ICAI के 64वें कैंपस प्लेसमेंट में बड़ा उछाल, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए बढ़े रोजगार अवसर
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के 64वें कैंपस प्लेसमेंट कार्यक्रम में इस वर्ष चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CAs) के लिए रोजगार के अवसरों में शानदार इजाफा दर्ज किया गया है। इस प्लेसमेंट सीजन में देशभर की बड़ी कंपनियों ने भाग लिया और योग्य उम्मीदवारों को आकर्षक पैकेज के साथ नौकरी के प्रस्ताव दिए।
इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित यह कैंपस प्लेसमेंट देश के सबसे प्रतिष्ठित प्रोफेशनल हायरिंग प्लेटफॉर्म्स में से एक माना जाता है, जहां हर साल नए क्वालिफाइड चार्टर्ड अकाउंटेंट्स को कॉरपोरेट सेक्टर में प्रवेश का अवसर मिलता है।
इस वर्ष के प्लेसमेंट सत्र में वित्त, बैंकिंग, कंसल्टिंग, ऑडिट, टैक्सेशन और फिनटेक सेक्टर की प्रमुख कंपनियों ने सक्रिय भागीदारी दिखाई। रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में इस बार न केवल कंपनियों की संख्या बढ़ी, बल्कि औसत और उच्चतम पैकेज में भी सुधार देखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी से बढ़ते कॉरपोरेट विस्तार और वित्तीय अनुपालन (compliance) की बढ़ती जरूरतों के कारण चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की मांग लगातार बढ़ रही है। कंपनियों को ऐसे पेशेवरों की आवश्यकता है जो अकाउंटिंग, टैक्सेशन और फाइनेंशियल मैनेजमेंट में मजबूत पकड़ रखते हों।
इस प्लेसमेंट ड्राइव में कई उम्मीदवारों को मल्टीनेशनल कंपनियों और बड़े कॉरपोरेट हाउसेज़ से ऑफर मिले हैं। खास बात यह रही कि कुछ उम्मीदवारों को एक से अधिक ऑफर भी प्राप्त हुए, जिससे चयन प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा और अवसर दोनों बढ़े।
आईसीएआई के अनुसार, इस बार के प्लेसमेंट में डिजिटल स्किल्स वाले उम्मीदवारों को विशेष प्राथमिकता दी गई। डेटा एनालिटिक्स, फाइनेंशियल मॉडलिंग और टेक-ड्रिवन अकाउंटिंग टूल्स में दक्षता रखने वाले चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की मांग अधिक देखी गई।
इसके अलावा, स्टार्टअप इकोसिस्टम और फिनटेक कंपनियों ने भी इस प्लेसमेंट में सक्रिय भागीदारी निभाई, जिससे नए CA प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के विकल्प और अधिक विविध हो गए हैं। यह रुझान दर्शाता है कि पारंपरिक ऑडिट और टैक्स भूमिकाओं के अलावा अब CAs के लिए नए क्षेत्रों में भी अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि आने वाले वर्षों में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की मांग और अधिक बढ़ सकती है, खासकर जब भारत में टैक्स सिस्टम और कॉरपोरेट गवर्नेंस और अधिक सख्त और तकनीक आधारित होता जा रहा है।