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पुराने कपड़ों में लगेगा नया तड़का! रक्षाबंधन पर गॉर्जियस दिखने के लिए कृतिका कामरा के ये 5 फ़ैशन हैक्स करें ट्राई

 

रक्षाबंधन सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते को सेलिब्रेट करने का त्योहार नहीं है, बल्कि इस खास दिन के लिए तैयार होना भी जश्न का हिस्सा होता है। अभिनेत्री कृतिका कामरा के लिए फेस्टिव फैशन का मतलब है पारंपरिक अंदाज के साथ मॉडर्न टच और सबसे जरूरी आराम। उनके छोटे भाई राहुल कामरा भी फैशन को लेकर काफी सजग हैं। रक्षाबंधन के मौके पर कृतिका ने अपने फैशन सेंस, तैयारियों और भाई के साथ बचपन की यादों को लेकर कई बातें साझा कीं।

भारी-भरकम आउटफिट से दूर रहती हैं कृतिका

रक्षाबंधन के लिए अपने लुक को लेकर कृतिका का कहना है कि उन्हें बहुत ज्यादा हैवी या भड़कीला लुक पसंद नहीं है। वह ऐसे कपड़े पहनना पसंद करती हैं, जिनमें सादगी और पारंपरिक अंदाज नजर आए, लेकिन साथ ही मॉडर्न टच भी हो।

कृतिका के मुताबिक, वह फेस्टिव मौके पर एलिगेंट एथनिक आउटफिट के साथ हल्की-फुल्की ज्वेलरी और नेचुरल मेकअप पसंद करेंगी। उनके लिए किसी भी फेस्टिव लुक में खूबसूरत दिखने के साथ सहज महसूस करना भी उतना ही जरूरी है।

फैशन के साथ आराम को देती हैं प्राथमिकता

कृतिका का मानना है कि त्योहारों पर पहने जाने वाले कपड़े ऐसे होने चाहिए, जो आपके व्यक्तित्व को दिखाने के साथ आपको कंफर्टेबल भी रखें। उनके मुताबिक, फैशन में अपनी पर्सनैलिटी को बनाए रखते हुए उसमें थोड़ा ट्रेडिशनल टच जोड़ना काफी अच्छा लगता है।

वह ऐसे आउटफिट चुनना पसंद करती हैं, जो देखने में खूबसूरत हों और जिन्हें पहनकर लंबे समय तक आराम से रहा जा सके। उनके लिए सिर्फ ट्रेंड फॉलो करना जरूरी नहीं, बल्कि कपड़ों में खुद जैसा महसूस करना ज्यादा मायने रखता है।

कई बार आखिरी समय में चुना लुक बन जाता है खास

त्योहारों पर परफेक्ट दिखने के लिए कई लोग काफी पहले से अपने कपड़ों और लुक की तैयारी शुरू कर देते हैं। हालांकि, कृतिका खुद इस मामले में बहुत ज्यादा प्लानिंग नहीं करतीं।

उनका कहना है कि वह किसी खास मौके के लिए कुछ दिन पहले अपने कपड़ों के विकल्प जरूर देख लेती हैं, लेकिन कई बार आखिरी समय पर चुना गया लुक ही सबसे ज्यादा अच्छा लगता है। उनके लिए आउटफिट चुनते समय सबसे अहम चीज उसका कंफर्ट है।

भाई राहुल के साथ मैचिंग कपड़ों की बचपन की यादें

कृतिका ने छोटे भाई राहुल के साथ बचपन में मैचिंग कपड़े पहनने की यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि बचपन में भाई-बहनों का एक जैसे या मैचिंग कपड़े पहनना आम बात थी। हालांकि, बड़े होने के बाद ऐसा कम हो गया है।

अब भले ही दोनों हमेशा मैचिंग आउटफिट न पहनते हों, लेकिन कई बार उनके कपड़ों के रंग एक जैसे जरूर होते हैं। कृतिका के मुताबिक, यह देखने में काफी अच्छा लगता है। वह मानती हैं कि भाई-बहन के कपड़े मैच करें या नहीं, सबसे जरूरी है कि वे साथ में अच्छा वक्त बिताएं।

उन्होंने मजाकिया अंदाज में यह भी कहा कि अगर कभी राहुल उनके किसी लुक को कॉपी करते हैं, तो उन्हें इससे खुशी ही होगी।

बचपन में बजट के हिसाब से करती थीं फैशन

कृतिका ने बताया कि बचपन में त्योहारों पर फैशन करना आज की तरह आसान नहीं था। उस समय हर त्योहार के लिए नए कपड़े खरीदना जरूरी नहीं माना जाता था। घर में पहले से मौजूद अच्छे कपड़ों को अलग तरीके से स्टाइल करके और नई ज्वेलरी के साथ पहनकर ही फेस्टिव लुक तैयार कर लिया जाता था।

उनका मानना है कि आज भी फैशन के लिए बहुत ज्यादा खर्च करने की जरूरत नहीं है। अलमारी में मौजूद कपड़ों के साथ थोड़ी क्रिएटिविटी करके नया लुक तैयार किया जा सकता है। एक खूबसूरत दुपट्टा, स्टाइलिश ईयररिंग्स या कुछ अलग एक्सेसरीज पूरे आउटफिट का लुक बदल सकती हैं।

बचपन की यादों में फैशन से ज्यादा परिवार की खुशी

कृतिका के मुताबिक, बचपन में उन्हें यह ज्यादा पता नहीं होता था कि कौन सा रंग ट्रेंड में है या कौन सा आउटफिट फैशन में चल रहा है। जो कपड़े अच्छे लगते थे, उन्हें पहनकर ही खुशी मिल जाती थी।

आज भी उन्हें लगता है कि त्योहारों की असली खूबसूरती फैशन या महंगे कपड़ों में नहीं, बल्कि परिवार के साथ बिताए गए समय और उन खास पलों में है। उनके लिए रक्षाबंधन की बचपन की यादों में कपड़ों से ज्यादा भाई-बहन के साथ बिताया समय और त्योहार की खुशियां महत्वपूर्ण हैं।