घर के कचरे को ऐसे करें अलग, रीसाइक्लिंग होगी आसान; प्लास्टिक से बैटरी तक अपनाएं ये तरीका
हर घर में रोजाना निकलने वाला कचरा अगर बिना छंटाई के एक ही डस्टबिन में डाल दिया जाए, तो उसकी रीसाइक्लिंग काफी मुश्किल हो जाती है। खाने के बचे हिस्से के साथ प्लास्टिक, कागज, धातु, बैटरी और इलेक्ट्रॉनिक सामान मिल जाने से रीसाइक्लिंग योग्य सामग्री भी खराब हो सकती है। ऐसे में कचरे को घर से ही अलग-अलग रखना एक आसान और प्रभावी कदम है।
दो डस्टबिन से शुरू करें कचरे की छंटाई
घर में कचरा अलग करने के लिए कम से कम दो डस्टबिन रखना उपयोगी तरीका है। एक डिब्बे में गीला कचरा रखा जा सकता है, जिसमें सब्जियों और फलों के छिलके, बचा हुआ खाना और अन्य जैविक सामग्री शामिल हैं।
दूसरे डिब्बे में कागज, कार्डबोर्ड, प्लास्टिक और धातु जैसी रीसाइक्लिंग योग्य चीजें रखी जा सकती हैं। हालांकि, इन्हें अलग रखने का तरीका स्थानीय कचरा संग्रहण व्यवस्था के नियमों के अनुसार होना चाहिए।
मुंबई में आयोजित प्लास्टिक्स रीसाइक्लिंग शो इंडिया 2026 और भारत रीसाइक्लिंग शो 2026 में विशेषज्ञों ने भी कचरे की सही छंटाई और बेहतर कलेक्शन नेटवर्क को रीसाइक्लिंग के लिए महत्वपूर्ण बताया।
प्लास्टिक को गीले कचरे से रखें दूर
प्लास्टिक की बोतलें, कंटेनर और पैकेजिंग को खाने के बचे हुए कचरे के साथ नहीं मिलाना चाहिए। जहां स्थानीय व्यवस्था इसकी अनुमति देती है, वहां प्लास्टिक को खाली करके साफ और सूखा रखने के बाद अलग किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत के प्लास्टिक रीसाइक्लिंग सिस्टम में पिछले वर्षों में काफी बदलाव आया है, लेकिन सोर्स पर कचरे की छंटाई, कलेक्शन और अनौपचारिक क्षेत्र को व्यवस्थित सिस्टम से जोड़ना अभी भी बड़ी चुनौती है। आने वाले वर्षों में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग बाजार के तेज गति से बढ़ने की उम्मीद भी जताई जा रही है।
पुरानी बैटरी को सामान्य कूड़े में न डालें
रिमोट, घड़ी, खिलौने, मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली पुरानी बैटरियों को सामान्य कूड़ेदान में डालने से बचना चाहिए। इन्हें अलग डिब्बे में इकट्ठा करके अधिकृत कलेक्शन सेंटर या रीसाइक्लिंग व्यवस्था तक पहुंचाना बेहतर है।
बैटरी रीसाइक्लिंग का महत्व इलेक्ट्रिक वाहनों और महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग के साथ और बढ़ रहा है। इसलिए घरों से बैटरियों की सही तरीके से छंटाई और कलेक्शन जरूरी है।
पुराने मोबाइल और चार्जर भी अलग रखें
खराब मोबाइल, पुराने चार्जर, ईयरफोन, पावर बैंक, कंप्यूटर के पुर्जे और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामान को सामान्य कचरे में नहीं डालना चाहिए। इन्हें ई-वेस्ट के तौर पर अलग रखना चाहिए।
रीसाइक्लिंग क्षेत्र में सेंसर आधारित सॉर्टिंग, मशीन विजन और दूसरी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। बेहतर तरीके से अलग किया गया ई-वेस्ट आगे की प्रक्रिया में अधिक उपयोगी हो सकता है।
कचरा अलग करने से क्या फायदा होगा?
कचरे की सही छंटाई से रीसाइक्लिंग योग्य सामग्री की गुणवत्ता बेहतर रहती है और उसे दोबारा उपयोगी संसाधनों में बदलना आसान होता है। साथ ही गीले और सूखे कचरे के मिश्रण से होने वाली गंदगी और नुकसान को भी कम किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत के रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए बेहतर कलेक्शन नेटवर्क, तकनीक और कचरे की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है।
घर में बनाएं 4 तरह की व्यवस्था
घर में कचरे को चार हिस्सों में बांटकर रखना आसान हो सकता है:
गीला कचरा: बचा हुआ खाना, फल-सब्जियों के छिलके और जैविक सामग्री।
सूखा कचरा: कागज, कार्डबोर्ड और अन्य सूखी सामग्री।
प्लास्टिक/रीसाइक्लिंग: स्थानीय नियमों के मुताबिक प्लास्टिक, धातु और अन्य रीसाइक्लिंग योग्य सामान।
ई-वेस्ट और बैटरी: पुराने मोबाइल, चार्जर, इलेक्ट्रॉनिक सामान और इस्तेमाल हो चुकी बैटरियां।
यानी रीसाइक्लिंग की शुरुआत किसी बड़े प्लांट से नहीं, बल्कि घर के डस्टबिन से होती है। कचरा जितनी अच्छी तरह अलग होगा, उसे दोबारा उपयोगी संसाधन में बदलना उतना ही आसान होगा।