15 साल की उम्र में दिल की बीमारी से जूझे थे रोनाल्डो! इलाज के बाद बने फुटबॉल के सुपरस्टार, जानिए क्या है टैचीकार्डिया
आज क्रिस्टियानो रोनाल्डो का नाम दुनिया के सबसे फिट और कामयाब फुटबॉल खिलाड़ियों में लिया जाता है। मैदान पर उनकी स्पीड, स्टैमिना और जबरदस्त फिटनेस लाखों लोगों को प्रेरित करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि किशोरावस्था में रोनाल्डो को दिल से जुड़ी एक ऐसी समस्या का सामना करना पड़ा था, जो उनके फुटबॉल करियर के रास्ते में बड़ी रुकावट बन सकती थी?
कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 15 साल की उम्र में रोनाल्डो को टैचीकार्डिया नाम की समस्या का पता चला था। इस स्थिति में दिल सामान्य से ज्यादा तेजी से धड़क सकता है। हालांकि, समय पर जांच और इलाज के बाद रोनाल्डो ने दोबारा मैदान पर वापसी की और आगे चलकर फुटबॉल की दुनिया के सबसे बड़े सितारों में अपनी जगह बनाई।
इस बीमारी को समझने के लिए कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों के मुताबिक, टैचीकार्डिया सिर्फ तेज धड़कन का नाम नहीं है। आमतौर पर आराम की स्थिति में हार्ट रेट 100 बीट प्रति मिनट से ज्यादा होने पर इसे टैचीकार्डिया कहा जाता है। हालांकि, हर बार तेज धड़कन किसी बीमारी का संकेत नहीं होती।
जब हम एक्सरसाइज करते हैं, तनाव में होते हैं, बुखार आता है या शरीर में पानी की कमी होती है, तब भी दिल की धड़कन तेज हो सकती है। यह शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया हो सकती है। लेकिन अगर दिल की इलेक्ट्रिकल सिस्टम में गड़बड़ी के कारण धड़कन असामान्य तरीके से तेज हो रही है, तो इसकी मेडिकल जांच जरूरी हो सकती है।
युवा खिलाड़ियों को क्यों रहना चाहिए सावधान?
अक्सर माना जाता है कि जो लोग रोजाना खेलते हैं या एक्सरसाइज करते हैं, उनका दिल पूरी तरह सुरक्षित होता है। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, खिलाड़ी होना हृदय संबंधी हर समस्या से सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
अगर किसी युवा खिलाड़ी को बार-बार अचानक दिल तेजी से धड़कने लगे, सांस फूलने लगे, सीने में परेशानी महसूस हो या बेहोशी आए, तो इन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
खासकर खेलते समय या एक्सरसाइज के दौरान बेहोश होना एक ऐसा लक्षण है, जिसकी मेडिकल जांच कराना जरूरी माना जाता है। इसे सिर्फ थकान, गर्मी या पानी की कमी समझकर छोड़ देना सही नहीं हो सकता।
रोनाल्डो का इलाज कैसे किया गया था?
उपलब्ध रिपोर्ट्स के अनुसार, रोनाल्डो का इलाज कैथेटर एब्लेशन नाम की प्रक्रिया से किया गया था। यह एक मिनिमली इनवेसिव मेडिकल प्रक्रिया है, जिसमें पतली कैथेटर को ब्लड वेसेल के रास्ते दिल तक पहुंचाया जाता है।
डॉक्टर इलेक्ट्रिकल सिग्नल की जांच करके यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि असामान्य धड़कन पैदा करने वाला हिस्सा कहां है। इसके बाद विशेष ऊर्जा की मदद से उस हिस्से को निष्क्रिय किया जाता है, ताकि असामान्य इलेक्ट्रिकल सिग्नल को रोका जा सके।
तेज धड़कन का मतलब हमेशा कमजोर दिल नहीं
दिल की धड़कन में गड़बड़ी को लेकर एक बड़ी गलतफहमी यह है कि इसका मतलब दिल कमजोर है। ऐसा जरूरी नहीं है।
किसी व्यक्ति का हार्ट स्ट्रक्चर के हिसाब से पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है, लेकिन उसके दिल की इलेक्ट्रिकल रिद्म में समस्या हो सकती है। इसलिए बार-बार होने वाले असामान्य लक्षणों की सही वजह जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
रोनाल्डो की कहानी यह दिखाती है कि कम उम्र में सामने आई स्वास्थ्य संबंधी समस्या का समय पर पता चलना और उचित इलाज मिलना किसी व्यक्ति के आगे के जीवन और करियर के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर आपको बार-बार अचानक दिल बहुत तेज धड़कता हुआ महसूस हो, बिना वजह चक्कर या बेहोशी आए, सीने में दर्द या असहजता हो, अथवा एक्सरसाइज के दौरान असामान्य रूप से सांस फूलने लगे, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
इसके अलावा, अगर परिवार में कम उम्र में गंभीर हृदय रोग या अचानक मृत्यु का इतिहास रहा है, तो इसकी जानकारी भी डॉक्टर को जरूर देनी चाहिए।