शनिवार को शनि चालीसा के पाठ से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मिलेगी राहत, बनेंगे बिगड़े काम
शनि देव की साढ़ेसाती और ढैय्या का समय जीवन में कई तरह की चुनौतियां लेकर आता है। यह काल व्यक्ति के लिए कई परेशानियां, आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और मानसिक तनाव लेकर आता है। लेकिन शनिवार को शनि चालीसा का पाठ करने से इन कष्टों से राहत मिलती है और बिगड़े हुए काम बनते हैं।
शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या क्या है?
साढ़ेसाती वह समय होता है जब शनि ग्रह कुंडली में अपने निश्चित राशि से लगभग 7.5 वर्षों तक प्रभावित करता है। ढैय्या भी शनि का ही एक प्रभाव होता है, जो लगभग 2.5 वर्षों तक चलता है। इस दौरान व्यक्ति के जीवन में उथल-पुथल, बाधाएं और संघर्ष बढ़ जाते हैं।
शनिवार और शनि देव का संबंध
शनिवार को शनि देव की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। शनि देव को न्याय का देवता कहा जाता है, जो कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनिवार के दिन शनि की आराधना से उनकी कृपा प्राप्त होती है और जीवन के संकटों से मुक्ति मिलती है।
शनि चालीसा का महत्व
शनि चालीसा शनि देव की महिमा का बखान करती है। इसका नियमित पाठ करने से शनि देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में सकारात्मक बदलाव आते हैं। शनि चालीसा के पाठ से निम्न लाभ होते हैं:
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साढ़ेसाती और ढैय्या के कष्ट कम होते हैं।
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जीवन के कठिन कार्य आसान हो जाते हैं।
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आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
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स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं दूर होती हैं।
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मानसिक तनाव और भय कम होता है।
शनिवार को शनि चालीसा कैसे पढ़ें?
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शनिवार के दिन प्रातः या संध्या समय शनि मंदिर जाकर या घर पर शनि देव की पूजा करें।
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शुद्ध जल से स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
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शनि जी को काले तिल, काला वस्त्र, तेल या लोहे का कोई प्रसाद अर्पित करें।
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शनि चालीसा का नियमित पाठ करें।
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ध्यान रखें कि शनि जी की पूजा में सच्चा मन और श्रद्धा हो।
विशेष उपाय
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शनिवार को शनिदेव के समक्ष तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
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काले तिल का दान करें।
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जरूरतमंदों को काले वस्त्र दान करने से भी शनि की कृपा प्राप्त होती है।
निष्कर्ष
अगर आप शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से पीड़ित हैं तो शनिवार को शनि चालीसा का पाठ करें। इससे शनि देव की कृपा बनी रहेगी और आपके जीवन के बिगड़े काम बनेंगे। शनि की पूजा और उपायों से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और खुशहाली आती है।