Food Tips: दाल बनाने से पहले पानी में भिगोना क्यों है फायदेमंद? समझें पूरी बात
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दाल भारतीय घरों की रोजमर्रा की रसोई का अहम हिस्सा है। लेकिन कई बार दाल पकाने के बाद भी उसके दाने पूरी तरह नहीं गलते और उन्हें पकाने में उम्मीद से ज्यादा समय लग जाता है। खासकर पुरानी या साबुत दालों के साथ यह परेशानी ज्यादा देखने को मिलती है।
ऐसे में दाल को पकाने से पहले पानी में भिगोना एक आसान तरीका हो सकता है। भिगोने से दाल पानी सोखकर नरम होने लगती है, जिससे पकाते समय गर्मी और पानी दाने के अंदर तक आसानी से पहुंच सकते हैं। हालांकि, हर दाल को एक ही समय के लिए भिगोना जरूरी नहीं होता।
Soaking Time: हर दाल के लिए अलग होता है समय
दाल को कितनी देर भिगोना चाहिए, यह उसके प्रकार और दाने की बनावट पर निर्भर करता है। धुली या फूटी हुई दालों को आमतौर पर लंबे समय तक भिगोने की जरूरत नहीं होती।
मूंग दाल जैसी जल्दी पकने वाली दाल बिना भिगोए भी तैयार हो सकती है। लेकिन इसे पहले से भिगोना हो तो करीब 30 मिनट से 1 घंटे का समय पर्याप्त हो सकता है। मसूर जैसी दूसरी फूटी हुई दालों को भी जरूरत के हिसाब से थोड़ी देर पानी में रखा जा सकता है।
अगर दाल पुरानी है या उसके दाने सामान्य से ज्यादा सख्त हैं, तो थोड़ी देर भिगोने से पकाने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
30 Minutes: इतनी देर भिगोने से क्या होता है?
जब दाल पानी में रहती है तो उसके दाने धीरे-धीरे पानी सोखते हैं। इससे उनकी कठोरता कम होने लगती है और पकाते समय पानी तथा गर्मी दाने के भीतर बेहतर तरीके से पहुंच सकती है।
नतीजतन दाल अपेक्षाकृत जल्दी और समान रूप से पक सकती है। खासकर फूटी हुई दाल के लिए 30 मिनट का भिगोना एक आसान विकल्प हो सकता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर दाल के लिए बिल्कुल 30 मिनट का समय ही सही हो।
Whole Dal: साबुत दाल को चाहिए ज्यादा समय
साबुत उड़द, साबुत मसूर और अन्य साबुत दालों के दाने फूटी हुई दालों की तुलना में अधिक सख्त होते हैं। इसलिए इन्हें केवल आधे घंटे भिगोने से हमेशा अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकता।
साबुत दालों को करीब 2 घंटे या जरूरत के अनुसार उससे ज्यादा समय तक भिगोया जा सकता है। इससे दाने पर्याप्त पानी सोख लेते हैं और पकाते समय आसानी से नरम हो सकते हैं।
वहीं राजमा, छोले और चने जैसी साबुत फलियों को आमतौर पर काफी लंबे समय तक भिगोया जाता है। इनके लिए रातभर यानी करीब 8 से 12 घंटे तक भिगोने का तरीका काफी सामान्य है। इसलिए इन चीजों को सिर्फ 30 मिनट पानी में रखना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए।
Dal Soaking Method: सही तरीके से ऐसे भिगोएं
दाल को भिगोने से पहले उसे अच्छी तरह जांच लें और कंकड़, खराब दाने या दूसरी अशुद्धियां अलग कर दें। इसके बाद दाल को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। पानी बदलकर दो-तीन बार हल्के हाथ से धोना बेहतर रहता है।
अब दाल को किसी साफ बर्तन में डालें और उसमें पर्याप्त मात्रा में पानी भरें। ध्यान रखें कि दाल पानी सोखकर फूल सकती है, इसलिए पानी इतना जरूर रखें कि दाने अच्छी तरह डूबे रहें।
Soaking Water: भिगोने के बाद पानी क्यों बदलते हैं?
दाल और फलियों में कुछ प्राकृतिक यौगिक मौजूद होते हैं, जिनमें से कुछ पानी में घुल सकते हैं। कुछ लोगों में ऐसे यौगिक पाचन संबंधी परेशानी या गैस से जुड़े हो सकते हैं। इसी वजह से कई लोग दाल या फलियों को भिगोने के बाद पानी फेंक देते हैं और पकाने के लिए ताजा पानी इस्तेमाल करते हैं।
हालांकि, भिगोने के पानी को बदलना पाचन संबंधी परेशानी का कोई निश्चित या पक्का इलाज नहीं है। यह मुख्य रूप से खाना तैयार करने का एक सामान्य तरीका है।
Cooking Tip: दाल को बेहतर तरीके से पकाने का आसान तरीका
दाल को भिगोने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि उसके दाने पहले से पानी सोख लेते हैं। इससे खासकर सख्त या साबुत दालों को पकाने की प्रक्रिया आसान हो सकती है। इसलिए दाल के प्रकार को देखकर ही भिगोने का समय तय करना बेहतर है—फूटी दालों के लिए थोड़ी देर और साबुत फलियों के लिए ज्यादा समय।