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Relationship Advice: प्यार होने के बावजूद रिश्ते में क्यों पनपता है अकेलापन? ये 5 कारण बन सकते हैं पार्टनर से दूरी की वजह

 

कई बार ऐसा होता है कि पार्टनर हमारे साथ ही रहता है। दोनों साथ खाना खाते हैं, बातें करते हैं, घर के काम करते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी भी साथ बिताते हैं। इसके बावजूद मन के किसी कोने में एक खालीपन या अकेलापन महसूस होता रहता है। ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि रिश्ते में सिर्फ शारीरिक रूप से साथ रहना ही काफी नहीं होता, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव भी बेहद जरूरी होता है।

जब पार्टनर एक-दूसरे की भावनाओं को समझ नहीं पाते, अपनी परेशानियां खुलकर साझा नहीं कर पाते या बातचीत के दौरान खुद को अनसुना महसूस करते हैं, तो धीरे-धीरे भावनात्मक दूरी बढ़ सकती है। ऐसे में रिश्ता बाहर से सामान्य दिखाई देता है, लेकिन अंदर से दोनों के बीच अकेलेपन की भावना पैदा हो सकती है।

पार्टनर की भावनाओं को समझना जरूरी

रिश्ते में भावनात्मक रूप से मौजूद रहने का मतलब सिर्फ पार्टनर के पास बैठना नहीं है। जब पार्टनर अपनी परेशानी, थकान या किसी खराब दिन के बारे में बताए, तो केवल ‘ठीक है’ या ‘सब ठीक हो जाएगा’ कहकर बात खत्म न करें।

उसकी बात ध्यान से सुनें और जरूरत हो तो पूछें कि आखिर क्या हुआ और उसे आपकी मदद या सिर्फ आपका साथ चाहिए। कई बार समस्या का समाधान देने से ज्यादा जरूरी होता है पार्टनर को यह महसूस कराना कि उसकी भावनाओं को समझा और सुना जा रहा है।

बड़े फैसलों में पार्टनर की राय लें

रिश्ते में अकेलेपन की एक वजह यह भी हो सकती है कि महत्वपूर्ण फैसलों में एक पार्टनर को शामिल ही न किया जाए। चाहे बात घर, पैसे, करियर या परिवार से जुड़े किसी बड़े फैसले की हो, दोनों की राय को महत्व देना जरूरी है।

एक मजबूत रिश्ते में दोनों को यह महसूस होना चाहिए कि वे एक टीम हैं। सिर्फ एक ही घर में रहने वाले दो लोगों की तरह नहीं, बल्कि ऐसे साथी की तरह जो एक-दूसरे के फैसलों और भावनाओं को महत्व देते हैं।

हर बात में आलोचना करने से बचें

अगर पार्टनर को हर बात पर आलोचना, ताने या कमियां सुनने को मिलती रहें, तो वह धीरे-धीरे अपनी बातें साझा करना कम कर सकता है। उसे डर लग सकता है कि अपनी परेशानी बताने पर उसे समझने के बजाय जज किया जाएगा।

इसलिए पार्टनर की हर बात में कमी निकालने के बजाय पहले उसकी स्थिति को समझने की कोशिश करें। किसी बात से असहमति हो तो भी सम्मान के साथ अपनी बात रखना रिश्ते के लिए बेहतर होता है।

समझें कि पार्टनर प्यार कैसे महसूस करता है

हर व्यक्ति प्यार को एक ही तरीके से महसूस नहीं करता। किसी के लिए प्यार भरे शब्द महत्वपूर्ण हो सकते हैं, तो किसी के लिए साथ समय बिताना, छोटी-छोटी मदद करना या मुश्किल वक्त में साथ खड़ा रहना ज्यादा मायने रख सकता है।

इसलिए यह समझना जरूरी है कि आपके पार्टनर को किस तरह का व्यवहार प्यार और अपनापन महसूस कराता है। जरूरत हो तो सीधे उनसे पूछें कि उन्हें आपसे किस तरह का साथ चाहिए।

रिश्ते में सुरक्षित माहौल बनाएं

भावनात्मक जुड़ाव बढ़ाने के लिए रिश्ते में ऐसा माहौल होना चाहिए जहां दोनों बिना डर या झिझक के अपनी बात कह सकें। पार्टनर की भावनाओं को छोटा समझने, तुरंत सलाह देने या उसकी परेशानी की तुलना किसी और से करने से बचें।

कई बार सिर्फ ध्यान से सुनना और यह कहना कि ‘मैं तुम्हारे साथ हूं’ भी बहुत मायने रखता है। बातचीत के समय फोन को दूर रखना, एक-दूसरे की बात बीच में न काटना और जरूरी फैसलों में साथी को शामिल करना रिश्ते में अपनापन बढ़ा सकता है।

साथ रहना ही काफी नहीं, जुड़ाव भी जरूरी

रिश्ते की मजबूती सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि दोनों लोग कितना समय एक-दूसरे के साथ रहते हैं। असली जुड़ाव तब महसूस होता है जब दोनों अपनी भावनाएं साझा कर सकें, एक-दूसरे को सुनें, सम्मान दें और मुश्किल समय में भावनात्मक सहारा बनें।

अगर साथ रहते हुए भी लगातार अकेलापन महसूस हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय पार्टनर से खुलकर बातचीत करना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर कपल्स काउंसलर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद भी ली जा सकती है।