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यूडीएफ ने सरकार के नीट काउंसलिंग सुधारों का किया स्वागत, एक देश-एक काउंसलिंग की मांग की

 

नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा नीट-यूजी काउंसलिंग प्रक्रिया में हाल ही में घोषित सुधारों का स्वागत किया है। संगठन ने इसे छात्रों के हित में उठाया गया एक अहम कदम बताया है, जिससे देश भर के लाखों मेडिकल उम्मीदवारों की अनावश्यक यात्रा, बार-बार रिपोर्टिंग, प्रक्रिया में होने वाली देरी और तनाव कम होगा।

यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट के चेयरपर्सन डॉ. लक्ष्य मित्तल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र लिखकर सरकार की इस पहल की सराहना की है। साथ ही, उन्होंने मंत्रालय से आग्रह किया है कि 'एक देश, एक काउंसलिंग' को लागू करके अगला बड़ा सुधार किया जाए।

डॉ. मित्तल ने कहा, "हाल ही में किए गए सुधार स्वागतयोग्य कदम हैं, लेकिन मेडिकल एडमिशन में सबसे बड़ी स्ट्रक्चरल समस्या अभी भी अनसुलझी है। ऑल इंडिया कोटा और अलग-अलग राज्यों द्वारा स्वतंत्र रूप से चलाई जाने वाली कई काउंसलिंग प्रक्रियाएं अभी भी जारी हैं।"

फिलहाल, नीट-क्वालिफाइड उम्मीदवारों को ऑल इंडिया कोटा और अलग-अलग राज्यों की काउंसलिंग अथॉरिटी के लिए अलग-अलग रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है। इन सभी के शेड्यूल, पोर्टल, फीस और रिपोर्टिंग प्रक्रियाएं अलग-अलग होती हैं। ये काउंसलिंग प्रक्रियाएं स्वतंत्र रूप से चलती हैं, इसलिए उम्मीदवार अक्सर एक ही समय में कई काउंसलिंग राउंड में हिस्सा लेते हैं और अपनी पसंद के विकल्प का इंतजार करते हुए अलग-अलग जगहों पर कुछ समय के लिए सीटें रोककर रख सकते हैं।

डॉ मित्तल ने आगे कहा, "इस बिखरे हुए सिस्टम के कारण बेवजह सीटें ब्लॉक होती हैं, अपग्रेडेशन में देरी होती है, अलॉटमेंट में बार-बार बदलाव होता है, सीटें खाली रह जाती हैं, जिन्हें भरा जा सकता था, और काबिल उम्मीदवारों के लिए लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रहती है।"

यूडीएफ ने प्रस्ताव दिया है कि मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (एमसीसी) एक सिंगल नेशनल काउंसलिंग पोर्टल बनाए। इस पोर्टल में ऑल इंडिया कोटा, स्टेट कोटा, सेंट्रल यूनिवर्सिटीज, डीम्ड यूनिवर्सिटीज और इसमें शामिल होने वाले दूसरे संस्थानों को एक ही प्लेटॉर्म पर लाया जाएगा।

इस प्रस्तावित सिस्टम के तहत कैंडिडेट्स को सिर्फ एक बार रजिस्ट्रेशन करना होगा, एक बार डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरा करना होगा, एक ही प्रेफरेंस लिस्ट जमा करनी होगी और वे किसी भी समय सिर्फ एक सीट ही अपने पास रख पाएंगे।

यूडीएफ के अनुसार, इस तरह के सिस्टम से सीट ब्लॉकिंग को असरदार ढंग से रोका जा सकेगा, सीट के इस्तेमाल को बेहतर बनाया जा सकेगा, काउंसलिंग में लगने वाले समय को कम किया जा सकेगा, पारदर्शिता बढ़ाई जा सकेगी और स्टूडेंट्स व उनके परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक और मानसिक बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

डॉ. मित्तल ने कहा, "सरकार ने नीट काउंसलिंग को बेहतर बनाने की दिशा में पहले ही एक अहम कदम उठाया है। हमें पूरी उम्मीद है कि यह सिलसिला जारी रहेगा और आखिरकार एक ऐसा 'वन नेशन, वन काउंसलिंग' सिस्टम बनेगा जो पूरी तरह से इंटीग्रेटेड हो और जिसमें पारदर्शिता, कुशलता, मेरिट और देश में हर मेडिकल सीट का सही इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके।"

इस प्रस्ताव को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सेक्रेटरी, एडिशनल सेक्रेटरी (मेडिकल एजुकेशन) और मेडिकल काउंसलिंग कमेटी को भी विचार करने के लिए भेजा गया है।

--आईएएनएस

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