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8 साल के मासूमों में बीपी-शुगर की एंट्री! जंक फूड रोक रहा बच्चों की ग्रोथ, हड्डियां भी हो रहीं कमजोर

 

आजकल बच्चों की प्लेट में घर के पौष्टिक खाने की जगह पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, पैकेज्ड स्नैक्स, चॉकलेट और मीठे ड्रिंक्स ने काफी जगह बना ली है। कभी-कभार जंक फूड खाना बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन अगर यह रोज की आदत बन जाए और बच्चे की फिजिकल एक्टिविटी कम हो, तो आगे चलकर वजन और मेटाबॉलिक हेल्थ पर असर पड़ सकता है।

WHO के मुताबिक बचपन का अधिक वजन और मोटापा आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है। 2026 की WHO गाइडलाइन में भी बच्चों के मोटापे से निपटने के लिए सबसे पहले बेहतर खान-पान, शारीरिक गतिविधि और लाइफस्टाइल में बदलाव पर जोर दिया गया है।

जंक फूड बच्चों के लिए क्यों चिंता की बात है?

ज्यादातर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और फास्ट फूड में कैलोरी, नमक, फ्री शुगर और अस्वास्थ्यकर फैट ज्यादा हो सकते हैं, जबकि फाइबर, विटामिन और जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट्स कम होते हैं। इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने भी बच्चों में फास्ट फूड और शुगर वाली ड्रिंक्स की ज्यादा खपत को ज्यादा कैलोरी, शुगर और फैट लेने तथा बढ़े हुए BMI से जोड़ने वाले प्रमाणों का उल्लेख किया है।

1. बढ़ सकता है मोटापे का खतरा

लगातार ज्यादा कैलोरी वाले खाने और मीठे पेय लेने से बच्चों में वजन बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है। बचपन में बढ़ता मोटापा आगे चलकर कई मेटाबॉलिक बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है।

2. ब्लड शुगर पर पड़ सकता है असर

मीठे ड्रिंक्स और ज्यादा फ्री शुगर वाली चीजों का नियमित सेवन डाइट की कुल कैलोरी बढ़ा सकता है और वजन बढ़ने में योगदान दे सकता है। ज्यादा वजन होने पर इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम भी बढ़ सकता है।

3. BP और दिल की सेहत का खतरा

बहुत ज्यादा नमक और असंतुलित डाइट बच्चों की कार्डियोमेटाबॉलिक हेल्थ के लिए चिंता का विषय हो सकती है। हालांकि हर बच्चे में जंक फूड से हाई BP होना तय नहीं है, लेकिन मोटापा और खराब डाइट ऐसे जोखिमों को बढ़ा सकते हैं। IAP की गाइडलाइन भी मोटापे से ग्रस्त बच्चों में हाई BP और ब्लड शुगर जैसी समस्याओं की जांच पर जोर देती है।

4. हड्डियों की ग्रोथ पर भी असर पड़ सकता है

बच्चों की हड्डियों के मजबूत विकास के लिए पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन D और दूसरे जरूरी पोषक तत्व चाहिए। अगर जंक फूड के कारण बच्चे की डाइट में पौष्टिक भोजन की जगह कम हो जाती है, तो जरूरी पोषक तत्वों की कमी का खतरा बढ़ सकता है। IAP ने 2026 के अपने एक्शन प्लान में बच्चों में पोषण संबंधी रिकेट्स और ग्रोथ से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता दी है।

बच्चों को क्या खिलाएं?

बच्चों की डाइट में रोजाना दाल, दूध/दही, पनीर या अन्य प्रोटीन स्रोत, हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज, मेवे और पर्याप्त पानी शामिल करना बेहतर है। पैकेज्ड स्नैक्स और मीठे ड्रिंक्स को रोज की आदत बनाने के बजाय सीमित रखना चाहिए।WHO के अनुसार स्वस्थ डाइट की नींव संतुलन, पर्याप्तता, विविधता और संयम पर आधारित होनी चाहिए। बचपन में बनने वाली खाने की आदतें आगे की जिंदगी में भी बनी रह सकती हैं।

माता-पिता इन संकेतों को नजरअंदाज न करें

अगर बच्चे का वजन तेजी से बढ़ रहा है, वह बहुत कम एक्टिव रहता है, जल्दी थकता है, लगातार मीठे पेय या जंक फूड मांगता है या डॉक्टर को उसके वजन/ग्रोथ को लेकर चिंता है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर बच्चे की ग्रोथ, BMI, BP और अन्य स्वास्थ्य मानकों की जांच कर सकते हैं।