अकेले खाना खाने की आदत पड़ सकती है भारी, मानसिक सेहत पर ऐसे पड़ता है असर; जानें कैसे बदलें रूटीन
नई दिल्ली: आज की व्यस्त जीवनशैली में अकेले खाना खाना बहुत सामान्य हो गया है। ऑफिस में लंच ब्रेक के दौरान हो या घर पर रात का खाना, कई लोग मोबाइल फोन, टेलीविजन या लैपटॉप के सामने बैठकर खाना खाते हैं। कभी-कभार ऐसा होना सामान्य है, लेकिन अगर रोजाना अकेले खाना खाने की आदत बन जाए तो इसका असर सामाजिक जुड़ाव और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
क्यों बढ़ रही है अकेले खाना खाने की आदत?
काम का बढ़ता दबाव, व्यस्त दिनचर्या, घर से काम करने की व्यवस्था और सामाजिक जीवन में बदलाव के कारण लोगों के पास परिवार या दोस्तों के साथ बैठकर खाना खाने का समय कम हो गया है।
कई लोग समय बचाने के लिए जल्दी-जल्दी खाना खा लेते हैं। वहीं, अकेले रहने वाले लोगों के लिए भी अकेले भोजन करना रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है। धीरे-धीरे यह आदत इतनी सामान्य हो सकती है कि लोग इसके सामाजिक और मानसिक प्रभावों पर ध्यान ही नहीं देते।
साथ बैठकर खाना क्यों है खास?
परिवार या दोस्तों के साथ बैठकर खाना सिर्फ भोजन करने तक सीमित नहीं होता। इस दौरान बातचीत, हंसी-मजाक और दिनभर की बातें साझा करने का मौका मिलता है।
ऐसे छोटे-छोटे सामाजिक संपर्क व्यक्ति को भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ महसूस करा सकते हैं। साथ बैठकर खाना दिनभर के तनाव को कम करने और रिश्तों को मजबूत करने का भी एक माध्यम बन सकता है।
अकेले खाना खाने से क्या हो सकता है असर?
लगातार अकेले भोजन करने से कुछ लोगों में सामाजिक अलगाव और अकेलेपन की भावना बढ़ सकती है। अगर कोई व्यक्ति पहले से ही सामाजिक रूप से अलग-थलग महसूस कर रहा है, तो हर दिन अकेले खाना इस भावना को और बढ़ा सकता है।
कुछ शोधों में अकेले भोजन करने और खराब मानसिक स्वास्थ्य संकेतकों के बीच संबंध देखा गया है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अकेले खाना खाना सीधे तौर पर मानसिक बीमारी का कारण बनता है। व्यक्ति की जीवनशैली, सामाजिक संबंध और मानसिक स्थिति समेत कई दूसरे कारक भी महत्वपूर्ण होते हैं।
मोबाइल देखकर खाना भी बन सकता है परेशानी
अकेले खाने के साथ एक दूसरी आदत भी तेजी से बढ़ी है और वह है मोबाइल फोन या लैपटॉप देखते हुए खाना।
स्क्रीन पर ध्यान रहने के कारण व्यक्ति इस बात पर कम ध्यान दे पाता है कि उसने कितना और कितनी तेजी से खाना खाया। इससे माइंडफुल ईटिंग यानी भोजन करते समय खाने की मात्रा और शरीर के संकेतों पर ध्यान देने की आदत प्रभावित हो सकती है।
इस वजह से कुछ लोगों में जरूरत से ज्यादा खाने या भोजन का चुनाव सही तरीके से न करने जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।
इस आदत को कैसे बदलें?
अगर आपकी दिनचर्या में अकेले खाना खाना आम हो गया है तो इसे धीरे-धीरे बदला जा सकता है।
सप्ताह में कुछ दिन परिवार के साथ बैठकर खाना खाने की कोशिश करें।
ऑफिस में संभव हो तो सहकर्मियों के साथ लंच करें।
भोजन करते समय मोबाइल फोन और लैपटॉप को दूर रखें।
खाना खाते समय बातचीत को दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
अगर परिवार या दोस्त दूर रहते हैं तो कभी-कभी वीडियो कॉल के दौरान उनके साथ भोजन कर सकते हैं।
भोजन को जल्दबाजी में खत्म करने के बजाय आराम से खाने की कोशिश करें।
अकेले खाना हमेशा नुकसानदायक नहीं
यह समझना भी जरूरी है कि कभी-कभार अकेले खाना खाना अपने आप में कोई समस्या नहीं है। कुछ लोग शांत वातावरण में अकेले खाना पसंद करते हैं और इससे उन्हें आराम भी मिलता है।
परेशानी तब हो सकती है जब अकेले खाना सामाजिक संपर्क की कमी, लगातार अकेलेपन या पूरी तरह अलग-थलग रहने की दिनचर्या का हिस्सा बन जाए। इसलिए भोजन के समय को केवल पेट भरने का जरिया न मानकर परिवार और दोस्तों से जुड़ने के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है।
अगर लंबे समय से अकेलापन, उदासी, अत्यधिक चिंता या सामाजिक गतिविधियों से दूरी महसूस हो रही है, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है।