Healthy Food Tips: फ्रूट रायता या बूंदी रायता, सेहत के लिए कौन-सा है बेहतर? जानें दोनों के फायदे
खाने के साथ रायता मिल जाए, तो भोजन का स्वाद और बढ़ जाता है। खासकर गर्मियों में दही से बने रायते लोगों की पसंद होते हैं। फ्रूट रायता और बूंदी रायता ऐसे ही दो लोकप्रिय विकल्प हैं, जिन्हें घरों में आसानी से बनाया जाता है। दोनों में दही होने के कारण प्रोटीन और कैल्शियम जैसे पोषक तत्व मिलते हैं, लेकिन इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री इनके पोषण में अंतर पैदा करती है। ऐसे में सवाल है कि वजन नियंत्रित रखने और सेहत का ध्यान रखने वालों के लिए कौन-सा रायता बेहतर विकल्प हो सकता है?
फ्रूट रायता खाने के क्या हैं फायदे?
फ्रूट रायता बनाने के लिए सादे दही में सेब, केला, अनार और अपनी पसंद के दूसरे ताजे फल मिलाए जाते हैं। फलों से शरीर को विटामिन, मिनरल्स और अन्य लाभकारी पोषक तत्व मिलते हैं। खासकर फाइबर से भरपूर फल पाचन में मदद कर सकते हैं और पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में सहायक होते हैं।
दही से प्रोटीन और कैल्शियम मिलता है, जो मांसपेशियों और हड्डियों के लिए जरूरी हैं। दही में मौजूद जीवित लाभकारी बैक्टीरिया भी पाचन स्वास्थ्य को सहारा दे सकते हैं।
हालांकि, फ्रूट रायता बनाते समय अतिरिक्त चीनी या मीठे सिरप का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। इससे इसकी कैलोरी बढ़ सकती है। ताजे फल और बिना चीनी वाला दही इस्तेमाल करना बेहतर विकल्प है।
बूंदी रायता कितना हेल्दी होता है?
बूंदी रायता दही और बेसन से बनी बूंदी को मिलाकर तैयार किया जाता है। बेसन से कुछ प्रोटीन मिलता है, जबकि दही कैल्शियम और प्रोटीन उपलब्ध कराता है। इसलिए बूंदी रायते को पूरी तरह अनहेल्दी कहना सही नहीं होगा।
लेकिन बाजार में मिलने वाली ज्यादातर बूंदी तेल में तली जाती है। ऐसे में बूंदी से मिलने वाली अतिरिक्त वसा और कैलोरी रायते की कुल कैलोरी बढ़ा सकती हैं। अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो ज्यादा मात्रा में बूंदी खाने से आपकी रोजाना की कैलोरी जरूरत से अधिक हो सकती है।
इसे बेहतर विकल्प बनाने के लिए बूंदी की मात्रा सीमित रखें और ताजा, सादा दही इस्तेमाल करें। नमक भी जरूरत के अनुसार ही डालें।
वजन घटाने के लिए कौन-सा रायता बेहतर है?
अगर आप वजन नियंत्रित रखना चाहते हैं, तो कम मात्रा में बिना चीनी वाला फ्रूट रायता अच्छा विकल्प हो सकता है। इसमें फलों से फाइबर और विभिन्न पोषक तत्व मिलते हैं। दूसरी ओर, बूंदी रायता भी संतुलित भोजन का हिस्सा बन सकता है, बशर्ते उसमें तली हुई बूंदी कम मात्रा में इस्तेमाल की जाए।
ध्यान रखें कि केवल रायते का चुनाव वजन कम नहीं करता। पूरे दिन में ली जाने वाली कुल कैलोरी, शारीरिक गतिविधि और भोजन की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण हैं। फ्रूट रायते में केला जैसे फल या दही की मात्रा के कारण कैलोरी बढ़ सकती है, इसलिए मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।
रायता बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
• फ्रूट रायता: ताजे फल और बिना चीनी वाला सादा दही इस्तेमाल करें।
• बूंदी रायता: बूंदी कम मात्रा में डालें और संभव हो तो कम तेल वाली बूंदी चुनें।
• दही का चुनाव: अपनी जरूरत के अनुसार सादा या कम फैट वाला दही ले सकते हैं।
• नमक और मसाले: नमक सीमित रखें, खासकर अगर आपको सोडियम कम लेने की सलाह दी गई है।
• परोसने की मात्रा: रायते को संतुलित भोजन के हिस्से के रूप में खाएं, न कि भोजन का एकमात्र विकल्प बनाएं।
निष्कर्ष: फ्रूट रायता या बूंदी रायता?
पोषण के लिहाज से बिना अतिरिक्त चीनी वाला फ्रूट रायता अक्सर बेहतर विकल्प हो सकता है, क्योंकि इसमें दही के साथ फलों से फाइबर और दूसरे पोषक तत्व भी मिलते हैं। वहीं, बूंदी रायता भी उचित मात्रा में खाया जा सकता है। आखिरकार, कौन-सा रायता आपके लिए बेहतर है, यह उसकी सामग्री, मात्रा और आपकी व्यक्तिगत जरूरतों पर निर्भर करता है।