शरीर का संतुलन और रीढ़ की हड्डी मजबूत करने के लिए अपनाएं 'वशिष्ठासन', ऐसे करें अभ्यास
नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। वशिष्ठासन योगासन एक ऐसा शक्तिशाली आसन है, जो शारीरिक शक्ति और मानसिक एकाग्रता बढ़ाता है। यह एक साइड-प्लैंक अभ्यास नहीं है बल्कि अपनी सीमाओं को चुनौती देकर आंतरिक संतुलन पाने का मार्ग है।
वशिष्ठासन संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना हुआ है। 'वशिष्ठ' का अर्थ है 'श्रेष्ठ' या 'सबसे उत्तम' और 'आसन' का अर्थ है 'बैठने या शरीर की मुद्रा'। अंग्रेज़ी में इसे साइड प्लैंक पोज कहा जाता है। इस आसन को करने के दौरान शरीर का भार एक हाथ और पैर के बाहरी किनारे पर संतुलित रहता है। सिर से लेकर एड़ी तक शरीर एक सीधी तिरछी रेखा बनाता है, दूसरा हाथ सीधा ऊपर की ओर रहता है और नजर ऊपर उठे हुए हाथ की ओर होती है। यह आसन शरीर में संतुलन, स्थिरता और एकाग्रता विकसित करता है।
आयुष मंत्रालय ने भी इस आसन के महत्व पर प्रकाश डाला है। उनके अनुसार, वशिष्ठासन (साइड प्लैंक) संतुलन और शारीरिक शक्ति बढ़ाने वाला एक प्रमुख योगासन है। यह मुद्रा शरीर के संतुलन, एकाग्रता और रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने में बेहद प्रभावी है। इस आसन के नियमित अभ्यास करने से चलने, खड़े रहने और लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने के दौरान भी शरीर की मुद्रा (पोश्चर) सुधरती है और संतुलन पहले से बेहतर हो जाता है।
इस आसन को करने के लिए सबसे पहले जमीन पर बैठ जाएं और दोनों पैरों को सामने की तरफ सीधा फैला लें। अब अपने दोनों हाथों को हथेलियों के सहारे कूल्हों के पास जमीन पर टिका लें। अपने शरीर के पूरे वजन को धीरे-धीरे दाहिनी हथेली और दाहिने पैर के बाहरी हिस्से पर स्थानांतरित करें। अब अपने बाएं पैर को दाहिने पैर के ऊपर बिल्कुल सीधा रख लें (ताकि दोनों पैर एक-दूसरे के ऊपर आ जाएं)। बाएं हाथ को अपनी कमर पर टिका लें और दाहिने हाथ के मजबूत सहारे से शरीर को ऊपर की तरफ उठाएं। गहरी सांस लेते हुए अपने बाएं हाथ को आसमान की तरफ बिल्कुल सीधा ऊपर उठाएं। गर्दन को ऊपर की ओर मोड़ें और अपनी बाएं हाथ की उंगलियों की तरफ देखें। इस स्थिति में शरीर एक सीधी रेखा में होना चाहिए। इस अवस्था में कुछ सेकंड सामान्य रूप से सांस लेते हुए रुकें। इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए सामान्य अवस्था में वापस आ जाएं।
यदि आपको कलाई, कोहनी या कंधे में गंभीर चोट या दर्द हो, तो इस आसन से बचें।
--आईएएनएस
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