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Tata के पास जाकर भी नहीं बदला Air India, शिवराज सिंह चौहान के बाद अब क्यों फूटा ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर डेविड वॉर्नर का गुस्सा?

 

एअर इंडिया, जो भारत की दूसरी सबसे बड़ी एयरलाइंस मानी जाती है, का प्राइवेटाइजेशन और टाटा ग्रुप के अधिग्रहण के बावजूद स्थिति सुधरती नहीं दिख रही है। सरकारी स्वामित्व से बाहर आने और एक प्रतिष्ठित कारोबारी समूह के हाथों में प्रबंधन सौंपे जाने के बाद उम्मीद थी कि एअर इंडिया की सेवाओं में बड़ा सुधार देखने को मिलेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। आम यात्रियों के साथ-साथ अब केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले और ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज क्रिकेटर डेविड वॉर्नर तक ने एयरलाइन की खामियों पर खुलकर नाराजगी जाहिर की है।

डेविड वॉर्नर ने एयर इंडिया पर उठाए सवाल

हाल ही में डेविड वॉर्नर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पहले ट्विटर) पर अपनी नाराजगी जताते हुए एअर इंडिया की सर्विस पर सवाल उठाए। वॉर्नर ने लिखा कि वे एअर इंडिया की एक ऐसी फ्लाइट में सवार हुए जिसमें उड़ान भरने के लिए पायलट ही मौजूद नहीं था। उन्हें घंटों विमान के उड़ान भरने का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने पूछा कि आखिर ऐसे एयरक्राफ्ट में यात्रियों को सवार क्यों कराया गया जिसमें पायलट ही न हो।

उनकी इस टिप्पणी ने एक बार फिर से एअर इंडिया की सेवा गुणवत्ता पर बहस छेड़ दी है। वॉर्नर जैसे अंतरराष्ट्रीय चेहरा जब सार्वजनिक रूप से किसी एयरलाइन की आलोचना करता है, तो इसका असर न सिर्फ उसकी प्रतिष्ठा पर पड़ता है बल्कि यात्रियों के विश्वास पर भी गहरा असर डालता है।

मौसम बना देरी की वजह

डेविड वॉर्नर के आरोपों के जवाब में एअर इंडिया ने सफाई दी है। एयरलाइन का कहना है कि बेंगलुरु एयरपोर्ट पर खराब मौसम की वजह से पायलट और क्रू मेंबर्स को विमान तक पहुंचने में देरी हुई। एयरलाइंस के मुताबिक, मौसम खराब होने के चलते कई उड़ानों के शेड्यूल प्रभावित हुए और कई फ्लाइट्स को डायवर्ट करना पड़ा। इस वजह से अधिकांश फ्लाइट्स में देरी हुई। हालांकि, इस मामले में विस्तृत जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है।

टाटा ग्रुप भी नहीं कर पाया एअर इंडिया को पूरी तरह सुधार

सरकार ने एअर इंडिया के प्राइवेटाइजेशन की लंबे समय तक कोशिश की थी। आखिरकार टाटा ग्रुप ने 2022 में इसे 18,000 करोड़ रुपये में खरीद लिया। इस डील में लगभग 15,300 करोड़ रुपये का कर्ज टाटा ग्रुप ने चुकाने पर सहमति जताई थी। एअर इंडिया का टाटा ग्रुप के पास वापस जाना "होम कमिंग" यानी घर वापसी के रूप में देखा गया, क्योंकि मूल रूप से एअर इंडिया की स्थापना भी टाटा ग्रुप ने ही की थी।

रतन टाटा के नेतृत्व में इसे उनके जीवनकाल की सबसे बड़ी एक्विजिशन डील माना गया। इसके बाद टाटा ग्रुप ने एअर इंडिया को मुख्य ब्रांड बनाते हुए अपने अन्य एयरलाइंस जैसे विस्तारा और एयरएशिया इंडिया का विलय इसमें शुरू कर दिया। इस विलय के बाद टाटा ग्रुप के पास एक मजबूत एविएशन पोर्टफोलियो बन गया।

सुधार के प्रयास जारी, लेकिन सेवा गुणवत्ता अब भी चिंता का विषय

टाटा ग्रुप ने एअर इंडिया को बेहतर बनाने के कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें बेहतर किचन सुविधाएं, नए विमानों की खरीद, पुराने विमानों के इंटीरियर को बदलना और ब्रांडिंग को नया रूप देना शामिल है। इसके अलावा, यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए कई अन्य प्रयास भी किए जा रहे हैं।

हालांकि, ग्राउंड लेवल पर यात्रियों को मिलने वाली सेवा में सुधार अभी बहुत धीमा है। फ्लाइट में देरी, खराब केबिन सर्विस, कम्युनिकेशन गैप जैसी समस्याएं अब भी आम हैं। यात्रियों की शिकायतें और असंतोष लगातार सामने आ रहे हैं, जो एअर इंडिया के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती है।

निष्कर्ष

डेविड वॉर्नर जैसे अंतरराष्ट्रीय हस्ती की नाराजगी इस बात का संकेत है कि एअर इंडिया को अभी भी सेवा सुधार के क्षेत्र में लंबा सफर तय करना है। टाटा ग्रुप ने कंपनी को नई दिशा देने की कोशिश जरूर की है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी में बदलाव लाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

अगर एअर इंडिया को वाकई में एक ग्लोबल स्टैंडर्ड की एयरलाइन बनाना है, तो उसे न केवल तकनीकी सुधार करने होंगे, बल्कि यात्रियों के प्रति अपने रवैये और सेवा गुणवत्ता में भी बड़ा बदलाव लाना होगा। जब तक यात्रियों का भरोसा नहीं जीता जाता, तब तक एअर इंडिया की उड़ान ऊंचाई पर नहीं पहुंच सकेगी।