वात दोष को संतुलित करने में लाभकारी है त्रिफला, जान लें सेवन का सही तरीका
नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। मानव शरीर को सुचारू रूप से चलाने के लिए तीन दोषों का संतुलित रहना बहुत जरूरी है, जिसमें वात, पित्त और कफ शामिल है।
सर्दियों में प्राकृतिक रूप से शरीर में वात दोष की वृद्धि होती है और जोड़ों में दर्द, पेट से जुड़ी समस्या और हड्डियों से जुड़े रोग परेशान करने लगते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक आयुर्वेदिक औषधि वात दोष को संतुलित करने में सहायक है? हम बात कर रहे हैं त्रिफला की, जो सिर्फ पेट से जुड़ी समस्याओं से नहीं बल्कि वात को संतुलित करती है। हालांकि, इसके सेवन करने का तरीका भी इसे प्रभावित करता है।
आयुर्वेद में माना गया है कि वात की वृद्धि को रोकना है तो त्रिफला का सेवन वसा के साथ करना लाभकारी होगा। वसा के साथ मिलकर त्रिफला ज्यादा तेजी से काम करता है, जैसे घी के साथ त्रिफला का सेवन। रात के समय एक गिलास गुनगुने पानी में आधा से एक चम्मच त्रिफला और शुद्ध देसी गाय का घी मिलाकर लेना चाहिए। इससे आंतों में चिकनाहट पैदा होती है और विषाक्त पदार्थों को निकालने में आसानी होती है।
दूसरा तरीका है 'त्रिफला घृत'। आयुर्वेद में 'त्रिफला घृत' को औषधि माना गया है, जिसमें घी को कई औषधियों के साथ मिलाकर पकाया जाता है। अगर बढ़ते वात दोष से परेशान हैं तो रात के समय 'त्रिफला घृत' का सेवन कर सकते हैं। ये वात को संतुलित करने के साथ पेट से जुड़े रोगों से भी निजात दिलाएगा।
तीसरा तरीका है अरंडी के तेल के साथ त्रिफला का सेवन। वात की वृद्धि के साथ पेट में कब्ज की समस्या परेशान करने लगती है। इसके लिए अरंडी के तेल की कुछ बूंदें त्रिफला चूर्ण के साथ मिलाकर पानी के साथ ली जा सकती हैं। इससे आंतों की गतिशीलता बढ़ती है। ध्यान रखने वाली बात ये है कि सर्दियों में शाम और रात के वक्त वात प्राकृतिक रूप से बढ़ने लगता है और ऐसे में रात का खाना खाने के बाद 2 घंटे के गैप के साथ त्रिफला का सेवन करें।
वात की वृद्धि से शरीर में जकड़न, कब्ज, तनाव, नींद न आने की परेशानी, जोड़ों में दर्द, बेचैनी और शरीर में कंपन पैदा होने लगता है। ये मानसिक थकान से लेकर शारीरिक दर्द तक को बढ़ा देता है।
--आईएएनएस
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