Vitamin B12 की कमी का मिला सुपरफूड इलाज! स्पिरुलिना दूर करेगा थकान और कमजोरी, जानें फायदे
आज के समय में विटामिन B12 की कमी एक आम समस्या बनती जा रही है। खासकर शाकाहारी और वीगन डाइट लेने वाले लोगों में इसकी कमी का खतरा अधिक रहता है। आमतौर पर B12 के लिए दूध, अंडे, मांस और मछली जैसे खाद्य पदार्थों या फिर सप्लीमेंट्स का सहारा लिया जाता है। लेकिन वैज्ञानिकों ने अब एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो भविष्य में शाकाहारी लोगों के लिए B12 का नया और टिकाऊ स्रोत बन सकती है।
वैज्ञानिकों ने खास तकनीक की मदद से नीले-हरे शैवाल यानी स्पिरुलिना (Spirulina) में एक्टिव विटामिन B12 बनाने में सफलता हासिल की है। खास बात यह है कि नई तकनीक से तैयार किए गए स्पिरुलिना में B12 की मात्रा बीफ में मिलने वाली मात्रा के बराबर या उससे ज्यादा पाई गई। यह रिसर्च Discover Food नाम के साइंटिफिक जर्नल में प्रकाशित हुई है।
शरीर के लिए क्यों जरूरी है Vitamin B12?
विटामिन B12 शरीर के लिए बेहद जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट है। यह कई महत्वपूर्ण शारीरिक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है।
- लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण: B12 शरीर में रेड ब्लड सेल्स बनाने में मदद करता है। इसकी कमी से एनीमिया की समस्या हो सकती है।
- नर्वस सिस्टम के लिए जरूरी: यह दिमाग और नसों के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कमी होने पर झनझनाहट, सुन्नपन और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
- ऊर्जा उत्पादन में भूमिका: B12 शरीर के मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया के लिए जरूरी है।
एक सामान्य वयस्क को प्रतिदिन करीब 2.4 माइक्रोग्राम विटामिन B12 की जरूरत होती है। शाकाहारी लोगों के लिए इसका पर्याप्त स्रोत मिलना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पुराने स्पिरुलिना में क्या थी समस्या?
स्पिरुलिना को लंबे समय से एक पौष्टिक सुपरफूड माना जाता है। इसमें प्रोटीन और कई दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं। लेकिन B12 के मामले में सामान्य स्पिरुलिना को भरोसेमंद स्रोत नहीं माना जाता।
इसकी वजह यह है कि स्पिरुलिना में पाया जाने वाला B12 अक्सर 'स्यूडो-विटामिन B12' होता है। यह रासायनिक रूप से असली B12 जैसा दिखाई देता है, लेकिन मानव शरीर इसे प्रभावी तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इसलिए सिर्फ सामान्य स्पिरुलिना खाने से B12 की कमी पूरी होने की गारंटी नहीं होती।
क्लिनिकल न्यूट्रिशन विशेषज्ञ डॉ. दीप्ति खटूजा के मुताबिक, बाजार में उपलब्ध सामान्य स्पिरुलिना को फिलहाल B12 का भरोसेमंद स्रोत नहीं माना जाता। नई तकनीक उम्मीद जगाती है, लेकिन इसके बड़े पैमाने पर इस्तेमाल से पहले और अध्ययन जरूरी हैं।
रोशनी को कंट्रोल करके वैज्ञानिकों ने किया कमाल
इस समस्या को दूर करने के लिए रीचमैन यूनिवर्सिटी के डॉ. असाफ त्जाचोर की अगुवाई में एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने रिसर्च की। इस टीम में आइसलैंड, डेनमार्क और ऑस्ट्रिया के वैज्ञानिक भी शामिल थे।
रिसर्च में आइसलैंड की VAXA Technologies के बायोटेक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों ने स्पिरुलिना को उगाते समय उस पर पड़ने वाली रोशनी की वेवलेंथ और परिस्थितियों को नियंत्रित किया।
