हार्ट अटैक के बाद का सबसे बड़ा खतरा! जानिए क्या है कार्डियोजेनिक शॉक और कैसे पहचानें इसके शुरुआती संकेत
हार्ट अटैक एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, लेकिन इससे जुड़ी एक और स्थिति ऐसी है, जिसमें दिल शरीर की जरूरत के मुताबिक पर्याप्त मात्रा में खून पंप नहीं कर पाता। इसे कार्डियोजेनिक शॉक कहा जाता है। यह एक जानलेवा स्थिति हो सकती है और इसमें मरीज को तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत होती है।
आखिर कार्डियोजेनिक शॉक में शरीर के अंदर क्या होता है?
कार्डियोजेनिक शॉक अक्सर गंभीर हार्ट अटैक के बाद हो सकता है। जब हार्ट अटैक की वजह से दिल की मांसपेशियों को काफी नुकसान पहुंचता है, तो दिल की पंप करने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है। इससे शरीर में ब्लड फ्लो और ब्लड प्रेशर कम हो सकता है।जब शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंचती, तो किडनी, दिमाग और दूसरे अंगों के काम करने पर भी असर पड़ सकता है। यही वजह है कि कार्डियोजेनिक शॉक को मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है।हालांकि, इसका कारण केवल हार्ट अटैक ही नहीं होता। दिल की मांसपेशियों में सूजन यानी मायोकार्डिटिस, गंभीर हार्ट फेलियर और कुछ गंभीर हार्ट वाल्व संबंधी समस्याएं भी ऐसी स्थिति का कारण बन सकती हैं।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
कार्डियोजेनिक शॉक के लक्षण अचानक सामने आ सकते हैं। कई बार इन्हें सामान्य कमजोरी या थकान समझने की गलती हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति में नीचे दिए गए लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत मेडिकल सहायता लें:
- सीने में तेज दर्द, दबाव या भारीपन
- सांस लेने में परेशानी या अचानक सांस फूलना
- बहुत ज्यादा पसीना आना और त्वचा का ठंडा या चिपचिपा होना
- नब्ज का बहुत तेज, कमजोर या अनियमित होना
- अचानक चक्कर आना या अत्यधिक कमजोरी महसूस होना
- भ्रम की स्थिति, बेचैनी या बात समझने में परेशानी
- अत्यधिक सुस्ती या बेहोशी
खासकर अगर ये लक्षण सीने में दर्द या हार्ट अटैक के संकेतों के साथ दिखाई दें, तो घर पर इंतजार करने के बजाय तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद लेनी चाहिए।
इलाज में हर मिनट क्यों अहम है?
कार्डियोजेनिक शॉक में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। जितनी देर शरीर के जरूरी अंगों तक पर्याप्त खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंचती, उतना ही अंगों को नुकसान होने का खतरा बढ़ सकता है।
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार ECG, इकोकार्डियोग्राफी और दूसरी जरूरी जांच कर सकते हैं। इलाज का उद्देश्य ब्लड फ्लो और ब्लड प्रेशर को संभालना और दिल तक रक्त की आपूर्ति को बेहतर करना होता है।
कुछ मरीजों में दवाओं और विशेष मेडिकल सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है, जबकि अगर कोरोनरी आर्टरी में गंभीर ब्लॉकेज हो तो डॉक्टर इमरजेंसी एंजियोप्लास्टी जैसे उपचार का फैसला कर सकते हैं। गंभीर मामलों में मरीज को एडवांस कार्डियक केयर और मॉनिटरिंग की जरूरत पड़ सकती है।
सावधानी और तुरंत मदद है सबसे जरूरी
कार्डियोजेनिक शॉक जैसी स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात है इसके संकेतों को पहचानना और इलाज में देरी न करना। अगर किसी व्यक्ति को सीने में तेज दर्द, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी या अचानक गंभीर कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत स्थानीय इमरजेंसी मेडिकल सेवा से संपर्क करें।
दिल से जुड़ी किसी भी गंभीर इमरजेंसी में खुद से इलाज करने या लक्षणों के अपने-आप ठीक होने का इंतजार करने के बजाय डॉक्टर की मदद लेना जरूरी है। समय पर मेडिकल उपचार कई मामलों में गंभीर जटिलताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।