Government Jobs: इन राज्यों में सरकारी नौकरी का दबदबा, जानें राजस्थान, यूपी और बिहार की क्या है स्थिति
भारत में सरकारी नौकरी को आज भी युवाओं के बीच करियर का एक आकर्षक विकल्प माना जाता है। नौकरी की स्थिरता, नियमित वेतन और अन्य सुविधाओं के कारण हर साल लाखों युवा सरकारी पदों के लिए तैयारी करते हैं। हालांकि, देश के अलग-अलग राज्यों में रोजगार के क्षेत्र में सरकारी नौकरियों की हिस्सेदारी एक जैसी नहीं है। DataForIndia.com के 2025 के राज्यवार आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, पूर्वोत्तर के राज्यों में सरकारी क्षेत्र की हिस्सेदारी अधिक है, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे बड़े राज्यों में यह अनुपात अपेक्षाकृत कम है।
पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में सरकारी रोजगार की हिस्सेदारी ज्यादा
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, पूर्वोत्तर के राज्यों में सरकारी क्षेत्र रोजगार का एक महत्वपूर्ण आधार है। यहां निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसरों की उपलब्धता और आर्थिक ढांचे से जुड़े कारणों के चलते सरकारी नौकरियों की भूमिका अहम मानी जाती है।
आंकड़ों में पूर्वोत्तर के राज्यों की हिस्सेदारी 39.3 प्रतिशत बताई गई है। मिजोरम में यह आंकड़ा 37.1 प्रतिशत है। वहीं, जम्मू-कश्मीर में कार्यबल का 30.7 प्रतिशत और हिमाचल प्रदेश में 24.9 प्रतिशत हिस्सा सरकारी क्षेत्र में काम करता है।
राजस्थान में कितने लोग सरकारी क्षेत्र में कार्यरत?
राजस्थान में सरकारी नौकरियों की हिस्सेदारी 11.6 प्रतिशत दर्ज की गई है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, यह अनुपात मध्य प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से अधिक है।
राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं की बड़ी संख्या को देखते हुए भर्ती परीक्षाएं और सरकारी पदों पर नियुक्तियां रोजगार से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बनी रहती हैं। हालांकि, सरकारी क्षेत्र में हिस्सेदारी का प्रतिशत यह नहीं बताता कि किसी राज्य में कुल कितने सरकारी कर्मचारी हैं या हर साल कितनी नई नौकरियां निकलती हैं।
दक्षिण भारत के राज्यों की क्या है स्थिति?
दक्षिण भारत के राज्यों में सरकारी रोजगार की हिस्सेदारी अलग-अलग है। रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश में यह आंकड़ा 14.8 प्रतिशत और तमिलनाडु में 14.5 प्रतिशत है। वहीं, कर्नाटक में सरकारी क्षेत्र की हिस्सेदारी 9.7 प्रतिशत बताई गई है।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण भारत के राज्यों में भी सरकारी रोजगार का अनुपात एक जैसा नहीं है। रोजगार की स्थिति को समझने के लिए सरकारी क्षेत्र के साथ-साथ निजी क्षेत्र, उद्योग, सेवा क्षेत्र और स्वरोजगार के अवसरों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
यूपी और बिहार में सरकारी नौकरियों की हिस्सेदारी कम
आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश और बिहार में कार्यबल के मुकाबले सरकारी क्षेत्र में रोजगार की हिस्सेदारी अपेक्षाकृत कम है। बिहार में यह आंकड़ा 6.9 प्रतिशत, जबकि उत्तर प्रदेश में 7.1 प्रतिशत बताया गया है।
वहीं, मध्य प्रदेश में सरकारी रोजगार की हिस्सेदारी 10.3 प्रतिशत और छत्तीसगढ़ में 14.4 प्रतिशत दर्ज की गई है। इन आंकड़ों के आधार पर राज्यों के रोजगार ढांचे में अंतर साफ दिखाई देता है।
देश के राज्यों में सरकारी नौकरियों की हिस्सेदारी
DataForIndia.com के 2025 के आंकड़ों के हवाले से दी गई सूची के अनुसार, राज्यों और क्षेत्रों में सरकारी रोजगार की हिस्सेदारी इस प्रकार है:
| राज्य या क्षेत्र |
सरकारी रोजगार की हिस्सेदारी |
| पूर्वोत्तर के राज्य |
39.3% |
| मिजोरम |
37.1% |
| जम्मू-कश्मीर |
30.7% |
| हिमाचल प्रदेश |
24.9% |
| आंध्र प्रदेश |
14.8% |
| तमिलनाडु |
14.5% |
| छत्तीसगढ़ |
14.4% |
| राजस्थान |
11.6% |
| ओडिशा |
10.4% |
| मध्य प्रदेश |
10.3% |
| कर्नाटक |
9.7% |
| महाराष्ट्र |
9.5% |
| गुजरात |
8.1% |
| उत्तर प्रदेश |
7.1% |
| बिहार |
6.9% |
क्या बताते हैं ये आंकड़े?
इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि भारत में रोजगार के अवसरों और सरकारी क्षेत्र की भूमिका में राज्यों के बीच अंतर है। कुछ क्षेत्रों में सरकारी नौकरियों की हिस्सेदारी अधिक है, जबकि कई बड़े राज्यों में कुल कार्यबल के मुकाबले इसका अनुपात कम है।
हालांकि, इन प्रतिशतों को समझते समय रिपोर्ट की परिभाषा, आंकड़ों के स्रोत और रोजगार की श्रेणियों पर ध्यान देना जरूरी है। सरकारी नौकरियों की कम हिस्सेदारी का अर्थ यह नहीं है कि किसी राज्य में कुल रोजगार के अवसर भी कम हैं, क्योंकि निजी क्षेत्र और स्वरोजगार भी रोजगार के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।