घर की छत पर उगाएं ताजी हरी मटर, 60-75 दिनों में मिलेगी भरपूर फसल; जानें आसान तरीका
सर्दियों का मौसम शुरू होते ही हरी मटर की डिमांड बढ़ जाती है। मटर-पनीर से लेकर पुलाव, कचौड़ी और पराठों तक, ताजी हरी मटर का स्वाद खाने को और भी खास बना देता है। अगर आप बाजार की मटर के बजाय घर पर उगी ताजी मटर खाना चाहते हैं, तो इसे छत या बालकनी के किचन गार्डन में आसानी से उगा सकते हैं।
मटर की खेती के लिए बहुत बड़ी जगह की जरूरत नहीं होती। सही गमला, अच्छी मिट्टी, पर्याप्त धूप और पौधों को उचित सहारा देकर घर पर ही अच्छी फसल हासिल की जा सकती है।
अक्टूबर-नवंबर में बोएं मटर के बीज
हरी मटर ठंडे मौसम में अच्छी तरह बढ़ती है। इसलिए अक्टूबर से नवंबर के बीच इसके बीज बोना बेहतर माना जाता है। सबसे पहले मिट्टी को अच्छी तरह तैयार करें।
इसके लिए करीब 50 फीसदी सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 फीसदी सड़ी हुई गोबर की खाद और 20 फीसदी रेत मिलाकर हल्का और भुरभुरा मिश्रण तैयार किया जा सकता है। उपलब्ध होने पर इसमें वर्मीकम्पोस्ट भी मिलाई जा सकती है।
मटर की जड़ें बहुत गहराई तक नहीं जातीं, इसलिए करीब 9 से 12 इंच गहरा और चौड़ा गमला या ग्रो-बैग पर्याप्त हो सकता है। गमले में पानी की निकासी के लिए ड्रेनेज होल जरूर होने चाहिए।
बीज बोने से पहले करें ये काम
बीजों को बोने से पहले करीब 6 से 8 घंटे हल्के गुनगुने पानी में भिगोकर रखना अंकुरण में मदद कर सकता है। इसके बाद बीजों को लगभग 1 से 1.5 इंच गहराई में बोएं और प्रत्येक बीज के बीच करीब 2 से 3 इंच की दूरी रखें।
बीजों को मिट्टी से ढकने के बाद स्प्रे बोतल से हल्का पानी दें। मिट्टी में नमी बनाए रखें, लेकिन पानी जमा न होने दें। सामान्य परिस्थितियों में करीब 5 से 7 दिनों में अंकुर दिखाई देने लग सकते हैं।
बेल को देना होगा सहारा
मटर का पौधा बेल के रूप में बढ़ता है। जब पौधे करीब 6 से 8 इंच ऊंचे हो जाएं तो उन्हें सहारा देना जरूरी हो जाता है।
इसके लिए गमले में बांस की पतली डंडियां, लकड़ी की स्टिक या रस्सी की मदद से छोटा मचान बनाया जा सकता है। बेल को सहारा मिलने से पौधे को अच्छी तरह फैलने में मदद मिलती है और धूप व हवा भी पर्याप्त मात्रा में मिलती रहती है।
रोजाना 5-6 घंटे धूप जरूरी
मटर के पौधों को ऐसी जगह रखना चाहिए जहां उन्हें रोजाना करीब 5 से 6 घंटे अच्छी धूप मिल सके। पर्याप्त रोशनी मिलने पर पौधे की ग्रोथ और फलियों के विकास में मदद मिलती है।
सिंचाई करते समय ध्यान रखें कि मिट्टी हल्की नम रहे। जरूरत से ज्यादा पानी देने से जड़ों में पानी जमा हो सकता है और पौधे को नुकसान पहुंच सकता है।
फूल आने पर ऐसे करें देखभाल
जब पौधों में फूल आने लगें तो समय-समय पर जैविक खाद या वर्मीकम्पोस्ट दी जा सकती है। कीटों से बचाव के लिए नीम तेल का हल्का स्प्रे भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन किसी भी जैविक या रासायनिक उत्पाद का इस्तेमाल उसके लेबल पर दिए निर्देशों के अनुसार ही करें।
60-75 दिनों में तैयार हो सकती है मटर
सही मौसम और देखभाल मिलने पर बुवाई के करीब 60 से 75 दिनों में मटर की फलियां तैयार हो सकती हैं। जब फलियां मोटी और अच्छी तरह भरी हुई दिखाई देने लगें, तो उन्हें पौधे से सावधानीपूर्वक तोड़ा जा सकता है।
इस तरह थोड़ी सी जगह में गमले या ग्रो-बैग की मदद से घर पर ही ताजी हरी मटर उगाई जा सकती है। इससे किचन गार्डन भी हरा-भरा रहेगा और सर्दियों में घर की उगी ताजी मटर का स्वाद भी मिल सकेगा।