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पुरानी चीजें फेंकने का नहीं करता मन? साइकोलॉजी के मुताबिक, यादों और भावनाओं से जुड़ी हो सकती है यह आदत

 

पुरानी चिट्ठियां, तस्वीरें, खिलौने और तोहफे संभालकर रखना सिर्फ आदत नहीं, यादों से जुड़ाव की वजह भी हो सकता है। हालांकि, केवल इस आदत से किसी के स्वभाव का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि पुरानी चीजें इस्तेमाल में नहीं आने के बावजूद आप उन्हें फेंक नहीं पाते? कभी बचपन की कोई किताब, पुरानी तस्वीर, किसी अपने की चिट्ठी या फिर किसी खास व्यक्ति का दिया हुआ तोहफा सामने आ जाए, तो उसे फेंकने का मन नहीं करता। भले ही उस चीज का अब कोई इस्तेमाल न हो, लेकिन उसे देखकर मन पुरानी यादों में खो जाता है।

मनोविज्ञान के नजरिए से देखें तो कई बार पुरानी चीजों को संभालकर रखने के पीछे उनसे जुड़ी यादें, भावनाएं और जीवन के खास अनुभव होते हैं। किसी के लिए एक पुरानी घड़ी सिर्फ सामान हो सकती है, लेकिन किसी दूसरे व्यक्ति के लिए वह किसी खास रिश्ते की निशानी हो सकती है। हालांकि, केवल पुरानी चीजें जमा करने की आदत से किसी व्यक्ति के स्वभाव या व्यक्तित्व के बारे में कोई निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

पुरानी चीजें देखकर ताजा हो जाती हैं यादें

कई बार पुरानी तस्वीर, चिट्ठी या खिलौना देखते ही हमें उससे जुड़ी कोई घटना याद आ जाती है। ऐसा लगता है, जैसे हम कुछ पल के लिए अपने पुराने दिनों में लौट गए हों। यही वजह है कि कुछ चीजें हमारे लिए केवल वस्तुएं नहीं रह जातीं, बल्कि यादों को दोबारा महसूस करने का माध्यम बन जाती हैं।

उदाहरण के लिए, अगर किसी करीबी ने आपको घड़ी तोहफे में दी हो, तो उसके खराब हो जाने के बाद भी आप उसे संभालकर रख सकते हैं। इसकी वजह घड़ी की कीमत नहीं, बल्कि उससे जुड़ी याद और उस व्यक्ति के प्रति आपका लगाव हो सकता है।

इसी तरह बचपन की किताबें, पुराने स्कूल का पहचान पत्र या किसी खास मौके की तस्वीरें भी बीते हुए समय की याद दिलाती हैं।

बीते हुए समय से जुड़ाव भी हो सकता है वजह

क्या आपने कभी गौर किया है कि कोई पुराना गाना सुनते ही आपको बचपन या जिंदगी का कोई खास दौर याद आने लगता है? पुरानी चीजें भी कुछ इसी तरह काम कर सकती हैं। वे हमें उन पलों, लोगों और अनुभवों की याद दिलाती हैं, जो हमारी जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं।

कुछ चीजों से हमारा भावनात्मक जुड़ाव इसलिए भी अधिक होता है, क्योंकि वे किसी रिश्ते, उपलब्धि या जीवन के बदलाव से जुड़ी होती हैं।

मसलन, पहली नौकरी का आईडी कार्ड, माता-पिता की पुरानी चिट्ठी, बचपन का खिलौना या किसी करीबी का दिया हुआ तोहफा। दूसरे व्यक्ति को ये चीजें बेकार लग सकती हैं, लेकिन उनके मालिक के लिए इनका भावनात्मक महत्व बहुत अधिक हो सकता है।

क्या पुरानी चीजें संभालने वाले लोग ज्यादा इमोशनल होते हैं?

जरूरी नहीं। केवल पुरानी चीजों को संभालकर रखने के आधार पर किसी को ज्यादा भावुक, अंतर्मुखी या किसी खास व्यक्तित्व वाला नहीं कहा जा सकता।

हर व्यक्ति के पास चीजें सहेजकर रखने की अलग-अलग वजह हो सकती है। कोई पुरानी यादों के कारण ऐसा करता है, कोई किसी व्यक्ति की निशानी के तौर पर चीजें रखता है, जबकि कुछ लोग सोचते हैं कि ये वस्तुएं भविष्य में काम आ सकती हैं।

इसलिए इस आदत को सीधे किसी खास व्यक्तित्व से जोड़ना सही नहीं होगा। किसी व्यक्ति के स्वभाव को समझने के लिए उसकी कई आदतों, व्यवहार और परिस्थितियों को देखना जरूरी होता है।

कब पुरानी चीजें जमा करना परेशानी बन सकता है?

पुरानी चीजों को संभालकर रखना आम बात है। लेकिन समस्या तब हो सकती है, जब किसी व्यक्ति को बेकार या अनुपयोगी सामान हटाने में लगातार बहुत परेशानी होने लगे और घर में इतनी चीजें जमा हो जाएं कि रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें।ऐसी स्थिति में यह होर्डिंग डिसऑर्डर (Hoarding Disorder) का संकेत हो सकता है। यह एक मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्थिति है, जिसमें व्यक्ति को सामान छोड़ने या उससे अलग होने में गंभीर कठिनाई होती है, चाहे उस सामान की वास्तविक उपयोगिता बहुत कम क्यों न हो।

हालांकि, सिर्फ पुरानी चीजें पसंद करने या यादगार वस्तुएं सहेजकर रखने से किसी को यह विकार नहीं माना जा सकता। इसके लिए यह देखना जरूरी है कि सामान जमा करने की आदत कितनी गंभीर है और उसका व्यक्ति के जीवन पर क्या असर पड़ रहा है। जरूरत महसूस होने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहता है।

यादें सहेजना गलत नहीं, संतुलन जरूरी है

पुरानी चीजें हमारी जिंदगी के खास पलों और रिश्तों की याद दिला सकती हैं। इसलिए हर पुरानी वस्तु को बेकार समझकर फेंक देना जरूरी नहीं है। लेकिन यादों को सहेजने और जरूरत से ज्यादा सामान जमा करने के बीच अंतर समझना भी महत्वपूर्ण है।आप चाहें तो खास तस्वीरों, चिट्ठियों और यादगार तोहफों को अलग डिब्बे या एल्बम में व्यवस्थित रख सकते हैं। इससे यादें भी सुरक्षित रहेंगी और घर में अनावश्यक सामान भी नहीं बढ़ेगा।आखिरकार, किसी चीज की असली अहमियत हमेशा उसकी कीमत या उपयोगिता से तय नहीं होती। कई बार उसके साथ जुड़ी यादें ही उसे हमारे लिए खास बना देती हैं।