इस खास प्रक्रिया के जरिए स्पिरुलिना के अंदर ऐसे बदलाव किए गए, जिससे वह स्यूडो-B12 की जगह एक्टिव विटामिन B12 बनाने लगा। यही वह रूप है जिसे मानव शरीर इस्तेमाल कर सकता है।
रिसर्च में यह भी पाया गया कि इस प्रक्रिया से तैयार स्पिरुलिना में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों से जुड़े पोषक तत्व भी मौजूद रहे।
बीफ से ज्यादा मिला एक्टिव B12
नई तकनीक से तैयार स्पिरुलिना की लैब टेस्टिंग में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए।
- 100 ग्राम स्पिरुलिना में करीब 1.64 माइक्रोग्राम एक्टिव B12 पाया गया।
- वहीं 100 ग्राम बीफ में B12 की मात्रा करीब 0.7 से 1.5 माइक्रोग्राम के बीच बताई गई।
- यानी नई तकनीक से तैयार स्पिरुलिना में एक्टिव B12 की मात्रा बीफ में मिलने वाली मात्रा से भी अधिक हो सकती है।
डॉ. असाफ त्जाचोर के अनुसार, यह रिसर्च बताती है कि नियंत्रित प्रकाश व्यवस्था के जरिए स्पिरुलिना में पर्याप्त मात्रा में एक्टिव B12 तैयार किया जा सकता है। इससे भविष्य में पारंपरिक पशु-आधारित खाद्य पदार्थों का एक टिकाऊ विकल्प विकसित करने की संभावना बनती है।
पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण
मांस और डेयरी उत्पादों के उत्पादन में जमीन, पानी और चारे की बड़ी मात्रा की जरूरत होती है। इसके अलावा पशुपालन से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन भी होता है।
इसके मुकाबले स्पिरुलिना की खेती में अपेक्षाकृत कम जमीन और पानी की जरूरत होती है। रिसर्च में आइसलैंड की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बड़े पैमाने पर स्पिरुलिना उत्पादन की संभावनाओं का भी आकलन किया गया।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, अगर वहां उपलब्ध ऊर्जा संसाधनों के एक हिस्से का इस्तेमाल इस तरह के उत्पादन में किया जाए, तो हर साल बड़ी मात्रा में स्पिरुलिना बायोमास तैयार किया जा सकता है।
करोड़ों लोगों की B12 जरूरत पूरी करने की संभावना
रिसर्च में अनुमान लगाया गया है कि बड़े पैमाने पर उत्पादन होने पर इस तकनीक से तैयार स्पिरुलिना से हर साल बड़ी मात्रा में एक्टिव B12 उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे खासकर उन लोगों को फायदा हो सकता है, जिनके लिए पारंपरिक खाद्य स्रोतों से पर्याप्त B12 हासिल करना मुश्किल होता है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि फिलहाल लोग बाजार में मिलने वाले सामान्य स्पिरुलिना को B12 सप्लीमेंट का विकल्प मान लें। नई तकनीक अभी रिसर्च और विकास के चरण में है और इसके सुरक्षित एवं प्रभावी व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए आगे और अध्ययन की जरूरत होगी।
क्या बदल सकती है भविष्य की डाइट?
वैज्ञानिकों की यह खोज सिर्फ B12 की कमी से निपटने तक सीमित नहीं है। यह इस बात की संभावना दिखाती है कि बायोटेक्नोलॉजी और नियंत्रित वातावरण की मदद से पौधों और शैवाल से जरूरी पोषक तत्वों का उत्पादन किया जा सकता है।
अगर यह तकनीक बड़े पैमाने पर सफल होती है, तो भविष्य में शाकाहारी और वीगन लोगों के लिए एक्टिव B12 का एक नया स्रोत उपलब्ध हो सकता है। हालांकि अभी इसे आम बाजार तक पहुंचने में समय लगेगा और इसकी प्रभावशीलता, सुरक्षा तथा उत्पादन लागत को लेकर और रिसर्च जरूरी है।