहना पसंद करते हैं।
- किसी खास दोस्त के साथ घंटों बातचीत कर सकते हैं।
- बेवजह की गॉसिप या छोटी-मोटी बातचीत आपको जल्दी बोर कर सकती है।
- अपने करीबी लोगों के साथ आपका व्यवहार बिल्कुल अलग और ज्यादा खुला हुआ होता है।
- आप हर किसी से दोस्ती करने के बजाय कुछ चुनिंदा लोगों के साथ मजबूत रिश्ता रखना पसंद करते हैं।
अपनी सोशल एनर्जी को समझना भी जरूरी
अगर आप भीड़ में ज्यादा नहीं बोलते हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि आप लोगों को पसंद नहीं करते। हर व्यक्ति का सामाजिक व्यवहार अलग हो सकता है और अलग परिस्थितियों में उसका व्यवहार बदलना सामान्य है।
इसलिए खुद को हर समय किसी एक लेबल में फिट करने के बजाय यह समझना ज्यादा जरूरी है कि आप किन लोगों और परिस्थितियों में सहज महसूस करते हैं।
‘ऑट्रोवर्ट’ फिलहाल सोशल मीडिया और पॉपुलर कंटेंट में इस्तेमाल होने वाला शब्द है, इसे किसी व्यक्ति की आधिकारिक मनोवैज्ञानिक कैटेगरी या बीमारी नहीं माना जाना चाहिए।