गुजरात की कंपनियों में यूपी के 10 हजार युवाओं की होगी सीधी एंट्री! पहले मिलेगी ट्रेनिंग फिर पक्की नौकरी
महाराष्ट्र में भाषा को लेकर जारी बहस के बीच गुजरात के सूरत से रोजगार और स्किल डेवलपमेंट को लेकर एक अलग तस्वीर सामने आई है। सूरत में उत्तर प्रदेश के 10 हजार युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देकर दक्षिण गुजरात की इंडस्ट्री में रोजगार से जोड़ने की तैयारी है। इसके लिए साउथ गुजरात चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज यानी SGCCI और उत्तर प्रदेश सरकार के श्रम एवं रोजगार विभाग के बीच समझौता हुआ है।
10 हजार युवाओं को मिलेगी स्किल ट्रेनिंग
दक्षिण गुजरात की इंडस्ट्री में लंबे समय से दूसरे राज्यों से आए लाखों लोग काम कर रहे हैं। हालांकि, उद्योगों के सामने कुशल कर्मचारियों की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इसी समस्या को दूर करने के लिए SGCCI और उत्तर प्रदेश सरकार ने यह पहल शुरू की है।
योजना के पहले चरण में उत्तर प्रदेश के 10 हजार युवाओं को तकनीकी और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जाएगी। ट्रेनिंग के बाद उन्हें दक्षिण गुजरात की अलग-अलग इंडस्ट्री में रोजगार से जोड़ने की योजना है। युवाओं की ट्रेनिंग संबंधित इंडस्ट्री और जॉब रोल की जरूरत के अनुसार होगी। सामान्य तौर पर स्किल डेवलपमेंट और अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम 3 से 6 महीने का हो सकता है।
स्किल्ड वर्कफोर्स की कमी होगी दूर
सूरत देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में शामिल है। यहां टेक्सटाइल, डायमंड, लैबग्रोन डायमंड और मैन्युफैक्चरिंग जैसे कई बड़े सेक्टर हैं। इन उद्योगों में देश के अलग-अलग राज्यों से बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं।
SGCCI के मुताबिक, बाढ़, कोरोना महामारी या दूसरी प्राकृतिक आपदाओं जैसी परिस्थितियों में कई प्रवासी कामगार अपने गांव लौट जाते हैं। इससे उद्योगों में अचानक कर्मचारियों की कमी हो जाती है और उत्पादन प्रभावित होता है। नई पहल का उद्देश्य ऐसे हालात में उद्योगों को लगातार प्रशिक्षित और कुशल वर्कफोर्स उपलब्ध कराना है।
ट्रेनिंग के बाद गुजरात में रोजगार
इस योजना के तहत सूरत के नानपुरा स्थित SGCCI सेंटर, उत्तर प्रदेश सरकार के ट्रेनिंग सेंटर और दक्षिण गुजरात की स्थानीय इंडस्ट्रीज को एक साथ जोड़ा जाएगा। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद युवाओं को उनकी योग्यता और संबंधित इंडस्ट्री की जरूरत के अनुसार नौकरी दिलाने की कोशिश की जाएगी।
SGCCI के वाइस प्रेसिडेंट रविराज देसाई के मुताबिक, दक्षिण गुजरात की इंडस्ट्री को अब केवल मजदूरों की नहीं, बल्कि प्रशिक्षित और कुशल कर्मचारियों की जरूरत है। इसी वजह से युवाओं को पहले से इंडस्ट्री की जरूरत के हिसाब से तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
प्रवासी कामगारों को स्थायी बसाने की भी तैयारी
इस पहल का उद्देश्य केवल युवाओं को नौकरी देना नहीं है। SGCCI की कोशिश है कि रोजगार मिलने के बाद इन कामगारों को गुजरात में स्थायी रूप से बसने का अवसर भी मिले।
गुजरात की इंडस्ट्रियल पॉलिसी में प्रवासी कामगारों के लिए स्थायी आवास की व्यवस्था पर भी जोर दिया गया है। उधना और सचिन जैसे इंडस्ट्रियल क्लस्टर्स में काम करने वाले स्किल्ड वर्कर्स के लिए आवास विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसका मकसद यह है कि कामगार अपने परिवार के साथ गुजरात में रह सकें और रोजगार के लिए बार-बार अपने गांव आने-जाने की जरूरत न पड़े।
दक्षिण गुजरात में 65 लाख से ज्यादा प्रवासी वर्कर्स
SGCCI के मुताबिक, दक्षिण गुजरात की इंडस्ट्री में 65 लाख से ज्यादा प्रवासी स्किल्ड वर्कर्स होने का अनुमान है। ऐसे में उन्हें लंबे समय तक उद्योगों से जोड़कर रखना इंडस्ट्री और कामगार दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।
प्रशिक्षित कर्मचारी लंबे समय तक किसी कंपनी के साथ जुड़े रहते हैं तो उनकी कार्यक्षमता बढ़ती है। इससे उत्पादन में निरंतरता बनी रहती है और कंपनियों को बार-बार नए कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने की जरूरत भी कम होती है।
आगे बिहार, झारखंड और ओडिशा तक विस्तार
रविराज देसाई ने इस पहल को एक पायलट मॉडल बताया है। पहले चरण में 10 हजार युवाओं को दो साल से कम समय में स्थायी रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद इसी मॉडल को दूसरे राज्यों तक ले जाने की योजना है।
उत्तर प्रदेश के बाद बिहार, झारखंड और ओडिशा के युवाओं को भी स्किल ट्रेनिंग देकर दक्षिण गुजरात की इंडस्ट्री से जोड़ने के लिए ऐसे समझौते किए जा सकते हैं।
रविराज देसाई ने इस पहल के पीछे इजरायल का उदाहरण भी दिया। उनके मुताबिक, इजरायल की जरूरत के अनुसार उत्तर प्रदेश के युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देकर तैयार किया गया था। इसी तरह के मॉडल से प्रेरणा लेकर दक्षिण गुजरात की इंडस्ट्री की जरूरत के मुताबिक युवाओं को प्रशिक्षित करने की योजना बनाई गई है।
कुल मिलाकर, जब देश के कई हिस्सों में भाषा और क्षेत्र को लेकर बहस चल रही है, उसी समय सूरत से रोजगार और स्किल को केंद्र में रखकर एक अलग मॉडल सामने आया है। इस पहल से जहां हजारों युवाओं को रोजगार मिलने की उम्मीद है, वहीं दक्षिण गुजरात की इंडस्ट्री को भी लंबे समय तक प्रशिक्षित और कुशल वर्कफोर्स मिल सकता है।