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भारत में जलवायु परिवर्तन की चेतावनी, 2030 तक हीटवेव और अत्यधिक बरसात की घटनाओं में भारी वृद्धि की आशंका

 

भारत में ग्लोबल वार्मिंग और घटते वन क्षेत्र के चलते जलवायु परिवर्तन की गति लगातार बढ़ती जा रही है। हालिया रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर वर्तमान परिस्थिति में सुधार नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में देश के लिए गंभीर पर्यावरणीय संकट पैदा हो सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, साल 2030 तक हीटवेव यानी लू के दिनों की संख्या दोगुनी हो जाएगी। इसका मतलब है कि देश के कई हिस्सों में गर्मी और उच्च तापमान की तीव्रता बढ़ेगी, जिससे लोगों की जीवनशैली और स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों ने कहा है कि बढ़ती गर्मी के कारण कृषि उत्पादन, जल संसाधन और ऊर्जा की मांग पर भी गंभीर असर होगा।

सिर्फ गर्मी ही नहीं, बल्कि अत्यधिक वर्षा की घटनाओं में भी तेजी से वृद्धि होने की संभावना है। कई क्षेत्रों में अचानक और भारी बारिश से बाढ़, जलभराव और मिट्टी कटाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इस स्थिति से न केवल शहरों में अवसंरचना पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण इलाकों में भी किसानों और स्थानीय आबादी के जीवन पर संकट उत्पन्न होगा।

वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत में वन क्षेत्रों में लगातार कमी आने से जलवायु परिवर्तन की प्रक्रिया तेज हो रही है। वन न केवल कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं, बल्कि मिट्टी और जल संसाधनों की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वनों की कटाई और शहरीकरण के बढ़ते दबाव से तापमान और चरम मौसम की घटनाएं और भी अधिक बढ़ रही हैं।

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन को रोकने के लिए तत्काल और ठोस कदम उठाना बेहद आवश्यक है। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा का अधिक उपयोग, वन क्षेत्र की सुरक्षा और विस्तार, तथा कार्बन उत्सर्जन में कमी जैसे उपाय शामिल हैं। विशेषज्ञों ने कहा कि यदि इन कदमों पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में गर्मी और बारिश की चरम घटनाओं से मानव स्वास्थ्य, कृषि और अर्थव्यवस्था पर गंभीर संकट आ सकता है।

सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों से अपील की गई है कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में जलवायु अनुकूल नीतियों को लागू किया जाए। इसमें शहरों में हरित क्षेत्रों का विकास, पानी के संरक्षण की योजनाएं, और किसानों के लिए टिकाऊ कृषि तकनीक को बढ़ावा देना शामिल है।

कुल मिलाकर, रिपोर्ट के अनुसार भारत के लिए जलवायु परिवर्तन एक अत्यंत गंभीर चुनौती बन चुका है। हीटवेव और अत्यधिक वर्षा जैसी घटनाओं में वृद्धि को रोकने के लिए तत्काल कार्यवाई न करने पर न केवल पर्यावरण प्रभावित होगा, बल्कि जनजीवन और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था भी जोखिम में आ सकती है। यह चेतावनी देश के नीति-निर्माताओं और नागरिकों दोनों के लिए सतर्कता और सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता को स्पष्ट करती है।