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सूरत: न्यू सिविल हॉस्पिटल में हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था, नवजात शिशुओं के लिए आरएफआईडी सिस्टम लागू

 

गांधीनगर, 6 जुलाई (आईएएनएस)। गुजरात के सूरत में नवजात शिशुओं की चोरी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए एक ठोस कदम उठाया गया है। दरअसल, सूरत स्थित न्यू सिविल हॉस्पिटल ने नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में नवजात शिशुओं की चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए रेडियो-फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) आधारित सिक्योरिटी सिस्टम शुरू किया है। इस सिस्टम की मदद से अगर कोई बिना इजाजत हरकत होती है तो अलार्म बजने लगता है।

इसको लेकर डॉक्टरों का कहना है कि कड़े नियमों और पहचान की पुष्टि से बच्चों की सुरक्षा बेहतर होगी और मेडिकल ट्रांसफर के दौरान उन्हें सावधानी से संभाला जा सकेगा। सोमवार को इसी सिस्टम को लेकर समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए नई सिविल अस्पताल के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. लक्ष्मण ने कहा कि एनआईसीयू के बाहर आरएफआईडी मशीन लगाया गया है। इसका उद्देश्य नवजात शिशुओं की चोरी पर रोक लगाना है।

उन्होंने बताया कि एनआईसीयू में दाखिल बच्चों के हाथ पर एक टैग लगाया गया है ताकि अगर कोई भी व्यक्ति बच्चों को लेकर बाहर जाता है, तो निकास द्वार पर लगे आरएफआईडी-मशीन से बजर बजेगा और तत्तकाल सिक्योरिटी अलर्ट मोड में आ जाएगी। डॉक्टर लक्ष्मण ने बताया कि अस्पताल में पहले भी शिशुओं की चोरी की घटना घट चुकी है। इसलिए अब आरएफआईडी मशीन लगाई गई है।

नई सिविल अस्पताल के बाल रोग विभाग में बतौर अध्यापक एवं हेड ऑफ द डिपार्टमेंट डॉक्टर जिगिशा पाटड़िया ने बताया कि जो नवजात शिशु आईसीयू के अंदर होते हैं। अगर उन्हें किसी भी तरह से रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा आईसीयू के बाहर ले लिया जाता है, तो ऐसे में आरएफआईडी मशीन के साथ जो एक टैग होता है, जो जीवित व्यक्ति पर लगता है, इस टैग को बच्चों पर लगाएंगे हम, तो जैसे ही वो बच्चे हमारी जानकारी के बिना कोई बाहर लेके जाएंगे, तो तुरंत ही एक सिक्योरिटी अलार्म बजेगा, जिसकी वजह से ड्यूटी पर तैनात स्टाफ एवं जो सिक्योरिटी स्टाफ है, वो अलर्ट मोड में आ जाएंगे।

उन्होंने बताया कि कई बार हमें बच्चे को एमआरआई या सीटी स्कैन करने के लिए बाहर ले जाना पड़ता है। ऐसे में बच्चे को आईसीयू के बाहर ले जाने से पहले हमें बच्चे की पूरी जानकारी सिक्योरिटी स्टाफ के साथ साझा करनी होगी ताकि सिक्योरिटी स्टाफ जैसे ही बजर बजता है, तो जांच के लिए बाहर ले जाने वाले एक बच्चे के साथ एक डॉक्टर भी जाएगा। वह इस बच्चे के बारे में पुष्टि करेगा सिक्योरिटी स्टाफ से और फिर बच्चे को एमआरआई या सीटी स्कैन के लिए ले जाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में ऐसे बच्चे जो हमारे यहां आईसीयू में एडमिट हैं, उनकी सिक्योरिटी को ध्यान में रखते हुए कोई भी बच्चा सिक्योरिटी स्टाफ या हॉस्पिटल स्टाफ की नजर से बाहर नहीं जा सकता है। बच्चों की सुरक्षा का प्रण लेते हुए सोमवार को अस्पताल में यह आरएफआईडी मशीन लगाई गई है।

सुरक्षा व्यवस्था के साथ कितने बच्चे अस्पताल में रह सकते हैं, इसका जवाब देते हुए डॉक्टर जिगिशा ने बताया कि नई सिविल अस्पताल में सिर्फ सूरत ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण गुजरात और गुजरात से सटे महाराष्ट्र के इलाकों से भी यहां पेसेंट आते हैं। इसी के तहत अस्पताल में 42 बेड की इजाजत है, लेकिन बच्चे और बाहर से रेफर होकर आए मरीजों के लिए अस्पताल में 60 बेड की व्यवस्था है। इसके लिए एनआईसीयू की एक अलग से टीम मौजूद है, जो 24*7 बच्चों के इलाज के साथ देखरेख करती है।

--आईएएनएस

डीके/वीसी